दयानंद शर्मा, चंडीगढ़

गर्भवती नाबालिग के स्वास्थ्य की जांच करवाना पति को भारी पड़ गया। डाक्टर की शिकायत पर पति के खिलाफ बाल विवाह और पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। मगर पति की गिरफ्तारी के बाद गर्भवती की देखभाल करने वाला कोई नहीं था, इसलिए पति ने पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर कर पत्नी की देखभाल करने के लिए नियमित जमानत की गुहार लगाई। हाई कोर्ट के जस्टिस विनोद भारद्वाज ने मामले की स्थिति को देखते हुए पति को जमानत दे दी।

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर के गांव धुरिया में जय गोविद चौहान की 28 नवंबर 2021 को शादी हुई थी। वह मोहाली में प्राइवेट नौकरी करता है। विवाह के बाद वह पत्नी को चंडीगढ़ ले आया। पत्नी गर्भवती हुई तो वह उसे चंडीगढ़ के सामान्य अस्पताल में स्वास्थ्य जांच कराने ले गया। जांच के दौरान डाक्टर ने पाया कि लड़की की जन्म तिथि 10 मार्च 2004 है, यानी वह 18 साल दो माह की है और पांच महीने की गर्भवती है। डाक्टर ने लड़की की उम्र 21 साल से कम होने पर इसकी सूचना चंडीगढ़ पुलिस को दे दी। पुलिस ने उसके पति के खिलाफ बाल विवाह और पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। पत्नी की दलील माता-पिता ने करवाई शादी करवाई, उन्हें कानून की जानकारी नहीं

गर्भवती ने हाई कोर्ट में कहा कि उनकी शादी माता-पिता ने करवाई है। उन्हें बाल विवाह से जुड़े कानून की जानकारी नहीं है। वह अपने पति के साथ ही रहना चाहती है और उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं चाहती। वहीं युवक ने कहा कि गर्भवती पत्नी की देखभाल करने वाला यहां कोई नहीं है। इसलिए पत्नी के साथ उसका रहना जरूरी है। सुनवाई के दौरान चंडीगढ़ पुलिस की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि आरोपित 18 मई से न्यायिक हिरासत में है। इस पर कोर्ट ने कहा कि अब उसे हिरासत में रखने का क्या औचित्य है, उससे कुछ बरामद तो करना नहीं है। कोर्ट ने याची को नियमित जमानत देने का आदेश दिया।

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