मोहाली में मैक्स अस्पताल की सर्जरी फेल; तीन बार ऑपरेशन, फिर भी राहत नहीं, पौने पांच लाख हर्जाना
मोहाली जिला उपभोक्ता आयोग ने मैक्स अस्पताल और एक सर्जन को 74 वर्षीय बुजुर्ग के इलाज में लापरवाही का दोषी ...और पढ़ें

उपभोक्ता आयोग ने अस्पताल को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार का दोषी माना।
HighLights
बिना जरूरी जांच के की गई बुजुर्ग की सर्जरी।
तीन बार भर्ती के बाद भी मरीज को नहीं मिली राहत।
उपभोक्ता आयोग ने अस्पताल पर हर्जाना लगाया।
जागरण संवाददाता, मोहाली। 74 वर्षीय बुजुर्ग के इलाज में कथित लापरवाही का मामला सामने आने पर जिला उपभोक्ता आयोग ने मैक्स अस्पताल और सर्जन को जिम्मेदार ठहराया है। आयोग ने पाया कि जरूरी जांच किए बिना ऑपरेशन किया गया, जिसके बाद मरीज की हालत सुधरने के बजाय बिगड़ती चली गई।
तीन बार भर्ती और दोबारा सर्जरी के बावजूद राहत नहीं मिली। इस पूरे घटनाक्रम को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार मानते हुए आयोग ने अस्पताल को आर्थिक भरपाई और मुआवजा देने का आदेश दिया है।
मामले के अनुसार सेक्टर-40ए चंडीगढ़ निवासी कृष्णा रानी ने शिकायत दी कि उनके पति को मार्च 2020 में कमर दर्द और नस दबने की समस्या के इलाज के लिए मोहाली स्थित मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया।
21 मार्च को सर्जरी की गई, लेकिन हालत सुधरने के बजाय खराब हो गई। डिस्चार्ज के अगले ही दिन फिर भर्ती करना पड़ा। इसके बाद तीसरी बार भी आपरेशन करना पड़ा, क्योंकि पहले डाले गए स्क्रू ढीले और गलत स्थिति में पाए गए।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि अस्पताल ने ऑपरेशन से पहले हड्डियों की मजबूती जांचने के लिए जरूरी टेस्ट नहीं किए। आयोग ने रिकार्ड देखने के बाद पाया कि एक साल पुरानी रिपोर्ट के आधार पर सर्जरी कर दी गई, जबकि ताजा जांच जरूरी थी।
ऑपरेशन के कुछ ही दिनों में स्क्रू खिसकना और हड्डियों में नुकसान इस बात का संकेत है कि पहले से सही आकलन नहीं किया गया।
आयोग ने यह भी माना कि पहली सर्जरी असफल रहने के कारण ही दूसरी सर्जरी करनी पड़ी और इसके लिए दोबारा फीस लेना अनुचित व्यापार है।
इसी आधार पर अस्पताल को 3.25 लाख रुपये 9 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाने, 1 लाख रुपये मुआवजा और 50 हजार रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में देने के आदेश दिए गए।
जरूरी जांच न करना बना बड़ा कारण
आयोग ने साफ कहा कि सर्जरी से पहले हड्डियों की स्थिति जानने के लिए एक्स-रे, डेक्सा स्कैन जैसे टेस्ट जरूरी थे। लेकिन अस्पताल ने पुरानी रिपोर्ट के आधार पर ही ऑपरेशन कर दिया। मरीज की उम्र, मधुमेह और पहले की सर्जरी को देखते हुए अतिरिक्त सावधानी जरूरी थी। इन तथ्यों की अनदेखी को सीधे तौर पर लापरवाही माना गया, जिससे मरीज की हालत बिगड़ी और बार-बार भर्ती की नौबत आई।
तीन बार भर्ती, फिर भी नहीं मिला फायदा
रिकॉर्ड के मुताबिक मरीज को 19 मार्च से 6 अप्रैल 2020 के बीच तीन बार अस्पताल में भर्ती किया गया। पहली सर्जरी के बाद ही समस्या खत्म नहीं हुई और स्क्रू ढीले होने के कारण दोबारा ऑपरेशन करना पड़ा।
आयोग ने माना कि अगर पहली बार सही योजना और जांच होती, तो दोबारा सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती। इससे मरीज को शारीरिक और आर्थिक दोनों नुकसान हुआ।
अनुचित फीस वसूली पर भी सवाल
आयोग ने यह भी माना कि पहली सर्जरी की कमी को सुधारने के लिए दूसरी सर्जरी की गई, लेकिन इसके लिए अलग से पैसे लेना गलत है। इसे अनुचित व्यापार की श्रेणी में रखा गया। आयोग ने कहा कि इलाज में कमी के कारण पैदा हुई स्थिति का खर्च मरीज पर नहीं डाला जा सकता, इसलिए अस्पताल को राशि लौटाने और मुआवजा देने का आदेश दिया गया।
