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मोहाली में बिल्डर को मनमानी पड़ी भारी, कब्जा देने में सात साल की देरी पर अब ब्याज भी भुगतना पड़ेगा

Published: Sat, 17 Oct 2026 07:51 PM (IST)

मोहाली में रेरा ने एक बिल्डर को औद्योगिक यूनिट का कब्जा सात साल देरी से देने पर खरीदार को 10.80 ...और पढ़ें

रेरा का आदेश। (सांकेतिक फोटो)

रेरा का आदेश। (सांकेतिक फोटो)

HighLights

  1. रेरा ने बिल्डर को 10.80 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का आदेश।

  2. औद्योगिक यूनिट का कब्जा सात साल की देरी से मिला।

  3. बिल्डर को 90 दिन में भुगतान कर रिपोर्ट जमा करनी होगी।

जागरण संवाददाता, मोहाली। मोहाली के सेक्टर-82 में औद्योगिक यूनिट का कब्जा तय समय पर नहीं देने पर पंजाब रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) ने बिल्डर को खरीदार को 10.80 प्रतिशत सालाना ब्याज देने का आदेश दिया है।

ब्याज की गणना देरी की अवधि और खरीदार की ओर से जमा राशि के आधार पर होगी। बिल्डर को 90 दिन के भीतर भुगतान कर अनुपालन रिपोर्ट जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं।

शिकायतकर्ता ने वर्ष 2012 में बेसमेंट सहित 250 वर्ग गज की बिल्ट-अप इंडस्ट्रियल यूनिट खरीदी थी। आठ दिसंबर 2015 के अलाटमेंट लेटर के मुताबिक, बिल्डर को एक साल के भीतर कब्जा देना था।

कब्जे की तय तारीख आठ दिसंबर 2016 थी, लेकिन वास्तविक कब्जा 12 सितंबर 2023 को मिला। इसके बाद खरीदार ने देरी के ब्याज के लिए रेरा में शिकायत की।

सुनवाई के दौरान बिल्डर ने देरी के लिए अपने नियंत्रण से बाहर की परिस्थितियों को जिम्मेदार बताया। कंपनी ने कहा कि अलाटमेंट की शर्तों के तहत खरीदार को तीन रुपये प्रति वर्ग फुट प्रतिमाह की दर से मुआवजा दिया गया और बकाया राशि के भुगतान के लिए कई पत्र व ईमेल भेजे गए।

बिल्डर ने छह मई 2021 को कब्जा लेने का पत्र भेजने की बात कही। रेरा ने पाया कि उस समय सक्षम प्राधिकरण से आक्यूपेशन सर्टिफिकेट जारी नहीं हुआ था। यह प्रमाणपत्र 11 अगस्त 2021 को मिला। इसके बाद 13 जून 2023 को कब्जा लेने का पत्र भेजा गया, जबकि वास्तविक कब्जा 12 सितंबर 2023 को सौंपा गया।

रेरा ने कहा कि आक्यूपेशन सर्टिफिकेट के बिना कब्जे की पेशकश के आधार पर खरीदार पर होल्डिंग चार्ज नहीं लगाया जा सकता। तय तारीख के बाद की बकाया राशि पर भी ब्याज अपने आप नहीं लगाया जा सकता। बिल्डर को संबंधित राशि और उसका आधार रिकार्ड पर साबित करना होगा।

प्राधिकरण ने आठ दिसंबर 2016 से पहले जमा 30,18,390 रुपये पर 10.80 प्रतिशत सालाना ब्याज देने का निर्देश दिया। तय तारीख के बाद जमा अन्य राशियों पर भुगतान की तारीख से वास्तविक कब्जा मिलने तक इसी दर से ब्याज देना होगा। पहले दिया गया मुआवजा कुल ब्याज में समायोजित होगा।

आदेश का समय पर पालन नहीं करने पर रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट, 2016 की धारा 63 के तहत जुर्माना लगाया जा सकता है। ब्याज मिलने के बाद शिकायतकर्ता को भी रेरा में रिपोर्ट जमा करनी होगी।