जागरण संवाददाता, चंडीगढ़ : वक्त के साथ तकनीक ने काफी तरक्की की है। मगर किसान आज भी वहीं है। ऐसे में हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि यही वो किसान है जो हमें अन्न दे रहे हैं। हमें किसान और खेती की नई पीढ़ी से बात करनी होगी। हमें समझना होगा कि हम जो खा रहे हैं, वो वही हताश किसान उगा रहे हैं, जिन्हें खेती के लिए पेस्टीसाइड का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। ऑर्गेनिक फार्मर मार्केट की संस्थापक रमन मान ने कुछ इसी अंदाज में युवाओं को ऑर्गेनिक फार्मिग से जोड़ने की कोशिश की। उन्होंने गोपाल स्वीट्स-8 में हुए एक सेशन में युवाओं को ऑर्गेनिक फार्मिग से जुड़ी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आजकल युवा हर क्षेत्र में बेहतर कर रहा है, मगर किसानी ऐसा क्षेत्र है, जिसे अभी तक ज्यादा युवाओं से जोड़ा नहीं गया है। ऐसे में मेरी कोशिश इन्हीं युवाओं को इस और लाने की है। घर से करें शुरुआत

मान ने कहा कि युवाओं को एक बार मिट्टी से जोड़ा जाए, तो यकीनन वो इसमें नए करियर की तलाश कर सकते हैं। हमें सबसे पहले घर से ही शुरुआत करनी चाहिए। चाहे बालकनी हो, छत हो या कोई छोटी सी जगह। आप छोटी-छोटी ह‌र्ब्स से शुरू कर सकते हैं, जिसमें पुदीना, हल्दी और ऐसी ही कई चीजें शामिल हैं। इससे आप उगने के प्रोसेस और पौधों से जुड़ी जानकारी मिलेगी। हमें ये जानना जरूरी है कि हम इन दिनों प्रदूषित वातावरण में रह रहे हैं, जिसमें हमारी मिट्टी भी पेस्टीसाइड्स छिड़कने की वजह से अब उर्वर नहीं रही। इसमें आप ऑर्गेनिक तरीके से फल और सब्जियां जल्दी नहीं उगा सकते हैं। ऐसे में हमें मिट्टी को दोबारा उर्वर बनाना होगा, उससे जुड़े साइंस को समझना होगा। पढ़े लिखे लोग बदल सकते हैं किसान की जिदगी

मान ने कहा कि किसानों को वर्षो से सरकार से फायदा नहीं मिला। ऐसे में अब बारी हमारी है, युवा, पढ़े-लिखे लोग इसमें आएंगे, तो वो यकीनन पेस्टीसाइड्स और बेहतर खेती से जुड़ी रिसर्च करेंगे। हमने इसी कोशिश में ऑर्गेनिक फार्मर मार्केट को शुरू किया। जिसमें शहर के कई ऑर्गेनिक फार्मर आगे आए। हमारी कोशिश ऐसे ही नई पीढ़ी को इससे जोड़ने की है, उम्मीद है कि हम आने वाले वर्षो में ज्यादा से ज्यादा ऑर्गेनिक फार्मर शहर में देखेंगे।

Posted By: Jagran

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