राजेश ढल्ल, चंडीगढ़ :

दिसंबर माह में होने वाला नगर निगम चुनाव कुछ अलग होगा। इस चुनाव में कई सीनियर नेता चुनाव नहीं लड़ने जा रहे हैं। वहीं वह अपनी जगह अपने उत्तराधिकारियों को मैदान में उतारने की तैयारी कर रहे हैं। इन नेताओं ने अपने दल को भी स्पष्ट कर दिया है कि इस बार उनके बेटे और बेटियों को टिकट देकर उम्मीदवार बनाया जाए। जबकि कुछ नेता खुद न लड़कर अपनी पत्नियों को उम्मीदवार बनवाना चाहते हैं। कुछ नेता वार्ड महिला के लिए रिजर्व होने पर मजबूरी में अपनी पत्नियों को उम्मीदवार बनवाना चाहते हैं। इससे पहले भी ऐसा हो चुका है। कांग्रेस, भाजपा और आप अध्यक्ष नहीं लड़ेंगे चुनाव

कुछ नेता ऐसे है जिन्होंने यह तय किया है कि अगर उनकी सीट जनरल हुई तो वह खुद चुनाव लड़ेंगे अगर सीट महिला के लिए रिजर्व हो गई तो उनकी पत्नी चुनाव लड़ेगी, ताकि पार्षद की सीट घर में ही रहे। भाजपा अध्यक्ष अरुण सूद और कांग्रेस अध्यक्ष सुभाष चावला इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगे। जबकि यह दोनो पिछले कई सालों से चुनाव लड़ते आ रहे हैं। आप अध्यक्ष प्रेम गर्ग भी चुनाव नहीं लड़ेंगे। ड्रा के बाद स्थिति होगी स्पष्ट

प्रशासन की ओर से अगले माह ड्रा निकालकर महिला और आरक्षित सीटों को तय किया जाएगा। इसके बाद स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट हो जाएगी। इस चुनाव में पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन बंसल के बेटे मनीष बंसल,पूर्व केंद्रीय मंत्री हरमोहन धवन के बेटे विक्रम धवन भी अपने पार्टी उम्मीदवार के लिए प्रचार कसेंगे। जबकि आम आदमी पार्टी चाहती है कि धवन के बेटे को भी किसी वार्ड से उम्मीदवार बनाया जाए। कांग्रेस में यह हो सकती है स्थिति

कांग्रेस में इस समय देवेंद्र सिंह बबला सेक्टर-27 और 28 से पार्षद है। ऐसे में अगर उनका वार्ड महिला के लिए रिजर्व होती है तो उनकी पत्नी हरप्रीत बबला उम्मीदवार बन सकती है। नई वार्ड बंदी में बबला के वार्ड से सेक्टर-30 अलग होकर सेक्टर-20 के साथ जुड़ गया है। ऐसे में उनका अपना वार्ड रिजर्व होने पर वह दूसरे वार्ड में भी उम्मीदवार बन सकता है। इसी तरह से कांग्रेस की महिला पार्षद रविदर कौर गुजराल का वार्ड अगर फिर से महिला के लिए रिजर्व नहीं होता तो उनके पति एएस गुजराल उम्मीदवार बन सकते हैं। पिछली बार भी उनका वार्ड रिजर्व होने पर उन्हें पत्नी को उम्मीदवार बनवाना पड़ा। कांग्रेस पार्षद गुरबख्श रावत के पति बीरेंद्र रावत कांग्रेस के उत्तराखंड सेल के चेयरमैन है। स्थितियां बदलने पर उनके पति भी चुनाव लड़ सकते हैं। कांग्रेस की अन्य पार्षद शीला फूल सिंह भी इस बार अपने बेटे के लिए टिकट मांग रही है। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता एचएस लक्की और उपाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह बढहेड़ी अपने बेटों को चुनाव लड़वाना चाहते हैं। कांग्रेस अध्यक्ष सुभाष चावला घोषणा कर चुके हैं वह खुद या उनके परिवार से काई चुनाव नहीं लड़ेगा इसके बावजूद उनके बेटे सुमित चावला को धनास सीट से दावेदार बताया जा रहा है। जबकि कांग्रेस के महासचिव हरमेल केसरी अपने और अपनी पत्नी के लिए टिकट मांग रहे हैं। आप और भाजपा में इनके यह उत्तराधिकारी हैं सक्रिय

आम आदमी पार्टी में प्रदीप छाबड़ा खुद चुनाव लड़ने से इंकार कर चुके हैं। पिछले चुनाव में उन्होंने खुद चुनाव न लड़कर अपनी पत्नी को उम्मीदवार बनवाया था। सेक्टर-22 छाबड़ा का गढ़ माना जाता है। ऐसे में इस बार वह अपनी पत्नी या भतीजे को उम्मीदवार बनवा सकते हैं। भाजपा में भी ऐसे कई नेता है, जिन्होंने अपने बेटों को पार्टी में सक्रिय कर दिया है। भाजपा में पूर्व मेयर आशा जसवाल के बेटे बृजेश्वर जसवाल कानूनी प्रकोष्ठ के संयोजक है। वह भी चुनाव में उम्मीदवार बन सकते हैं। भाजपा में पार्षद चंद्रवती शुक्ला के पति गोपाल शुक्ला भी इस बार खुद चुनाव लड़ना चाहते हैं।

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