जेएनएन, चंडीगढ़। पंजाब के स्‍थानीय निकाय मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने पत्‍नी अौर बेटे को राज्‍य सरकार द्वारा पद देेने के मामले में विपक्ष के हंगामे के बाद शनिवार को मास्‍टर स्‍ट्रोक मारा। सिद्धू ने एेलान किया कि उनकी पत्‍नी डॉ. नवजोत कौर सिद्धू वेयर हाऊसिंग कारपोरेशन का चेयरपर्सन नहीं बनेंगी और बेटा करन सिंह सिद्धू  भी असिस्टेंट एडवोकेट जनरल पद पर ज्‍वाइन नहीं करेंगे। सिद्धू ने कहा कि यह उनका फैसला नहीं है बल्कि बेटे व पत्नी ने यह निर्णय किया है।

गौरतलब है कि सरकार ने सिद्धू की पत्नी को करीब एक माह पहले वेयरहाउस कॉर्पोरेशन का चेयरपर्सन नियुक्त किया था। वहीं, शुक्रवार को खुलासा हुआ कि उनके बेटे को असिस्‍टेंट एडवोकेट जनरल का पद दिया गया है। इसके बाद पंजाब की राजनीति गर्मा गई और सिद्धू विरोधियों के निशाने पर आ गए थे।  भाजपा और अकाली दल ने कैप्टन सरकार व सिद्धू पर हमला कर दिया। उन पर परिवारवाद को बढ़ावा देने के आरोप लगाए गए।

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शनिवार को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह व पंजाब सरकार का धन्यवाद करते हुए सिद्धू ने पूरे मामले पर अपना पक्ष रखा और विराेणियों की बोलती बंद करने के लिए मास्‍टर स्‍ट्रोक जड़ दिया। सिद्धू के कहा करन ने विदेश से वकालत की पढ़ाई की है और करीब डेढ़ साल से पंजाब में है। सिद्धू ने अपने सियासी करियर की पूरी कहानी काे दोहराया और अपनी कुर्बानियों के बारे में बताया। उन्‍होंने बताया कि किस प्रकार उन्होंने पटियाला छोड़कर अमृतसर जाने का फैसला किया था। वहां चुनाव लड़े और जीते। फिर किस प्रकार भाजपा में उन्हें साइड लाइन किया गया।

 

राज्यसभा की सदस्यता छोडऩे से लेकर अपनी पत्नी के सियासी संघर्ष की कहानी बताते हुए सिद्धू ने कहा कि वह सरकार व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के आभारी हैं, लेकिन उनकी पत्नी ने वेयर हाउस कॉरपोरेशन के चेयरपर्सन का पद और बेटे ने सहायक एडवोकेट जनरल का पद ठुकरा दिया है। उन्होंने कहा कि सुबह उनकी दोनों से फोन पर लंबी बातचीत हुई। इसके बाद ही उन्होंने पद ज्वाइन न करने की बात कही।

सिद्धू ने कहा कि उनकी पत्‍नी डॉ. नवजोत कौर सिद्धू को उनकी काबिलयत के कारण मुख्‍यमंत्री कैप्‍टन अमरिंदर सिंह ने वेयर हाउसिंग कारपोरेशन का चेयर पर्सन बनाया। इसके लिए उनका बहुत आभार है आैर उनके इस निर्णय का बेहद सम्‍मान करते हैं। इसी तरह बेटा करन सिद्धू अपनी काबलियत के कारण असिस्टेंट एडवोकेट जनरल चुना गया।

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सिद्धू ने शिरोमणि अकाली दल और भाजपा के नेताओं पर भी हमले किए। उन्‍होंने कहा कि विपक्षी नेताओं ने जिस तरह से इस मामले में राजनीति की वह बेहद शर्मनाक है। सुखबीर बादल और अकाली दल के नेता जिस तरह परिवारवाद की राजनीति की है उसको देखते हुए दूसरे पर अंगुली उठाने का उनको हक नहीं है।

आज मुझसे बड़ा हो गया बेटा, पिता के लिए दी कुर्बानी

प्रेस कांफ्रेंस के दौरान एक बार सिद्धू बेहद भावुक हो गए, लेकिन फिर खुद को संभाल लिया। उन्‍होंने अपनी बात बड़े सलीके से रखी, लेकिन कई बार उनकी आंखें भर आईं। देर शाम को एक बार जागरण ने उनेस बातचीत की तो उनकी बातों में एक पिता का दर्द  झलका। उन्होंने कहा, 'आज मेरा बेटा मुझसे बड़ा हो गया है। उसने अपने पिता के लिए अपने सपने की कुर्बानी दी है। यह फैसला भी करन ने खबरें पढ़ने के बाद लिया। वह विरोध्‍ाियों की इस बात से बेहद आहत था कि सरकार की मेहरबानी से दो दर्जन से ज्यादा उम्मीदवारों के चयन में योग्यता के आधार पर उसका चयन न होकर सियासी चयन किया गया है। बेटे ने संघर्ष की नई राह दिखाई है। बेटे ने मुझसे कहा कि चिंता न करें, मेरे पास तमाम रास्ते खुले हैं।'

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शुरूआत में सिद्धू को कांग्रेस में शामिल कराने से खुश नहीं थे कैप्‍टन, अब दिए थे दो तोहफे

बता दें कि सिद्धू जब भाजपा से कांग्रेस में आए थे तो कैप्टन अमरिंदर सिंह बहुत खुश नहीं थे। यही कारण है कि उनके ज्वाइन करने के समय भी वह नहीं पहुंचे थे और राहुल गांधी ने सिद्धू को पार्टी ज्वाइन करवाई थी। कैप्टन सरकार में मंत्री बनने के बाद भी सिद्धू कई बार ऐसा बयान दे चुके हैं जिससे कैप्टन के लिए असहज स्थिति पैदा हो गई,इसके बावजूद सिद्धू का कद कांग्रेस में बढ़ा है। यही कारण है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उनकी पत्नी के बाद बेटे को भी अहम जिम्मेदारी पद पर नियुक्ति दी थी।

नवजोत सिद्धू का परिवार पुत्र करन सिद्धू, पत्‍नी डॉ. नवजोत कौर सिद्धू और बेटी राबिया सिद्धू। (फाइल फोटो)

बता दें, पिछले एक महीने में कैप्‍टन अमरिंदर सिंह सिद्धू ने एक के बाद एक तोहफे दिए। बेटे की नियुक्ति पिछले एक माह में सिद्धू के लिए तीसरी बड़ी खुशखबरी थी। गत माह उनकी पत्नी डॉ. नवजोत कौर सिद्धू को वेयरहाउस का चेयरपर्सन बनाया गया था। उस समय यह कहा जा रहा था कि रोड रेज केस में यदि सिद्धू फंसते हैं तो इसकी एवज में उनकी पत्नी को पहले ही पद दे दिया गया है, लेकिन कुछ दिन बाद ही सिद्धू के लिए सुप्रीम कोर्ट से राहत भरा फैसला आया।

सुप्रीम कोर्ट ने उनको इस मामले में महज एक हजार जुर्माना लगाकर छोड़ दिया। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट द्वारा सुनाई गई तीन साल की कैद की सजा को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धू को मारपीट का दोषी तो करार दिया, लेकिन गैरइरादतन हत्‍या के अारोप से बरी कर दिया।

परिवार के साथ नवजोत सिंह सिद्धू। (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट से मिली इस राहत के बाद सिद्धू का पार्टी में कद और बढ़ा। उन्हें राहत मिलने पर पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी व प्रियंका ने खुद उन्हें बधाई दी। इसके बाद सिद्धू सोनिया, राहुल व प्रियंका से मिलने पहुंचे। कांग्रेस हाईकमान सिद्धू को पंजाब में भविष्य का नेता मानकर चल रही है। सिद्धू के रूप में कांग्रेस को पंजाब में एक और नया चेहरा मिला है। 2019 के चुनाव में सिद्धू पंजाब के अलावा देश के अन्य राज्यों में भी पार्टी के स्टार प्रचारक हो सकते हैं।

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विपक्ष ने ऐसे किया सिद्धू पर हमला

सिद्धू के बेटे करन सिद्धू को कैप्टन सरकार द्वारा असिस्टेंट एडवोकेट जनरल बनाए जाने के बाद पंजाब की राजनीति गरमा गई। पूर्व स्थानीय निकाय मंत्री व वरिष्ठ भाजपा नेता अनिल जोशी ने कहा कि सिद्धू का चेहरा अब बेनकाब हो गया है। शिअद महासचिव व पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा कि कैप्टन सरकार में एक ही परिवार में सारी नौकरियां दी जा रही हैं।

सिद्धू के धुर विरोधी मजीठिया ने कहा कि सिद्धू ने सारी नौकरी अपने घर पर ही दे दी । पहले पत्नी को नौकरी दी, अब बेटे को। सिद्धू के दोहरे मापदंड सामने आ गए हैं। पर्दाफाश हो गया है कि वह मौकापरस्त हैं। सिद्धू के विरोधी पूर्व स्थानीय निकाय मंत्री अनिल जोशी ने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने तो हर घर में नौकरी देने का वायदा किया था मगर पूरे पंजाब में अब तक किसी घर में नौकरी नहीं मिली, जबकि एक ही घर में सभी नौकरियां बांट दी गई हैं।

उन्होंने कहा कि इस मामले में नवजोत सिद्धू ने वाकई में साबित कर दिया है कि वह फ्रॉड मंत्री हैं। जोशी ने कहा टीवी चैनल या कॉमेडी शो में कामेडी करना आसान है मगर जमीनी स्तर पर ईमानदारी से काम करना हर किसी के बस की बात नहीं है। पंजाब के विकास की बड़ी-बड़ी बातें करने वाले सिद्धू सिर्फ अपने परिवार का विकास कर रहे हैं।

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पंजाब सरकार ने की 28 लॉ अफसरों की नियुक्ति

बताया जाता है कि पंजाब सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में पंजाब सरकार के केसों को लड़ने के लिए एडवोकेट जनरल कार्यालय में तीन एडिशनल, 14 असिस्टेंट और 11 डिप्टी एडवोकेट जनरलों को नियुक्त किया है। इनमें से एक सिद्धू के बेटे करन सिद्धू भी थे। उन्हें असिस्टेंट एडवोकेट जनरल बनाया गया था।

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Posted By: Sunil Kumar Jha

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