जागरण संवाददाता, मोहाली : मोहाली फेज-11 में अवैध रूप से चल रही ऐंडलैस आइलेट्स नाम की कंपनी पर कई युवाओं ने विदेश भेजने के नाम पर धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया है। आरोप है कि ऐंडलैस आइलेट्स नाम की यह कंपनी 2016 में फेज-3बी2 में ब्लू स्टार इमीग्रेशन के नाम से काम कर रही थी, जिन्होंने वहा लोगों से ठगी करने के बाद अपना दफ्तर बंद कर दिया और फेज-11 में नए नाम से दफ्तर खोलकर ठगी का कारोबार शुरु कर दिया।

ठगी के पीड़ित लोगों ने थाना फेज-11 को कंपनी के खिलाफ शिकायत दी लेकिन पुलिस मुलाजिम दो दिन तक उन पर समझौता करवाने का दवाब बनाते रहे। पुलिस को जब भनक लगी कि मामला मीडिया के पास पहुंच गया है तो आनन फानन में मामला दर्ज कर लिया। एएसआइ वरिंदर सिंह ने बताया कि मोगा निवासी गुरजंट सिंह की शिकायत पर ब्लू स्टार इमिग्रेशन कंपनी की प्रबंधक संदीप कौर व अमृीता के खिलाफ आइपीसी की धारा 406, 420 व 24 के तहत मामला दर्ज किया गया है। उल्लेखनीय है कि इमीग्रेशन कंपनी चलाने के लिए पंजाब ट्रैवल प्रोफेशनल्ज रेगुलेशन एक्ट के तहत लाइसेंस लेना जरुरी होता है, लेकिन कंपनी के पास लाइसेंस नहीं था।

मामला दर्ज होने के अगले दिन फिर खुला दफ्तर

ब्लू स्टार इमीग्रेशन कंपनी के प्रबंधकों ने अपने दफ्तर का नाम बदल कर ऐंडलैस आइलेट्स रख लिया है। हैरत की बात तो यह है कि पीड़ित गुरजंट सिंह व अन्य लोग इस कंपनी को 3बी2 में ढूंढ़ रहे थे। वह उन्हें ढूंढ़ते हुए ऐंडलैस आइलेट्स के दफ्तर जा पहुंचे। वहां पहुंचकर जब उन्होंने स्टॉफ देखा तो वह हैरान रह गए। इस दफ्तर का सारा स्टॉफ वही था जिसने उनसे विदेश भेजने केलिए अलग-अलग किश्तों में कुल एक लाख 20 हजार रुपये लिए थे और उन्हें विदेश भी नहीं भेजा। उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस को तो पुलिस ने उनपर समझौते का दवाब बनाया।

पुलिस मुलाजिम ने 70 हजार में करवाया सौदा

गुरजंट के भाई ने बताया की जब पैसे ना देने पर फेज-11 थाने शिकायत करने गए तो पुलिस कर्मचारी ने 70 हजार में समझौता करवा दिया, लेकिन समझौते के बावजूद पैसे नहीं दिए। पैसे लेने के लिए उनसे प्रतिदिन मोगा से किराया लगाकर दफ्तर के चक्कर लगवाए जा रहे थे। गुरजंट सिंह ने बताया कि उक्त कंपनी ने ऐंडलैस आइलेट्स के साथ ही बीएस ग्रुप ऑफ कंपनी नाम से एक और इमीग्रेशन कंपनी खोली हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों दफ्तरों के मुख्य दरवाजे अलग-अलग हैं, लेकिन अंदर से एक गुप्त रास्ता रखा है। उन्होंने कहा कि जब कोई पीड़ित उनके पास पैसे लेने जाता तो उनके स्टॉफ का मेंबर गुप्त रास्ते से दूसरे दफ्तर में चला जाता और दूसरे दफ्तर का स्टॉफ उस दफ्तर में आकर डील करने लगता है।

कोट्स

शिकायत आने पर कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। अगर दफ्तर उसके बावजूद भी खुला है तो उसे चैक करवाकर बंद करवाया जाएगा। वरिंदर सिंह, एएसआइ फेज-11

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