चंडीगढ़, [मनोज त्रिपाठी]। पंजाब के एेतिहासिक व सांस्कृतिक धरोहरों को लेकर सियासी दलों में चली आ रही सियासत का केंद्र बिंदु जलियांवाला बाग बनने जा रहा है। राज्‍य में अब जालियांवाला बाग पर राजनीति गर्मा गई है। राज्‍य में कांग्रेस और शिअद-भाजपा गठबंधन इसको लेकर आमने-सामने हैं।  केंद्र सरकार के अधीन बने इस ट्रस्ट के रखरखाव की जिम्मेवारी सरकार निजी ट्रस्ट के हवाले करने की कवायद में है। कांग्रेस ने पहले ही इसका विरोध शुरू कर दिया है। सोमवार को केंद्र ने चार माह से खाली पड़े ट्रस्टियों के पद भी भर दिए हैं। पहली बार है जब इस ट्रस्ट के ट्रस्टियों में किसी कांग्रेसी को जगह नहीं दी गई है।

टाटा ट्रस्ट ने दिखाई रखरखाव में रुचि, सिद्धू ने कहा- निजी हाथों में नहीं जाने देंगे

कांग्रेस की तरफ से पर्यटन मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने इस मामले का खुला विरोध शुरू कर दिया है। बीते दिनों केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालय के साथ हुई बैठक की कार्रवाई रिपोर्ट सिद्धू ने सोमवार को सार्वजनिक कर दी। रिपोर्ट में कहा गया है कि जलियांवाला बाग के रखरखाव में टाटा ट्रस्ट ने रुचि दिखाई है।

सिद्धू ने आरोप लगाया कि सरकार दिल्ली के लाल किले के रखरखाव को निजी हाथों में सौंप चुकी है। उसी प्रकार देश व पंजाब के तमाम हिस्सों में मौजूद धऱोहरों के रखरखाव को निजी हाथों में केंद्र सरकार सौंपना चाहती है। इसके बाद धरोहरों को देखने जाने वाले सैलानियों को टिकट लेना पड़ेगा। केंद्र सरकार जो भी चाहे कर ले, एमओयू तो राज्य सरकार के साथ ही हस्ताक्षर करना पड़ेगा। सिद्धू ने चार महीने से खाली पड़े ट्रस्टियों के पदों को भरने की भी मांग की थी।

केंद्र सरकार की तरफ से जलियांवाला बाग कांड के 100 वर्ष पूरे होने पर 14 अप्रैल को विश्व स्तरीय कार्यक्रम करने की घोषणा पहले ही की जा चुकी है। मौके पर लेजर शो व एक संग्रहालय भी बनाने की तैयारी की जा रही है। सिद्धू ने कहा कि 100 करोड़ रुपये मांगे गए थे, लेकिन आठ करोड़ रुपये केंद्र सरकार ने दिए हैं। इस राशि को बिना इजाजत के खर्च नहीं किया जा सकता है। जब ट्रस्टी बनेंगे तो टेंडर पास होगा और पूरी प्रक्रिया में छह महीने गुजर जाएंगे। इस हालात में छह माह बाद शताब्दी कार्यक्रम कैसे मनाया जा सकेगा।

कैप्टन अमरिंदर फिलहाल चुप

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह फिलहाल इस मामले पर चुप हैं, लेकिन कांग्रेस की पूरी कवायद है कि एतिहासिक धरोहर की राजनीति से किसी भी कीमत पर सूबे में उसकी सरकार होते हुए वह बाहर नहीं होगी। भाजपा ने इसे मुद्दा बनने से पहले ही ट्रस्टियों के खाली पद पर अकाली दल व भाजपा नेताओं को नियुक्त कर दिया है। बदहाल हालत में पड़े जलियांवाला बाग की सुध अब कांग्रेस को भी आ गई है। आने वाले समय में यह बड़ा सियासी मुद्दा बन सकता है और कांग्रेस व अकाली-भाजपा गठबंधन में घमासान हो सकता है।

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ट्रस्ट्री बने बादल, तरलोचन व मलिक

प्रधानमंत्री की चेयरमैनशिप में चलने वाले जलियांवाला बाग मेमोरियल ट्रस्ट का ट्रस्टी पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व राज्य सभा सदस्य श्वेत मलिक और पूर्व सांसद तरलोचन सिंह को बना दिया गया है। नए ट्रस्टियों की सबसे बड़ी चुनौती 2019 में आने वाला शताब्दी समारोह रहेगा।

ट्रस्टी बनने के बाद मलिक ने कहा कि 70 साल कांग्रेस के ट्रस्टी ट्रस्ट में रहे, पर उन्होंने कभी इसकी तरफ ध्यान नहीं दिया। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, राजनाथ सिंह, अरुण जेटली व पर्यटन मंत्री डा. महेश शर्मा के आभारी हैं। जलियांवाला बाग को वल्र्ड हैरीटेज बनाना उनकी प्राथमिकता रहेगी। लोग इसके इतिहास को भी जानें, इसके लिए थ्री-डी, फोर डी शो चलाए जाएंगे।

2013 में बने थे तीन कांग्रेसी ट्रस्टी

24 मई 2013 को केंद्र सरकार द्वारा राज्यसभा सदस्य अंबिका सोनी, पूर्व सांसद वीरेंद्र कटारिया व पूर्व सांसद एचएस हंसपाल को ट्रस्टी नियुक्त किया गया था। इनकी पांच साल की टर्म थी। श्वेत मलिक ने कुछ समय पहले आरोप लगाया था कि सोनी, कटारिया व हंसपाल शहीद स्थली का हाल जानने न तो कभी वहां आए और न ही इन्होंने कोई बैठक बुलाई। इसके विपरीत उनकी देखरेख में शहीद स्थली में लगातार सुविधाएं कम हुईं और चल रहे प्रोजेक्ट बंद हो गए।

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Posted By: Sunil Kumar Jha

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