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मोहाली में बिल्डर को फ्लैट बुकिंग राशि ब्याज सहित लौटाने का आदेश, उपभोक्ता फोरम का फैसला

Published: Mon, 21 Sep 2026 02:14 PM (IST)

मोहाली जिला उपभोक्ता फोरम ने बिल्डर को फ्लैट बुकिंग अमाउंट 16.36 लाख 9 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाने का फैसला ...और पढ़ें

मोहाली जिला उपभोक्ता फोरम ने सुनाया फैसला।

मोहाली जिला उपभोक्ता फोरम ने सुनाया फैसला।

HighLights

  1. बुकिंग अमाउंट 9 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटानी होगी।

  2. एग्रीमेंट न करने और दस्तावेज न देने पर लगा जुर्माना।

  3. मोहाली जिला उपभोक्ता फोरम ने सुनाया फैसला।

जागरण संवाददाता, मोहाली। फ्लैट बुक कराने के बाद एग्रीमेंट न करना और बैंक लोन के लिए जरूरी दस्तावेज उपलब्ध न कराने की बिल्डर को अब कीमत चुकानी होगी। उसे बुकिंग अमाउंट 16.36 लाख रुपये 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटानी पड़ेगी। साथ ही, उपभोक्ता को मानसिक परेशानी, उत्पीड़न और मुकदमेबाजी खर्च के तौर पर 2.25 लाख रुपये अलग से देने होंगे।

यह फैसला मोहाली जिला उपभोक्ता फोरम ने सुनाया है। मामला सेक्टर-113 स्थित रियलकोन पार्क हाइट्स में फ्लैट बुक करने का है। इस संबंध में चंडीगढ़ निवासी बलविंदर कौर ने 28 मई 2023 ने शिकायत दर्ज कराई थी। 

बलविंदर ने रियलकोन पार्क हाइट्स में यूनिट नंबर 36-बी, दूसरी मंजिल बुक किया था। फ्लैट की कुल कीमत 72 लाख रुपये तय हुई थी। शिकायतकर्ता ने अलग-अलग किस्तों में कुल 16,36,000 रुपये जमा कराए। आरोप था कि बुकिंग के समय प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करने और सुविधाएं उपलब्ध कराने का भरोसा दिया गया था।

शिकायतकर्ता के अनुसार रकम लेने के बावजूद बिल्डर ने अनिवार्य बिल्डर-बायर एग्रीमेंट नहीं किया। इसके अलावा भारतीय स्टेट बैंक से आवास ऋण लेने के लिए जरूरी प्रोजेक्ट दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं करवाए गए। शिकायतकर्ता ने कई बार बिल्डर से दस्तावेज और प्रोजेक्ट की प्रगति की जानकारी मांगी, लेकिन उसे संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

बिल्डर के पास नहीं थे जमीन पर पूर्ण विकास के अधिकार

मामले में यह भी सामने आया कि प्रोजेक्ट की विकास संबंधी अनुमति को लेकर समस्या पैदा हुई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि बिल्डर के पास प्रोजेक्ट की जमीन पर पूर्ण विकास अधिकार नहीं थे और सरकारी बकाया की अदायगी न होने के कारण गमाडा की ओर से विकास लाइसेंस रद कर दिया गया था। वहीं प्रोजेक्ट स्थल पर निर्माण कार्य भी अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ रहा था।

फोरम से कई दस्तावेज देखने के बाद सुनाया फैसला

फोरम ने रिकार्ड पर पेश विज्ञापन सामग्री, रेरा वेबसाइट पर उपलब्ध प्रोजेक्ट विवरण, भुगतान रसीदें, बुकिंग की पुष्टि, आवंटन पत्र, बिल्डर के साथ पत्राचार और गमाडा की ओर से प्रकाशित नोटिस समेत अन्य दस्तावेजों को देखा। फोरम ने माना कि बिल्डर ने 16.36 लाख रुपये लेने के बावजूद एग्रीमेंट नहीं किया और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं करवाए।

प्रोजेक्ट की स्थिति को देखते हुए शिकायतकर्ता को अनिश्चित समय तक फ्लैट का इंतजार करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। वहीं मामले में कुछ विपक्षी पक्ष फोरम के समक्ष पेश नहीं हुए और कुछ ने निर्धारित 45 दिन की अवधि में लिखित जवाब दाखिल नहीं किया।

सोमवार को सुनाए फैसले में फोरम ने आदेश दिया कि बिल्डर कंपनी और उसके संबंधित निदेशक 30 दिन के भीतर 16.36 लाख रुपये की मूल जमा राशि पर संबंधित जमा तिथियों से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित भुगतान करें। निर्धारित अवधि में भुगतान न होने पर पूरी राशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज लागू होगा।