जेएनएन, चंडीगढ़। जानलेवा निपाह वायरस को लेकर यूटी हेल्थ विभाग ने शहर के सभी होटलों को अलर्ट जारी कर दिया है। करीब 50 बड़े होटलों की लिस्ट तैयार कर मेल और लिखित में उनको यह अलर्ट भेज भी दिया है। सब को स्पष्ट रूप से कहा गया है कि बाहरी राज्यों से आने वाले टूरिस्ट पर नजर बनाए रखें।

अगर केरल, पश्चिम बंगाल, सिंगापुर और इंडोनेशिया से टूरिस्ट आते हैं तो तुरंत इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को देनी होगी। इसके अलावा उन स्थानों की भी लिस्ट बनाई गई है जहां निपाह वायरस के मरीजों की ट्रैक हिस्ट्री सामने आ रही है। इसके बाद विभाग की टीम होटल पहुंच कर उनके स्वास्थ्य का जायजा लेगी। एनिमल हस्बेंडरी विभाग को भी पशुओं के बारे में हरसंभव जानकारी देने को कहा गया है। इसके अलावा शहर के सभी बड़े संस्थानों को भी आगाह कर दिया है। किसी भी तरह की स्थिति से निपटने के लिए अस्पतालों को अलर्ट कर दिया गया है।

वैटर्नरी अस्पताल भी देंगे हर जानकारी

स्वास्थ्य विभाग ने पशु अस्पतालों को लिखित में भेजा है कि अगर कोई जानवर बीमार या उसमें इस तरह की संभावना दिखती है तो तुरंत प्रभाव से स्वास्थ्य विभाग की टीम को जानकारी देंगे जो वहां पहुंच कर उनकी जांच करेगी। जानवरों में सूअर, घोड़ा, बंदर, भेड़ तथा बकरी समेत हर पशु की बीमारी के बारे में वैटर्नरी अस्पताल को सूचना मुहैय्या करवानी होगी। 

वायरस को लेकर टीम तैनात

वायरस को लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा टीम तैनात की गई हैं जो मामले को लेकर लगातार जागरूक कर रही है। मामले को लेकर हेल्थ सेक्रेटरी संज्ञान ले रहे हैं। डीएचएस और मलेरिया विंग के अधिकारी लगातार इसको लेकर उनको इनपुट दे रहे हैं। सेक्टर 16, जीएमसीएच-32 और पीजीआइ मिलकर इसको लेकर आगे की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

वायरोलॉजी के हेड प्रो. आरके राठो पुणे में

मामले को लेकर पीजीआइ वायरोलॉजी विभाग के हेड नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ वायरोलॉजी पुणे में हैं। वहां बीमारी से निपटने को लेकर बैठक में हिस्सा ले रहे हैं। पीजीआइ ने वायरस को लेकर संबंधित विभाग के डॉक्टर्स को अलर्ट कर रखा है। पीजीआइ डायरेक्टर प्रो. जगत राम मामले को लेकर हर इनपुट विभाग से ले रहे हैं।

बता दें, चमगादड़, सूअरों व अन्य जानवरों के जरिये यह बीमारी फैलती है। एक आदमी से दूसरे आदमी में भी यह बीमारी फैल सकती है।

ऐसे लक्षण हों तो तुरंत लें चिकित्सा परामर्श

यह बीमारी दिमागी बुखार (इंसेफेलाइटिस) की तरह होती है। इसके संक्रमण से बुखार के अलावा सांस लेने में तकलीफ, गले में कुछ फंसे होने का अनुभव, पेट दर्द, उल्टी, थकान व आंखों की रोशनी कमजोर होने जैसा महसूस होता है।

बचाव के उपाय

  • चमगादड़ या पक्षियों द्वारा कुतरे फल न खाएं
  • बीमारी से पीड़ित किसी भी व्यक्ति से संपर्क न करें
  • संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए हाथों की नियमित सफाई जरूरी है
  • एन 95 मास्क का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

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