चंडीगढ़, [सुमेश ठाकुर]। Happy Mother's Day 2021: मां ईश्वर द्वारा बनाई गई ऐसी कृति है जो निस्वार्थ भाव से अपने बच्चों पर प्यार लुटाती है। एक मां के लिए बच्चे ही उसकी दुनिया होते हैं। चंडीगढ़ की एक ऐसी ही मां है जिन्होंने इस कोरोना संकट की घड़ी में मिसाल पेश की है। शहर की 55 वर्षीय रविंदर कौर जो एक मां, सास भी हैं, दादी भी और स्कूल हेडमास्टर भी हैं। वह एक साथ कई जिम्मेदारियां निभा रही हैं। रविंदर कौर की बेटी डॉ. सीरत और बहू पुनीत दोनों ही डॉक्टर हैं। इस कोरोना संकट के दौर में दोनों अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं। बेटी डॉ. सीरत जीएमसीएच सेक्टर-32 और बहू डॉ. पुनीत जीएमएसएच-16 के कोविड आइसीयू वार्ड कोरोना मरीजों के इलाज में जुटी हुई हैं। रविंदर कौर गवर्नमेंट मॉडल हाई स्कूल आरसी-2 धनास में बतौर हेडमास्टर हैं।

जब से डॉ. सीरत और डाॅ. पुनीत ने कोविड आइसीयू में सेवाएं दे रही हैं तब से रविंदर कौर घर की जिम्मेदारियां को संभाल रही हैं। दोनों ही डॉक्टर्स को अस्पताल भेजने से पहले और बाद का सारा काम रविंदर कौर खुद कर रही हैं। इसके अलावा जैसे ही दोनों डॉक्टर जब वापस घर आती हैं तो उन्हें घर का काम करने के बजाय फ्री टेलीकाउंसलिंग का काम दिया गया है और यह काम बेटी और बहू रविंदर कौर के कहने पर कर रही हैं। ताकि किसी मरीज को सहायता हो सके। रविंदर कौर पर दो साल के पोते की भी जिम्मेदारी है।  

स्कूल के बच्चों को बनाकर दिया खाना

रविंदर कौर की ममता घर तक ही सीमित नहीं हैं, उन्होंने इससे पहले स्कूल आ रहे स्टूडेंट्स को तीन महीने तक पौष्टिक खाना पकाकर मुहैया कराया है। यह खाना उन स्टूडेंट्स को दिया गया जो कि दोपहर का खाना लेकर कभी स्कूल नहीं आते थे। स्टूडेंट्स को आलू, चने, पूरी, चावल से लेकर प्लाव तक हर बेहतरीन व्यंजन पकाकर रविंदर कौर ने दिसंबर 2020 से मार्च 2021 तक स्टूडेंट्स को दिया है। रविंदर कौर के अनुसार अगर स्टूडेंट्स के मां-बाप इन्हें खाना पैक करके देने में असमर्थ हैं तो क्या, मैं भी एक मां हूं इन बच्चों को मैं एक मां की फीलिंग तो दे ही सकती हूं।

मां कहती है कर्म सबसे बड़ा दान- डॉ. पुनीत

रविंदर कौर की बहू डॉ. पुनीत ने बताया कि मां हमेशा कहती है कि पैसों से कभी भी दान किया जा सकता है, लेकिन कर्म से दान करने का मौका कभी-कभी ही मिलता है। कोरोना महामारी ज्यादा देर नहीं टिकने वाली, बशर्ते डॉक्टर्स पूरे समर्पण के साथ सेवा करो। इसलिए वह घर जाने के बाद भी हमें कई कोरोना संक्रमित मरीजों के टेलीफोन नंबर देती हैं और उनकी काउसलिंग करने के लिए मोटिवेट करती हैं। इस सब के बीच मैं रसोई में जाकर कभी हाथ नहीं बंटा पाती और न ही खुद के बेटे पर भी ज्यादा फोकस कर पाती हूं। मेरी सास की वजह से मैं लगातार ड्यूटी कर रही हूं।

मां ने कहा नर सेवा नारायण सेवा- डॉ. सीरत

बेटी डॉ. सीरत ने बताया कि मां कहती है कि नर सेवा नारायण सेवा होती है। यदि किसी इंसान की सेवा कर ली तो समझो वह भगवान की सेवा है। किसी मंदिर या गुरुद्वारे जाकर उतनी शांति नहीं मिलेगी जितनी किसी की जिदंगी बचाकर मिलती है। इसलिए वह हमारे खाने-पीने से लेकर हर चीज़ का वैसे ही ध्यान रखती है जैसे कोई मां अपने पांच से सात साल के बच्चे का रखती है।

Edited By: Ankesh Thakur