राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़ : यूटी इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों द्वारा अपने कर्मचारियों की जन्मतिथि बदलने में कथित भेदभाव के मामले पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ के पूर्व चीफ इंजीनियर वीके भारद्वाज और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है।

चंडीगढ़ इंजीनियरिंग विभाग के पूर्व कर्मचारी राम लाल अरोड़ा द्वारा दायर की गई इस याचिका में शिकायत की गई है कि इंजीनियरिंग विभाग ने उनकी सेवानिवृति से पहले उनकी जन्म तिथि में संशोधन करने से तो इंकार कर दिया था परन्तु उनके जैसे ही मामले में एक अन्य कर्मचारी उजागर सिंह की जन्म तिथि में संशोधन करके उनके सेवाकाल में विस्तार कर दिया गया।

अपनी आपराधिक शिकायत रद किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे राम लाल अरोड़ा ने याचिका में कहा है कि अधिकारियों ने उनकी जन्मतिथि में संशोधन का आवेदन खारिज किया था। बाद में प्रशासन ने उनके द्वारा अदालत में दायर की गई याचिका पर भी नियमों का हवाला देते हुए उनकी माग को खारिज कर दिया। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस राजमोहन सिंह ने कहा कि याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में उनका आवेदन खारिज करने के आदेशों को चुनौती नहीं दी है पर उन्होंने दो मामलो में किए गए भेदभाव को उठाया है।

याचिका के अनुसार,जन्म तिथि बदलवाने के 34 वर्ष बाद आवेदन करने के कारण उनकी माग खारिज कर दी गई जबकि उजागर सिंह की ऐसे ही माग को उनकी सेवानिवृति से सिर्फ 4 महीने पहले स्वीकार कर लिया गया। उजागर सिंह द्वारा अपनी पहली जन्मतिथि को 3 जून, 1947 की जगह 16 मार्च, 1948 करने का आवेदन किया था। अपने 39 साल के सेवाकाल के बाद उजागर सिंह ने यह आवेदन किया जिसे प्रशासन ने स्वीकार कर लिया, जबकि याचिकाकर्ता का आवेदन 34 साल का हवाला देकर रद कर दिया गया।

Posted By: Jagran

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