जेएनएन, चंडीगढ़। कोटकपूरा गोलीकांड मामले (Kotkpura shooting case) की जांच कर रही एसआइटी के वरिष्ठ सदस्य आइजी कुंवर विजय प्रताप सिंह को अकाली दल के नेताओं की ओर से धमकियां दी गईं और अपशब्द बोले गए। इसे लेकर कुंवर विजय प्रताप सिंह ने 15 मार्च, 2021 को डीजीपी दिनकर गुप्ता और गृह विभाग के एडीशनल चीफ सेक्रेटरी अनुराग अग्रवाल को पत्र भी लिखा था। इसे लेकर आम आदमी पार्टी के प्रधान व सांसद भगवंत मान ने सवाल खड़े करते हुए कहा है कि जब एक आइजी रैंक के अधिकारी को धमकियां मिल सकती हैं तो आम लोगों और केस से जुड़े हुए गवाहों का क्या होगा। मान ने कहा कि प्रदेश की कैप्टन सरकार को बेअदबी मामले से जुड़े गवाहों को सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए।

मान ने कहा कि आइजी कुंवर विजय प्रताप सिंह ने जो पत्र लिखा है उससे शिरोमणि अकाली दल और एसजीपीसी की नीयत का खुलासा हो गया है। इसके बाद भी कैप्टन अमरिंदर सिंह की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं। वहीं, डीजीपी और गृह विभाग के एसीएस को पत्र लिखने का मामला सामने आने से यह स्पष्ट हो गया है कि कुंवर विजय प्रताप ने हाई कोर्ट की ओर से एसआइटी की रिपोर्ट को खारिज करने व उन्हें जांच से बाहर रखने के फैसले के बाद भावुक होकर इस्तीफा नहीं दिया।

उन्हें इस बात की पहले से ही आशंका थी कि इस तरह का कुछ होने वाला है, क्योंकि हाई कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद ही कुंवर ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को इस्तीफा सौंप दिया था। मुख्यमंत्री द्वारा उन्हें मनाने का प्रयास भी किया गया लेकिन वह नहीं माने। क्योंकि उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और पूर्व उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल से पूछताछ की थी। इसके बाद से ही उन्हें धमकियां मिल रही थीं।

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कैप्टन अमरिंदर सिंह पर निशाना साधते हुए मान ने कहा कि कैप्टन सरकार मामले को हाईकोर्ट में ठीक से पेश करने में नाकाम रही है। अब कम से कम मामले से जुड़े गवाहों को तो सुरक्षा प्रदान की ही जानी चाहिए। क्योंकि लाखों लोगों की भावनाएं इस केस के साथ जुड़ी हुई हैं। मान ने कहा कि कैप्टन सरकार को आइजी कुंवर विजय प्रताप के पत्र पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।

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बता दें कि हाई कोर्ट के फैसले के बाद से कैप्टन सरकार विपक्ष ही नहीं अपनों में भी घिरी हुई है। दो दिन पूर्व फैसले को लेकर मुख्यमंत्री द्वारा बुलाई गई बैठक में कांग्रेस के मंत्रियों व प्रदेश प्रधान सुनील जाखड़ ने एडवोकेट जनरल अतुल नंदा को खरी-खोटी सुना दी थी।

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मुख्यमंत्री की उपस्थिति में ही अतुल नंदा पर यह आरोप लगाए गए कि लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद केस को ठीक से नहीं पेश किया गया। वहीं अब कुंवर विजय प्रताप के पत्र की जानकारी सामने आने के बाद पंजाब सरकार की परेशानी खड़ी हो सकती है। बताया जा रहा है कि 15 मार्च को लिखे पत्र में ही उन्होंने इस बात की आशंका जता दी थी कि कोर्ट में केस को ठीक ढंग से पेश नहीं किया जा रहा है।

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