जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला (Shimla) में भारी बर्फबारी (Snowfall) और भूस्खलन की वजह से दो दिन बंद रहने के बाद मंगलवार को कालका-शिमला रेल ट्रैक फिर से शुरू हो गया। अंबाला मंडल के जनसंपर्क अधिकारी सुमीर शर्मा ने बताया कि यात्रियों की सुरक्षा के मद्देनजर अंबाला मंडल ने ट्रैक साफ करने के लिए दो दिन इस रूट पर ट्रेनों की आवाजाही बंद कर दी थी। मंगलवार से सभी छह ट्रेनों की आवाजाही दोबारा शुरू हो गई है। गौरतलब की पहाड़ों की रानी शिमला आने वाले पर्यटकों में इस ट्रेन के प्रति खासा रोमांच रहता है।

ट्रेन का नाम                   कालका से चलने का समय                  शिमला पहुंचने का समय

कालका -शिमला पैसेंजर – सुबह 3.30 बजे                                    सुबह 8.55 बजे

कालका -शिमला रेल मोटर -सुबह 9.52 बजे                                   सुबह 9.52 बजे

शिवालिक डीलक्स एक्सप्रेस – सुबह 9.45 बजे                                 सुबह 10.25 बजे

कालका - शिमला एनजी एक्सप्रेस – सुबह 6.20 बजे                         सुबह 11.35 बजे

हिमदर्शन एक्सप्रेस – सुबह 7 बजे                                                  दोपहर 12.55 बजे

118 साल पुराना है कालका-शिमला रेलवे मार्ग

कालका-शिमला रेलवे मार्ग 118 साल पुराना है। 9 नवंबर 1903 को कालका- शिमला रेल मार्ग की शुरूआत हुई थी। यह रेलमार्ग उत्तर रेलवे के अंबाला डिवीजन के अंतर्गत आता है। 1896 में इस रेल मार्ग को बनाने का कार्य दिल्ली-अंबाला कंपनी को सौंपा गया था। रेलमार्ग कालका स्टेशन (656 मीटर) से शिमला (2,076 मीटर) तक जाता है। 96 किमी. लंबे इस रेलमार्ग पर 18 स्टेशन है। साल 1921 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी इस मार्ग से यात्रा की थी।

103 सुरंगें से ट्रेन को गुजरते देख रोमांचित हो उठते हैं यात्री

कालका-शिमला रेलवे लाइन पर 103 सुरंगें है, जो इस सफर को काफी रोमांचक बना देती हैं। बड़ोग रेलवे स्टेशन पर 33 नंबर बड़ोग सुरंग सबसे लंबी है जिसकी लंबाई 1143.61 मीटर है। सुरंग क्रॉस करने में टॉय ट्रेन अढ़ाई मिनट का समय लेती है। रेलमार्ग पर 869 छोटे-बड़े पुल है जिस पर सफर और भी रोमांचक हो जाता है। कालका-शिमला रेलमार्ग को नैरोगेज लाइन कहते हैं। इसमें पटरी की चौड़ाई दो फीट छह इंच है।

साल 2008 में यूनेस्को ने दिया था वर्ल्ड हेरिटेज का दर्जा

कालका-शिमला रेलवे लाइन को यूनेस्को ने जुलाई 2008 में इसे वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल किया था। इसी रूट पर कनोह रेलवे स्टेशन पर ऐतिहासिक आर्च गैलरी पुल 1898 में बना था। शिमला जाते हुए यह पुल 64.76 किमी. पर मौजूद है। आर्च शैली में निर्मित चार मंजिला पुल में 34 मेहराबें हैं।

Edited By: Ankesh Thakur