चंडीगढ़/मोगा [जेएनएन/एएनआइ]। पंजाब कांग्रेस प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू ने एक बार फिर चरणजीत सिंह चन्नी सरकार पर निशाना साधा और भूख हड़ताल पर बैठने की धमकी दी। सिद्धू ने कहा कि दो महीने पहले जब चरणजीत सिंह चन्नी सरकार बनी थी तो हमने कहा था कि ड्रग तस्करी संबंधी रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाएगा, लेकिन अभी तक यह रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है। सिद्धू ने कहा कि लोग उनसे सवाल पूछते हैं। पंजाब कांग्रेस प्रधान ने कहा कि अगर ये रिपोर्ट जल्द नहीं खोली जाएगी तो वह सरकार के खिलाफ मरणव्रत पर बैठ जाएंगे। कहा कि पिछली कैप्टन सरकार रिपोर्ट को दबाकर बैठी थी। अब चन्नी सरकार को इसको खोल देना चाहिए।

नवजोत सिंह सिद्धू मोगा के वाघा पुराना स्थित नई दाना मंडी में पार्टी की रैली को संबोधित कर रहे थे। रैली में सीएम चरणजीत सिंह चन्नी भी मौजूद थे। सीएम जब तक मंच पर रहे सिद्धू उनके साथ नजर आए, लेकिन चन्नी के जाते ही सिद्धू ने सरकार पर हमला कर दिया। सिद्धू ने सीएम चरणजीत सिंह चन्नी का नाम लिए बिना कहा कि दो महीने पहले सरकार क्या वादा करके आई थी, अब ड्रग्स के मामले में पंजाब सरकार ने रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की तो वे सरकार के खिलाफ मरणव्रत पर बैठेंगे, जो गुनाह किया है भुगतना पड़ेगा।

बता दें, नवजोत सिंह सिद्धू चन्नी सरकार पर पहले भी आक्रामक होते रहे हैं, लेकिन आज उन्होंने सीधे-सीधे भूख हड़ताल पर बैठने की धमकी दे दी है। सिद्धू के आक्रामक तेवरों से कार्यकर्ता भी असहज हो रहे हैं। आज भी नवजोत सिंह सिद्धू चरणजीत सिंह चन्नी के साथ मंच पर बेहतर केमिस्ट्री के साथ नजर आए, लेकिन चन्नी के जाते ही उनके तेवर आक्रामक हो गए। 

सिद्धू के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की अर्जी पर सुनवाई 10 दिसंबर तक स्थगित

उधर, पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिद्धू के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की एडवोकेट पीपीएस बाजवा की अर्जी पर हरियाणा के एडवोकेट जनरल ने वीरवार को सुनवाई की, सुनवाई के दौरान बाजवा ने हरियाणा के एडवोकेट जनरल द्वारा मांगी गई जजमेंट्स और अन्य दस्तावेज उन्हें सौंप दिए हैं। हरियाणा के एडवोकेट जनरल अब इन दस्तावेजों पर गौर करेंगे। इसलिए अब बाजवा की अर्जी पर सुनवाई 10 दिसंबर तक स्थगित कर दी गई है।

यह आपराधिक अवमानना की याचिका एडवोकेट पीपीएस बाजवा ने दाखिल की है। बाजवा का आरोप है कि पंजाब के हजारों करोड़ के ड्रग रैकेट मामले की हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही है, लेकिन सिद्धू इस सुनवाई के दौरान लगातार इस मामले पर टिप्पणी कर इस मामले में दखल दे रहे हैं। यह सीधे तौर पर हाई कोर्ट की अवमानना का मामला है, लेकिन आपराधिक अवमानना की याचिका हाई कोर्ट में दाखिल करने से पहले इसके लिए एडवोकेट जनरल की स्वीकृति ली जानी जरूरी होती है। जब यह याचिका दायर की गई थी उस समय पंजाब एडवोकेट जनरल का पद रिक्त था जिस कारण स्वीकृति के लिए यह हरियाणा के एजी के पास दायर की गई।

Edited By: Kamlesh Bhatt