चंडीगढ़ [कैलाश नाथ]। देश में हरित क्रांति लाने वाले पंजाब के बच्चों की ग्रोथ लगातार रुक रही है। नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट को देख लें तो राज्य के 22 फीसद बच्चों की ग्रोथ नहीं हो रही है। वहीं, 58 फीसद बच्चों में खून की कमी पाई जा रही है। यह बच्चे न सिर्फ शारीरिक रूप से कमजोर हैं, बल्कि उनका मानसिक विकास भी रुक रहा है। इस सबके पीछे मुख्य कारण खानपान में बदलाव है।

बच्चे जब गर्भ में होते हैं तो महिला को न प्रोटीन मिल रहा है और न ही आयरन। इसका असर नवजात बच्चों पर पड़ रहा है। बाबा फरीद मेडिकल यूनिवर्सिटी के पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. प्यारा लाल गर्ग का कहना है कि फसली चक्र गेहूं और चावल पर फोकस होकर रह गया है। मोटा अनाज लोगों की जुबां से गायब हो गया।

उनका कहना है कि आजकल लोगों की मुख्य खुराक ही गेहूं और चावल है। न तो चना खाया जा रहा है और न ही बाजरा। पहले के खानपान में चना, बाजरा, मक्की, गुड़ आदि सभी शामिल होते थे। खानपान में मल्टीग्रेन का प्रयोग किया जाता था। गुड़ जिससे आयरन मिलता है। इसे रुटीन में ही खाया जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। इसका असर तो आना ही है।

वहीं, स्वास्थ्य विभाग के लिए भी चिंता का विषय है कि एक तरफ न सिर्फ बच्चों की ग्रोथ रुक रही है, बल्कि पंजाब में अपंगता भी बढ़ रही है। यह संख्या 11 लाख को पार कर गई है। डॉ. गर्ग कहते हैं कि खानपान में बदलाव के कारण मां में उतना दूध नहीं बन रहा है जितना कि एक बच्चे को जरूरत होती है। दूध न बनने के कारण बच्चों को बाहर का दूध देना पड़ता है। इसमें केमिकल के तत्व होते हैं। वहीं, ग्रीन रेवुलेशन को लाने के लिए किसानों ने केमिकल खादों का अंधाधुंध प्रयोग किया है। इसका असर अनाज पर भी पड़ा।

बच्चों में खून की कमी की समस्या भी बढ़ी

वहीं, खानपान में बदलाव होने के कारण बच्चों में खून की कमी की समस्या बढ़ती जा रही है। नेशनल फैमिली हेेल्थ सर्वे रिपोर्ट में बताया गया है कि पंजाब में 58 फीसदी बच्चों में खून की कमी है। इसका मुख्य कारण प्रोटीन व आयरन युक्त खाना न खाना बताया जा रहा है।

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Posted By: Kamlesh Bhatt