2019 में मिलना था फ्लैट, 2025 में मिला कब्जा; मोहाली में ओमेक्स पर रेरा ने ठोका 31.51 लाख का ब्याज
ओमेक्स न्यू मुल्लांपुर के 'द लेक' प्रोजेक्ट में फ्लैट के कब्जे में 6 साल की देरी पर रेरा ने कंपनी ...और पढ़ें

रेरा ने कहा कि भुगतान नहीं होने पर रकम की वसूली भूमि राजस्व के बकाये की तरह की जा सकेगी।
HighLights
न्यू मुल्लांपुर में ओमेक्स के द लेक प्रोजेक्ट में फ्लैट।
खरीदार को आखिरकार रेरा से मिली बड़ी राहत।
भुगतान में देरी पर भूमि राजस्व की तरह वसूली।
जागरण संवाददाता, मोहाली। न्यू मुल्लांपुर स्थित ओमेक्स के द लेक प्रोजेक्ट में फ्लैट का इंतजार कर रहे खरीदार को आखिरकार रेरा से बड़ी राहत मिली है।
तय समय से करीब छह साल बाद कब्जा देने के मामले में पंजाब रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (रेरा) ने ओमेक्स न्यू चंडीगढ़ डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड पर कड़ा रुख अपनाते हुए खरीदार बिक्रम सिंह भुल्लर को 31.51 लाख रुपये ब्याज देने का आदेश दिया है।
मामले में सबसे अहम बात यह है कि फ्लैट का कब्जा 4 जुलाई 2019 तक दिया जाना था, लेकिन खरीदार को वास्तविक कब्जा 21 मई 2025 को मिला। यानी तय समय निकलने के बाद भी वर्षों तक खरीदार अपने घर का इंतजार करता रहा।
रेरा ने इस देरी को सामान्य परिस्थितियों का नतीजा मानने के बजाय कंपनी की जिम्मेदारी माना। रेरा के आदेश के अनुसार खरीदार ने फ्लैट के लिए कंपनी को 50,74,667 रुपये का भुगतान किया था।
इसी रकम पर 1 अगस्त 2019 से 30 अप्रैल 2025 तक 10.80 प्रतिशत की दर से ब्याज की गणना की गई। इसके आधार पर 31,51,368 रुपये ब्याज बनता है।
कोविड का तर्क भी नहीं आया काम
कंपनी की ओर से देरी के लिए कोविड महामारी और खरीदार की ओर से भुगतान में कथित देरी का हवाला दिया गया, लेकिन रेरा ने इन दलीलों को राहत का आधार नहीं माना। प्राधिकरण ने साफ किया कि कब्जे की निर्धारित समय-सीमा महामारी शुरू होने से पहले ही समाप्त हो चुकी थी।
अतिरिक्त 80 वर्ग फुट पर भी कंपनी को झटका
मामले में 80 वर्ग फुट अतिरिक्त क्षेत्र के लिए कंपनी ने करीब 2.95 लाख रुपये मांगे थे। रेरा ने कंपनी की मांग को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया और मूल समझौते में तय 2,275.50 रुपये प्रति वर्ग फुट की दर लागू करते हुए अतिरिक्त क्षेत्र की देय राशि 1,82,040 रुपये तय की।
खरीदार की करीब 9.75 लाख रुपये की देनदारी को 31.51 लाख रुपये के ब्याज में समायोजित करने के बाद कंपनी को लगभग 21.76 लाख रुपये की शुद्ध राशि देनी होगी। रेरा ने कंपनी को आदेश प्राप्त होने के 90 दिनों के भीतर भुगतान करने को कहा है। भुगतान नहीं होने पर रकम की वसूली भूमि राजस्व के बकाये की तरह की जा सकेगी।
