जेएनएन, चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा का मानसून सत्र शुरू हो गया है। सत्र के पहले दिन दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि दी गई। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह समेत सत्ता और विपक्ष ने अटल बिहारी वाजपेयी, बलरामजी दास टंडन, वरिष्ठ लेखक कुलदीप नय्यर, लोक सभा के स्पीकर रहे सोम नाथ चटर्जी, पूर्व वित्तमंत्री सुरेंदर, पूर्व विधायक जोगिंदर नाथ, कुलदीप सिंह वडाला सिंगला समेत 16 शख्सियतों को श्रद्धांजलि दी। सत्र के पहले दिन पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, मनप्रीत सिंह बादल ने दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि देते समय हाउस में नहीं थे।

जिन स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी गई उनमें ओम प्रकाश शर्मा, हजारा सिंह, मेहल सिंह, दर्शन सिंह, मिलखा सिंह, चमन लाल, बख्शीश सिंह, रतन सिंह, गुरबख्श सिंह, बछित्तर सिंह शामिल हैं। बाद में अमेरिका में मारे गए त्रिलोक सिंह, सुनाम के स्वतंत्रता सेनानी जंगीर सिंह समेत आइएसआइ व पाकिस्तान सेना के हाथों मारे गए सेना के जवानों को भी श्रद्धांजलि दी गई।

नहीं सुलझा आप में सीट विवाद

विधानसभा में पूर्व नेता प्रतिपक्ष अपने आठ विधायकों के साथ सबसे पीछे बैठे दिखे। सत्र के पहले ही दिन आम आदमी पार्टी पूरी तरह दोफाड़ दिखा। सिटिंग प्लान को लेकर पहले स्पीकर के साथ बैठक हुई थी। खैहरा के साथ जगतार सिंह जग्गा, मास्टर बलदेव सिंह, पिरमल सिंह, जय किशन रुडी, जगदेव सिंह कमलू, नाजर सिंह मानशाहिया बैठे।

बेअदबी कांड की जांच रिपोर्ट पर गरमाएगा सदन

मंगलवार तक चलने वाले इस संक्षिप्त सत्र में सरकार करीब 12 महत्वपूर्ण बिलों को पेश करेगी। बेअदबी कांड और बहिबलकलां गोलीकांड की जांच के लिए बने आयोग की रिपोर्ट पर सदन में जमकर हंगामे के आसार हैैं। सरकार ने 2015 में हुई श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी और बहिबलकलां गोलीकांड की जांच के लिए सेवानिवृत जस्टिस रणजीत सिंह के नेतृत्व मेें आयोग का गठन किया था। इसकी रिपोर्ट इसी सत्र में विधानसभा में पेश होगी। इस रिपोर्ट के खिलाफ अकाली दल और भाजपा ने आवाज उठानी शुरू कर दी है।

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इस विधानसभा सत्र में कैप्‍टन अमरिंदर सिंह सरकार के सामने आम अादमी पार्टी नहीं बल्कि अकाली दल से निपटना चुनौती होगी। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पहले ही जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट पेश करने की बात कह चुके हैैं। चूंकि इस रिपोर्ट में सीधे-सीधे पूर्व अकाली-भाजपा सरकार की तरफ उंगली उठ रही है, इसलिए सरकार का मुख्य फोकस ही इसी रिपोर्ट को लेकर रहने वाला है।

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इस सत्र में प्रमुख विपक्षी दल आम आदमी पार्टी बंटी हुई नजर आएगी। पार्टी में वर्चस्व 'सरदारी' की लड़ाई का असर सत्र के दौरान आप विधायक दल पर पड़ना तय है। पूर्व नेता प्रतिपक्ष सुखपाल सिंह खैहरा अपनी अलग राह पर दिख रहे हैं तो  नवनियुक्त नेता प्रतिपक्ष हरपाल सिंह चीमा को सभी विधायकों का सपोर्ट नहीं है।

ये बिल हो सकते हैैं पेश

पुलिस एक्ट में संशोधन, विधायकों को लाभ के पद से मुक्त करने संबंधी संशोधन बिल, कर्ज निपटारा बिल 2018 समेत करीब दस बिल सरकार सदन में पेश कर सकती है।

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Posted By: Sunil Kumar Jha

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