चंडीगढ़, [कैलाश नाथ]। पंजाब में धार्मिक आयोजन को लेकर एक बार फिर राजनीति गर्माएगी। गरु श्री नानकदेव के 550वें प्रकाश पर्व पर समारोह के आयोजन को लेकर कैप्‍टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्‍व वाली प्रदेश की कांग्रेस सरकार और शिरो‍मणि अकाली दल (शिअद) के बीच होड़ मच गई थी। अब गुरु तेग बहादुर जी का 400वां प्रकाश पर्व अगले वर्ष आना है। इस प्रकाश पर्व पर समारोह के आयोजन को लेकर अभी से कैप्‍टन सरकार और शिअद में श्रेय होने की होड़ मचने लगी है।

गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व को लेकर भी छिड़ी थी श्रेय लेने की जंग

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने प्रकाश पर्व को बनाने के लिए मुख्य सचिव के नेतृत्व में स्टीयरिंग कमेटी बनाने को मंजूरी दी, तो वहीं शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल ने बगैर देर लगाए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान सुखबीर ने प्रकाश पर्व बनाने के लिए एक राष्ट्रीय स्तर की समागम कमेटी बनाने की मांग भी रख दी।

यह पहला मौका नहीं है जब अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल ने केंद्रीय मंत्रियों से तालमेल बैठाने में तेजी दिखाई हो। गुरु नानक जी के 550वें प्रकाश पर्व को मनाने के दौरान भी अकाली दल ने यही तेजी दिखाई थी। कांग्रेस सरकार समारोह के आयोजन की योजना ही बना रही थी और सुखबीर बादल व एसजीपीसी के प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात कर उन्हें निमंत्रण पत्र दे दिया था।

गुरु तेग बहादुर जी के 400वें प्रकाश पर्व के लिए केंद्र से वित्तीय सहायता लेने के लिए योजना ही बना रही है कि सुखबीर बादल ने शिरोमणि कमेटी तथा दिल्ली कमेटी के अध्यक्ष, तख्त श्री हजुर साहिब व तख्त श्री पटना साहिब के जत्थेदारों के साथ अमित शाह से मुलाकात कर ली। उन्‍होंले गुरु साहिब को सच्ची श्रद्धांजलि के तौर पर शताब्दी जश्नों को भव्‍य तरीके से मनाने के लिए एक राष्ट्रीय स्तर की समागम कमेटी का गठन करे की मांग भी कर दी। अकाली प्रतिनिधिमंडल ने गृहमंत्री से यह भी अनुरोध किया कि गुरु साहिब की याद में दिल्ली में एक राष्ट्रीय एकता यादगार स्थापित की जाए तथा इस पवित्र दिवस पर राष्ट्रीय अवकाश की घोषणा की जाए।

वोट बैंक की है लड़ाई

पंजाब में 2022 में होनेवाले विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से सियासी जंग छिड़ गई है। कांग्रेस और शिअद में होड़ सिखों का वोट ज्‍यादा से ज्‍यादा अपनी ओर करने की होड़ है। कांग्रेस सरकार भले ही सीधे नहीं लेकिन अपरोक्ष रूप से सिखों के धार्मिक मुद्दे को कैश करने में जुटी हुई है। गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व को लेकर कैप्‍टन सरकार ने जिस प्रकार अपना सब कुछ झोंक दिया, उससे अकाली दल में बेचैनी छा गई।

अकाली दल की चिंता है कि अगर गुरु तेग बहादुर जी के प्रकाश पर्व को लेकर सरकार की गति ऐसे ही बनी रही तो 2022 में उनके लिए दिक्कत खड़ी हो सकती है। यही कारण है कि अकाली दल धार्मिक मुद्दे को लेकर कतई कोई ढील नहीं बरतना चाहती है। वहीं, अकाली दल की परेशानी अभी भी बेअदबी कांड है। क्योंकि जिस प्रकार से कांग्र्रेस के साथ 1984 जुड़ा हुआ है। उसी प्रकार से अकाली दल के साथ बेअदबी कांड जुड़ गया है। ऐसे में अपनी राजनीतिक बिसात को बचाने के लिए अकाली दल के पास 'गुरु' ही सबसे बड़ा सहारा हैं।

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Posted By: Sunil Kumar Jha

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