चंडीगढ़, [विकास शर्मा]। देश के बाकी हिस्सों की तरह शहर से भी प्रवासी मजदूरों का पलायन शुरू हो गया है। आलम यह है कि उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश से शहर में काम करने वाले दिहाड़ीदार मजदूर अब अपने गांवों की तरफ पैदल निकल पड़े हैं। इसी कड़ी में दैनिक जागरण ने मध्य प्रदेश टीकमगढ़ जिले के रहने वाले एक परिवार से बात की, जोकि शहर में मेहनत मजदूरी का काम करता है। परिवार में कुल 15 सदस्य हैं, जिसमें चार बच्चे हैं, इनकी उम्र महज दो से तीन साल है। यह बच्चे भी परिवार के साथ नंगे पांव 600 किलोमीटर का सफर तय करने के लिए तपतपाती धूप में निकल पड़े हैं।

हफ्तेभर से बेरोजगार, गांव में रहने वाले बुजुर्ग भी परेशान

मिस्त्री का काम करने वाले हीरा आहिरवाल का कहना है कि दिक्कत यह है कि एक तो हमारे पास काम नहीं है, दूसरा गांव में बैठे बड़े बुजुर्ग टीवी चैनलों पर लोगों को घर वापस जाते देखकर इतने परेशान हो गए हैं कि उनका रो-रोकर बुरा हाल है। सबको लग रहा है कि अब हालात जून-जुलाई तक सामान्य नहीं होंगे। ऐसे में घर वापसी के सिवा हमारे पास कोई चारा नहीं है। 

 

25 अप्रैल को बहन की शादी न पहुंचा तो कैसे होगा कामकाज

प्रवासी मजदूर नीलू बताते है कि 25 अप्रैल को उनकी बहन की शादी है, सारी शादी का जिम्मा उन्हीं के सिर पर है। अगर आगे हालात बिगड़ते हैं तो वह घर वापस नहीं जा पाएंगे। इसीलिए अभी से पैदल जा रहे हैं। दिक्कत यह है कि हमारे साथ छोटे बच्चे भी हैं और सफर भी काफी लंबा हैं।

अब गांव में रहकर ही करेेंगे मेहनत मजदूरी

इसी परिवार की सदस्या सोनू ने बताया कि बिना पैसे के इस शहर में एक दिन भी गुजारना मुश्किल है। हम दिहाड़ीदार मजदूर हैं, हमें काम नहीं मिलता तो घर में चूल्हा नहीं जलता है। अब हम चंडीगढ़ वापस नहीं लौटेंगे। यहां दिहाड़ी तो अच्छी मिलती है लेकिन इस शहर में रहना इतना महंगा है कि हम कुछ भी नहीं बचा पाते हैं।

 


 

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Posted By: Vikas_Kumar

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