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'प्लॉट का कब्जा दो या जमा पूंजी 9 प्रतिशत ब्याज सहित लौटाओ', मोहाली में बिल्डर को उपभोक्ता फोरम का आदेश

Published: Fri, 28 Aug 2026 07:14 PM (IST)

मोहाली के प्रीत सिटी में 14 साल से प्लॉट के कब्जे का इंतजार कर रही महिला को उपभोक्ता फोरम से ...और पढ़ें

पभोक्ता फोरम ने दो महीने के भीतर 10 मरले के प्लाॅट का कब्जा देने का आदेश दिया।

पभोक्ता फोरम ने दो महीने के भीतर 10 मरले के प्लाॅट का कब्जा देने का आदेश दिया।

HighLights

  1. मोहाली में महिला को 14 साल बाद मिली राहत।

  2. बिल्डर को दो महीने में प्लॉट कब्जा देने का आदेश।

  3. कब्जा न देने पर 9% ब्याज सहित राशि लौटानी होगी।

जागरण संवाददाता, मोहाली। सेक्टर-86 स्थित प्रीत सिटी में प्लाॅट खरीदने के बाद करीब 14 साल से कब्जे का इंतजार कर रही महिला उपभोक्ता को राहत मिली है। उपभोक्ता फोरम ने मामले की सुनवाई करते हुए बिल्डर प्रीत लैंड प्रमोटर्स एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड को दो महीने के भीतर 10 मरले के प्लाॅट का कब्जा देने का आदेश दिया है।

फोरम ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि बिल्डर कब्जा देने में असमर्थ रहता है तो उसे उपभोक्ता द्वारा जमा कराई गई पूरी राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित वापस करनी होगी। आदेश का पालन करने में देरी होने पर ब्याज की दर 12 प्रतिशत वार्षिक होगी।

शिकायतकर्ता अमृतसर निवासी गुरिंदर कौर को 19 जुलाई 2010 को सेक्टर-86, एसएएस नगर स्थित प्रीत सिटी में 10 मरले का प्लाॅट नंबर 388 आवंटित किया गया था। प्लाॅट की कीमत 5.75 लाख रुपये थी, जबकि बाहरी विकास शुल्क, लाइसेंस शुल्क और विकास निधि मिलाकर कुल राशि 13.25 लाख रुपये निर्धारित की गई थी।

बाद में 6 फरवरी 2012 को बिल्डर ने शिकायतकर्ता को 10 मरले का प्लाॅट आवंटित कर दिया। शिकायतकर्ता ने बिल्डर को पूरी 13.25 लाख रुपये की राशि का भुगतान कर दिया। अंतिम भुगतान 28 जुलाई 2014 को किया गया था। इसके बावजूद उसे न तो विकसित प्लाट का वास्तविक कब्जा मिला और न ही राशि वापस की गई।

बिल्डर ने बताया कि संबंधित प्लाट गमाडा के पास लंबित बाहरी विकास शुल्क की राशि की सुरक्षा के तौर पर बंधक रखा गया था और वित्तीय व्यवस्था न होने के कारण उसे बंधक-मुक्त नहीं कराया जा सका।

फोरम ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। फोरम ने कहा कि उपभोक्ता को प्लाट उपलब्ध कराना बिल्डर की जिम्मेदारी है और वह अनिश्चित समय तक कब्जे के लिए उपभोक्ता को इंतजार नहीं करवा सकता।

फोरम ने माना बिल्डर की ओर से सेवा में कमी हुई

फोरम ने माना कि बिल्डर की ओर से सेवा में कमी हुई है। हालांकि, गमाडा के खिलाफ शिकायत खारिज कर दी गई। फोरम ने बिल्डर को आदेश दिया कि दो महीने के भीतर प्लाॅट का पूरा विकसित कब्जा आवश्यक मंजूरियों, स्वीकृतियों और पूर्णता और आवश्यक प्रमाणपत्रों के साथ सौंपे।

इसके साथ ही बिल्डर को 13.25 लाख रुपये की जमा राशि पर अलग-अलग तारीखों में किए गए भुगतानों के आधार पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज कब्जा सौंपने की तारीख तक देना होगा। कब्जा न देने की स्थिति में पूरी जमा राशि 9 प्रतिशत ब्याज सहित लौटानी होगी। इसके अलावा मानसिक परेशानी, उत्पीड़न और मुकदमेबाजी खर्च के लिए 1.50 लाख रुपये का संयुक्त मुआवजा देने का आदेश दिया है।