गुरुद्वारा साहिब के नाम पर चंदा वसूली पर मोहाली कोर्ट सख्त, फर्जी रसीदों से 'खेल' करने वाले को जमानत नहीं
मोहाली कोर्ट ने गुरुद्वारा साहिब के नाम पर फर्जी रसीदों से चंदा वसूली के आरोपित की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने इसे गंभीर प्रकृति का अपराध माना।

कोर्ट ने कहा-मौजूदा परिस्थितियों में आरोपित को जमानत देने का पर्याप्त आधार नहीं बनता।
HighLights
मोहाली कोर्ट ने हरजीत सिंह की जमानत याचिका खारिज की।
कोर्ट ने धार्मिक संस्था के नाम के दुरुपयोग को माना गंभीर।
मोबाइल से बरामद रसीदों की एफएसएल रिपोर्ट का इंतजार।
जागरण संवाददाता, मोहाली। गुरुद्वारा साहिब सिंह शहीदां सोहाना के नाम पर कथित फर्जी रसीदें तैयार कर लोगों से रुपये वसूलने के मामले में हरजीत सिंह उर्फ हरी टिवाना को अदालत से राहत नहीं मिली। मोहाली की अतिरिक्त सत्र अदालत ने आरोपित की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी।
अदालत ने कहा कि धार्मिक संस्था के नाम का कथित इस्तेमाल कर लोगों की भावनाओं और मजबूरी का फायदा उठाकर धन एकत्र करने के आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माना कि मामले की मौजूदा परिस्थितियों में आरोपित को जमानत देने का पर्याप्त आधार नहीं बनता।
धार्मिक संस्था के नाम पर लोगों से कथित तौर पर धन वसूलने, उनकी मजबूरी का फायदा उठाने और जांच के कुछ महत्वपूर्ण पहलू लंबित होने को अदालत ने गंभीरता से लिया। इसके साथ ही दूसरी एफआईआर को भी ध्यान में रखते हुए हरजीत सिंह उर्फ हरी टिवाना की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी।
पुलिस की जांच के मुताबिक आरोपित ने गुरुद्वारा साहिब सिंह शहीदां के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को उनकी समस्याओं के समाधान के लिए अरदास करवाने का भरोसा दिया। इसके बदले कथित तौर पर उनसे रुपये लिए गए और रसीदें दी गईं।
पुलिस का दावा है कि इस तरीके से करीब 20 से 25 हजार रुपये की रकम वसूली गई। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपित का गुरुद्वारा साहिब से कोई आधिकारिक संबंध नहीं था।
मोबाइल में मिली रसीदें, एफएसएल रिपोर्ट बाकी
जमानत पर सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि आरोपित का मोबाइल फोन जांच के लिए फोरेंसिक साइंस लैब भेजा गया है। पुलिस के अनुसार फोन में अलग-अलग कथित फर्जी रसीदें मिली हैं। इनसे संबंधित एफएसएल रिपोर्ट अभी पुलिस को प्राप्त नहीं हुई है। अदालत ने जांच के इस महत्वपूर्ण पहलू को भी जमानत पर फैसला करते समय ध्यान में रखा।
दूसरी एफआईआर भी बनी जमानत में बाधा
सरकारी वकील ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए आरोपित के खिलाफ दर्ज एक अन्य मामले का भी हवाला दिया। पुलिस रिकार्ड के अनुसार थाना सोहाना में पांच मई 2026 को एफआईआर नंबर 126 दर्ज की गई थी।
इसमें बीएनएस की धारा 299 और जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सतकार (संशोधन) अधिनियम की धारा पांच के तहत कार्रवाई की गई है। यह मामला पवित्र ग्रंथ की बेअदबी से संबंधित बताया गया। अदालत ने इस मामले को भी जमानत पर विचार करते समय ध्यान में रखा।
22 मई से न्यायिक हिरासत में
पुलिस के अनुसार आरोपित 22 मई 2026 से न्यायिक हिरासत में है। मौजूदा मामले में पुलिस की ओर से चालान अदालत में पेश किया जा चुका है, लेकिन जांच के कुछ पहलू अभी लंबित हैं। इनमें मोबाइल फोन की एफएसएल रिपोर्ट भी शामिल है।
बचाव पक्ष की ओर से अदालत में दलील दी गई कि आरोपित को मामले में झूठा फंसाया गया है और उसके खिलाफ फर्जी रसीदें जारी करने का कोई ठोस सबूत नहीं है। यह भी कहा गया कि मुकदमे की सुनवाई पूरी होने में समय लग सकता है, इसलिए आरोपित को नियमित जमानत दी जानी चाहिए।
