जेएनएन, मोहाली। देश में भूख व कुपोषण की समस्याओं को दूर करने के लिए काम करने की जरूरत है, ताकि देश में पोषण क्रांति आए। यह बात केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने राष्ट्रीय कृषि-खाद्य जैव प्रौद्योगिक संस्थान (नाबी) और सेंटर ऑफ  इनोवेटिव एंड अप्लाइड बायोप्रोसेसिंग (सीआइएबी) के  नए प्रशासनिक  एवं अनुसंधान भवनों के उद्घाटन के दौरान कही।

इस मौके पर प्रो. विजय राघवन, सचिव डीबीटी और अन्य वरिष्ठ डीबीटी अधिकारी मौजूद थे। नाबी देश का पहला कृषि-खाद्य एवं पोषण आधारित जैव प्रौद्योगिकी संस्थान है। इसे नॉलेज सिटी सेक्टर-81 मोहाली में जैव प्रौद्योगिक  विभाग ने स्थापित किया है। सीआइएबी नाबी के साथ ही स्थित है।

इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अन्वेषकों और विद्यार्थियों का उद्देश्य बड़ा होना चाहिए। उन्हें अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए क ठिन परिश्रम करना चाहिए। संस्थानों की फैकल्टी के साथ बातचीत करते हुए केंद्रीय मंत्री ने नई-नई चीजों को करने की आवश्यकता पर बल दिया, जिसका समाज में रह रहे आम आदमी पर तुरंत प्रभाव पड़े।

उन्होंने अनवेष्कों से अपनी दैनिक सोच से कुछ हटके  करने का भी आह्वान किया। हर्षवर्धन ने वैज्ञानिकों से अपने लक्ष्यों को निश्चित समयावधि में पूरा करने की भी बात कही। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ये ऐसा पहला संस्थान है जो कि अनुपयोगी और कमतर उपयोगी बायोमास के मूल्य परिवर्धन के  जरिए सेकेंडरी एग्रीकल्चरल बायोप्रोडक्ट्स के उत्पादन के लिए समर्पित है।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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