-एसटीएफ की कार्यप्रणाली को लेकर किया विचार

-महीनों बाद डीजीपी दफ्तर गए मोहम्मद मुस्तफा

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मनोज त्रिपाठी, चंडीगढ़: स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के नए चीफ मोहम्मद मुस्तफा ने डीजीपी सुरेश अरोड़ा से मुलाकात कर एसटीएफ की नई रणनीति तय की। एक घटे तक चली दोनों अधिकारियों की बैठक में नई कार्यप्रणाली पर मंथन चला। कई महीनों बाद डीजीपी कार्यालय पहुंचे मुस्तफा ने एसटीएफ का चार्ज लेने से पहले डीजीपी से मुलाकात के साथ-साथ अपना एक्शन प्लान भी उन्हें दिया। इसमें कई अधिकारियों को एसटीएफ से हटाने पर मंथन हुआ।

एसटीएफ के गठन के बाद पूर्व चीफ हरप्रीत सिंह सिद्धू की रिपोर्टिग सीधे मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को थी। तेज तर्रार कार्यशैली को लेकर ही केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ में सिद्धू को पंजाब से डेपुटेशन पर लेकर जाकर कोबरा (कंमाडो बटालियन फॉर रेजोल्यूट एक्शन) की जिम्मेवारी सौंपी थी। वहीं से कैप्टन उन्हें एसटीएफ के चीफ के रूप में लेकर आए थे। एसटीएफ में अधिकारियों की तैनाती से लेकर अन्य कामों में सिद्धू से जैसी सिफारिश की थी सरकार ने उसे माना था।

मुस्तफा की कोशिश होगी कि वह अपनी टीम बनाकर काम करें। सूत्रों के अनुसार मुस्तफा व डीजीपी की चली लंबी बैठक में दोनों के बीच चली आ रही खींचतान भी खत्म हो गई है और अब आगे आने वाली लड़ाई को टीम के रूप में लड़ने की भी सहमति बनी है। मुस्तफा की रिपोर्टिग बतौर एसटीएफ चीफ अब डीजीपी को ही होगी। नतीजतन उन्होंने अपना एक्शन प्लान भी चार्ज लेने से पहले डीजीपी को सौंप दिया है। डीजीपी उसे संशोधित करके मंजूर करते हैं या नहीं इसका खुलासा अभी नहीं हो पाया है। मुलाकात की पुष्टि डीजीपी ने की है, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। सिद्धू की एसटीएफ में रहेगी दखलंदाजी

सरकार ने भले ही हरप्रीत सिंह सिद्धू को एसटीएफ से हटा कर मुख्यमंत्री कार्यालय के साथ जोड़ लिया है, लेकिन एसटीएफ में उनकी दखलंदाजी को बरकरार रखने का रास्ता भी खोल रखा है। एसटीएफ के गठन के बाद नशा मुक्त पंजाब के लिए सिद्धू की तरफ से तीन बड़े प्रोजेक्ट शुरू करवाए गए थे। सिद्धू की ओर से शुरू किए गए नशा मुक्ति केंद्रों को नशा मुक्त क्लीनिक के मॉडल के रूप में पेश किया गया था। इससे पहले नशेड़ियों पर दुनियाभर में नशा छुड़ाने को लेकर किए जा रहे प्रयोग का अध्ययन करने के बाद सिद्धू ने अमेरिका सहित अन्य देशों में इस अभियान पर काम कर रहे विशेषज्ञों की देखरेख में शुरू करवाया गया है। किस-किस किस्म के नशे को छुड़ाने के लिए किस दवा का कितना डोज देना है और नशेड़ियों की मनोवैज्ञानिक तरीके से नशा छुड़ाने में मदद करने का प्रोजेक्ट भी शामिल है। इसके इलावा बडी अभियान के तहत युवाओं को जोड़ने का अभियान के अलावा नशे के खिलाफ जागरूकता को लेकर सूबे में बनाई गई कमेटियों के प्रोजेक्टों पर सिद्धू मुख्यमंत्री कार्यालय में रहकर ही काम करते रहेंगे। आसान नहीं होगी मुस्तफा की राह

बतौर एसटीएफ चीफ मुस्तफा की राह आसान नहीं होगी। मुस्तफा केवल एसटीएफ के चीफ के रूप में नशे की सप्लाई चेन व नशा तस्करों के खिलाफ कारवाई के साथ-साथ नशे सिरे से एसटीएफ की कार्यप्रणाली को सेट करेंगे। सिद्धू द्वारा चलाए प्रोग्राम चूंकि उनकी देखरेख में चलाए जाएंगे, इसलिए मुस्तफा के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि वह सिद्धू को किस प्रकार एसटीएफ से दूर रख पाएं। खास तौर पर सरहद पार से आने वाले नशे की सप्लाई रोकने के लिए इंडो-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अब एसटीएफ की दखल कैसे बढ़ाई जाए यह भी मुस्तफा के लिए किसी चुनौती से कम नहीं हैं। सिद्धू को सरकार ने सरहदी जिलों का प्रभार भी सौंपा था इसके बाद सरहदी जिलों की पुलिस भी सिद्धू के अधीन रही थी। नतीजतन एसटीएफ की ओर से नशा तस्करों को पकड़ने के लिए बिछाए जाल में 21650 से ज्यादा तस्कर फंसे थे।

Posted By: Jagran