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38 साल पुराने जमीन अधिग्रहण मामले में बड़ा फैसला, तत्कालीन BDPO समेत 11 आरोपित मोहाली कोर्ट से बरी

Published: Thu, 01 Oct 2026 07:44 PM (IST)

मोहाली कोर्ट ने 38 साल पुराने रंजीत सागर डैम भूमि अधिग्रहण मामले में 11 आरोपितों को बरी कर दिया है। ...और पढ़ें

मोहाली जिला अदालत ने 38 साल पुराने मामले में 11 आरोपितों को किया बरी। (एआई जनरेटेड फोटो)

मोहाली जिला अदालत ने 38 साल पुराने मामले में 11 आरोपितों को किया बरी। (एआई जनरेटेड फोटो)

HighLights

  1. रंजीत सागर डैम के लिए जमीन अधिग्रहण का मामला।

  2. सरकार को 4.11 करोड़ रुपये के नुकसान का आरोप था।

  3. अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल।

जागरण संवाददाता, मोहाली। रंजीत सागर डैम (थीन डैम) परियोजना से जुड़े 38 साल पुराने जमीन अधिग्रहण मामले में जिला अदालत ने 11 आरोपितों को बरी कर दिया है। आरोप था कि शामलात जमीन का रकबा बढ़ाकर दिखाकर सरकार को 4.11 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया गया।

अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को उचित संदेह से परे साबित नहीं कर सका। बरी होने वालों में छत्तर सिंह, दीवान चंद, गुलशन सिंह, पूर्ण सिंह, ध्यान सिंह, स्वर्ण सिंह, चमन लाल, देवराज, किशन चंद, इंद्रजीत सिंह और तत्कालीन बीडीपीओ शिव रतन कुमार शामिल हैं।

विजिलेंस ने इस मामले में 19 लोगों को नामजद किया था, जिनमें से आठ की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो गई। विजिलेंस ब्यूरो ने 2005 में एफआइआर दर्ज की थी।

आरोप के अनुसार, 1988 में शाहपुर कंडी के गांव फगोटा में डैम परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण के दौरान शामलाट जमीन का रकबा बढ़ा-चढ़ाकर दर्ज किया गया, जिससे सरकार को 4.11 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

अभियोजन ने विजिलेंस अधिकारियों, नायब तहसीलदार, कानूनगो, पटवारी और परियोजना अधिकारियों समेत 32 गवाह पेश किए। अंतिम गवाह माल पटवारी फतेह सिंह की गवाही के बाद 27 फरवरी 2025 को साक्ष्य की कार्रवाई पूरी हुई।

सुनवाई के दौरान राजस्व रिकार्ड में दर्ज रकबे को लेकर महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए। अदालत ने कहा कि संदेह या अनुमान के आधार पर दोष साबित नहीं किया जा सकता, इसलिए आरोपितों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।