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18 महीने में देना था कब्जा, चार साल बाद भी फ्लैट अधूरा; मोहाली में बिल्डर को कीमत चुकाने का आदेश

Published: Thu, 10 Sep 2026 04:49 PM (IST)

मोहाली उपभोक्ता फोरम ने ग्लोबल सिटी के बिल्डर को फ्लैट समय पर न देने और अधूरा निर्माण के लिए शिकायतकर्ताओं ...और पढ़ें

ट का तय समय में कब्जा न देने और निर्माण अधूरा छोड़ने के मामले में फैसला।

ट का तय समय में कब्जा न देने और निर्माण अधूरा छोड़ने के मामले में फैसला।

HighLights

  1. बिल्डर को 18 महीने में कब्जा देना था, 4 साल बाद भी अधूरा।

  2. उपभोक्ता फोरम ने 22.57 लाख रुपये ब्याज सहित लौटाने का आदेश।

  3. मानसिक परेशानी और मुकदमेबाजी के लिए 2.50 लाख रुपये अतिरिक्त।

जागरण संवाददाता, मोहाली। उपभोक्ता फोरम ने फ्लैट का तय समय में कब्जा न देने और निर्माण अधूरा छोड़ने के मामले में सेक्टर 125 स्थित ग्लोबल सिटी के बिल्डर को शिकायतकर्ताओं की जमा राशि ब्याज समेत लौटाने के आदेश दिए हैं।

फोरम ने बिल्डर को मानसिक परेशानी और मुकदमेबाजी खर्च अलग से देने को भी कहा है। अमृतसर कैंट निवासी बलबीर सिंह अहलूवालिया और सुखवंत अहलूवालिया ने फोरमफोरम में शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायत के अनुसार उन्होंने ग्लोबल सिटी प्रोजेक्ट में 1250 वर्ग फुट का फ्लैट बुक किया था। इसकी कुल कीमत 30.90 लाख रुपये तय हुई थी। 30 अगस्त 2016 को 3 लाख रुपये जमा कराने के बाद अलाटमेंट लेटर और बिल्डर-बायर एग्रीमेंट किया गया।

समझौते के तहत बिल्डर को 18 महीने में फ्लैट का कब्जा देना था। शिकायतकर्ताओं ने समय-समय पर भुगतान करते हुए बिल्डर को कुल 22,57,162 रुपये दिए। उनका आरोप था कि जनवरी 2018 तक कब्जा नहीं दिया गया।

जून 2020 में उन्हें कब्जा पत्र दिया गया, लेकिन मौके पर फ्लैट का निर्माण अधूरा मिला और वह रहने योग्य स्थिति में नहीं था। साथ ही जरूरी कंप्लीशन/आक्यूपेशन सर्टिफिकेट भी उपलब्ध नहीं कराया गया।

बिल्डर ने यह बताई वजह

बिल्डर ने देरी के लिए लंबित सरकारी मंजूरियों और कोविड-19 महामारी को जिम्मेदार बताया। साथ ही शिकायतकर्ताओं पर भुगतान में देरी का आरोप लगाया। हालांकि, फोरम ने पाया कि बिल्डर अपने पक्ष में कोई शपथपत्र या दस्तावेज रिकार्ड पर पेश नहीं कर सका।

फोरम ने यह सुनाया फैसला

फोरम ने माना कि बिल्डर तय समय में फ्लैट देने में विफल रहा और देरी का संतोषजनक कारण नहीं बता पाया। फोरम ने बिल्डर को 22,57,162 रुपये की राशि संबंधित भुगतान की तारीखों से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने के आदेश दिए।

यह भुगतान आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के एक महीने के भीतर करना होगा। देरी होने पर पूरी राशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा। इसके अलावा 2.50 लाख रुपये मानसिक परेशानी, उत्पीड़न और मुकदमेबाजी खर्च के रूप में देने के निर्देश दिए गए।