चंडीगढ़, [कमल जोशी]। पंजाब सरकार द्वारा नशा तस्‍करों को फांसी की सजा का प्रस्‍ताव पारित किए जाने को अहम कदम माना जा रहा है। पंजाब सरकार के प्रस्‍ताव केंद्र सरकार के रुख का पता अभी नहीं चला है, लेकिन अधिकतर विधि विशेषज्ञ इससे सहमत नहीं हैं। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के विधि विशेषज्ञों को इस प्रावधान के दुरुपयोग की आशंका है।

कुछ विधि विशेषज्ञों ने कहा नशे की तस्करी रोकने की दिशा में अहम कदम, कुछ को दुरुपयोग की आशंका

नशे के कारोबारियों के खिलाफ मौत की सजा के प्रावधान को सरकार को तात्कालिक प्रतिक्रिया (नी-जर्क रिएक्शन) मानते हुए वरिष्ठ क्रिमिनल लॉयर राजिंदर सिंह चीमा का कहना है कि सिर्फ  मौत की सजा का प्रावधान करने से इस समस्या की निराकरण की अपेक्षा बेमानी होगी।

उन्होंने कहा कि साल 2011 में दिल्ली दुष्कर्म कांड के बाद दुष्कर्मियों के खिलाफ भी मौत की सजा का प्रावधान कर दिया गया पर क्या इससे दुष्कर्म के मामले घट गए। चीमा कहते हैं कि  पंजाब में नशे की समस्या के निदान के लिए बड़े स्तर पर सामाजिक अभियान चलाए जाने की जरूरत है जिसमें सिविल सोसायटी, धार्मिक, सांस्कृतिक और स्वयंसेवी संस्थाओं की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए। साथ ही युवाओं के लिए रोजगार और जीवनशैली से संबंधित नवीन अवसर भी उत्पन्न किए जाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि सिर्फ सौदागरों के खिलाफ सख्ती करके नशे की सप्लाई चेन को काट कर ही यह समस्या हल होती दिखाई नहीं देती। इसकी रोकथाम के लिए जरूरी है कि इसकी मांग को किया जाए। कई अन्‍य विधि विशेषज्ञों ने भी नशे के कारोबारियों के खिलाफ मौत की सजा के प्रावधान का विरोध करते हुए कहा है कि मौत की सजा का प्रावधान सिर्फ उन्हीं देशों में सहीं माना जा सकता है जहां आपराधिक मामलों को संदेह-रहित जांच की व्यवस्था मौजूद हो। भारत जैसे देश में गलत जांच के चलते अगर किसी को मौत की सजा दे दी जाती है तो इसमें सुधार होने की संभावना ही समाप्त हो जाएगी।

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मौत की सजा के प्रावधान का दुरुपयोग होने की संभावना काफी ज्यादा

पूर्व एडिशनल सॉलिसिटर जनरल मोहन जैन ने भी कहा कि मौत की सजा के प्रावधान का दुरुपयोग होने की संभावना काफी ज्यादा है। उन्होंने कहा कि भारत में एनडीपीएस एक्ट के दुरुपयोग की चर्चा कोई नई नहीं है और आपसी दुश्मनियों के मामलों में भी किसी को नशे के कारोबार में फंसाने के मामले सामान्य हैं। ऐसे में किसी के घर में नशे का सामान रखवा कर उसके खिलाफ गंभीर साजिश की संभावनाएं भी उत्पन्न हो सकती हैं।

नशे के बड़े कारोबारियों पर कसना होगा शिकंजा

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील एस के गर्ग नरवाना ने इस प्रावधान पर आंशिक सहमति देते हुए कहा है कि सख्त सजा के प्रावधान से अपराधियों पर कुछ हद तक नकेल लगने की संभावना तो होती ही है पर नशे के कारोबार में मौत की सजा का प्रावधान सिर्फ बड़ी मछलियों के खिलाफ ही सही माना जा सकता है और इस प्रावधान के सकारात्मक परिणाम तभी आ सकते हैं अगर नशे के अंतरराष्ट्रीय कारोबारी या बड़े स्तर के व्यापारी इसकी जद में आते हैं।

नरवाना के अनुसार, अगर स्थानीय स्तर पर नशे के चंगुल में फंसे छोटे कारोबारियों पर इस सख्त प्रावधान का प्रयोग होता है तो यह काउंटर-प्रोडक्टिव हो सकता है। ऐसे में इस प्रावधान को लागू करने के लिए इसे सावधानी से वर्गीकृत करने की भी आवश्यकता होगी। नशे के बड़े कारोबारियों को घेरने के लिए सुरक्षा और सतर्कता एजेंसियों को सुदृढ़ किया जाना चाहिए तभी ऐसे सख्त प्रावधानों का लाभ मिल सकता है।

 

Posted By: Sunil Kumar Jha

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