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'पांच साल निर्धारित किया जाए कार्यकाल...', देशभर से आए मेयर्स ने उठाई आवाज; चंडीगढ़ में अभी है एक साल

Published: Tue, 06 Oct 2026 07:08 PM (GMT+05:30)Updated: Tue, 06 Oct 2026 07:09 PM (GMT+05:30)

चंडीगढ़ में 118वें अखिल भारतीय महापौर सम्मेलन में 'चंडीगढ़ संकल्प' पारित हुआ, जिसमें महापौरों को अधिक अधिकार और पांच साल ...और पढ़ें

चंडीगढ़ पहुंचे 19 राज्यों के मेयर।

चंडीगढ़ पहुंचे 19 राज्यों के मेयर।

HighLights

  1. 118वें ऑल इंडिया मेयर्स काॅन्फ्रेंस में ‘चंडीगढ़ संकल्प’ पारित किया गया।

  2. शहरी निकायों को वित्तीय और प्रशासनिक रूप से मजबूत करने पर जोर।

  3. तकनीक आधारित प्रशासन और नागरिक भागीदारी को बढ़ावा देने का संकल्प।

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। देशभर के शहरों में महापौरों को अधिक अधिकार देने और उनका कार्यकाल पांच साल करने की मांग को लेकर चंडीगढ़ में आयोजित दो दिवसीय 118वें ऑल इंडिया मेयर्स काॅन्फ्रेंस में ‘चंडीगढ़ संकल्प’ पारित किया गया।

इसमें ‘सशक्त महापौर-सशक्त शहर-विकसित भारत’ के मंत्र के साथ शहरी निकायों को प्रशासनिक, वित्तीय और कार्यात्मक रूप से मजबूत करने पर जोर दिया गया। सम्मेलन में शामिल महापौरों ने कहा कि शहरों की बढ़ती जरूरतों और नई शहरी चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए निर्वाचित प्रतिनिधियों को पर्याप्त अधिकार और संसाधन मिलना जरूरी है।

सम्मेलन में महापौरों के लिए समान रूप से पांच साल का कार्यकाल निर्धारित करने की मांग प्रमुखता से उठी। चंडीगढ़ में अभी मेयर का कार्यकाल एक साल रहता है।

महापौरों का मानना था कि कम अवधि के कार्यकाल के कारण दीर्घकालिक योजनाओं को लागू करने में कठिनाई आती है। पांच साल का कार्यकाल मिलने से महापौर शहर के विकास की योजनाओं को लगातार आगे बढ़ा सकेंगे और उनके परिणाम भी सामने आ सकेंगे।

नगर निकायों को मिले वित्तीय स्वायत्तता

सम्मेलन में नगर निकायों की वित्तीय स्थिति मजबूत करने पर भी विशेष जोर दिया गया। महापौरों ने कहा कि शहरों के विकास और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए नगर निकायों को अपने स्तर पर संसाधन जुटाने की क्षमता विकसित करनी होगी।

इसके लिए नए राजस्व मॉडल, संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और संस्थागत क्षमता मजबूत करने की जरूरत बताई गई। आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नगर निकाय ही तेजी से बढ़ती आबादी और शहरीकरण की चुनौतियों का सामना कर सकेंगे।

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तकनीक आधारित व्यवस्था और नागरिक भागीदारी पर जोर

महापौरों ने तकनीक आधारित शहरी प्रशासन, स्वच्छ और टिकाऊ विकास तथा नागरिकों की भागीदारी को भी जरूरी बताया। स्मार्ट तकनीक के माध्यम से शिकायत निवारण, निगरानी और नागरिक सेवाओं की डिलीवरी को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया। साथ ही शहरों में स्वच्छता, हरित विकास और समावेशी सुविधाओं को प्राथमिकता देने की बात कही गई।

शहर एक-दूसरे से सीखेंगे

सम्मेलन में अंतर-शहरी सहयोग बढ़ाने का भी निर्णय लिया गया। इसके तहत शहरों के बीच नियमित ज्ञान साझा करने, वर्चुअल बैठकों, विशेषज्ञों के साथ संवाद और सफल नगर निकाय मॉडल के आदान-प्रदान पर सहमति बनी। किसी शहर में सफल रही व्यवस्था को दूसरे शहर अपनी स्थानीय जरूरतों के अनुसार लागू कर सकेंगे। इससे नगर निकायों में बेहतर कामकाज और नवाचार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

केंद्र और राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम करेंगे

महापौरों ने केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों के साथ मिलकर शहरी शासन को मजबूत करने का संकल्प लिया। सम्मेलन में कहा गया कि स्वच्छ, हरित, स्मार्ट, टिकाऊ और नागरिक केंद्रित शहर विकसित करने के लिए निर्वाचित प्रतिनिधियों, अधिकारियों और नागरिकों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।

सम्मेलन के समापन पर महापौरों ने सामूहिक रूप से माना कि मजबूत महापौर, अधिकार संपन्न नगर निकाय और सक्रिय नागरिक भागीदारी ही मजबूत शहरों की नींव हैं। इसी आधार पर विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को हासिल करने में शहरों की महत्वपूर्ण भूमिका तय होगी।