डॉ. रविंद्र मलिक, चंडीगढ़ : पंजाब यूनिवर्सिटी के नए वीसी ने 22 जुलाई 2018 से ज्वाइन करना है, लेकिन इससे एक सप्ताह पहले ही पीयू की राजनीति चरम पर है। पिछले कुछ समय से वीसी प्रो. अरुण ग्रोवर पर सीनेटर्स को माफिया कहने के आरोप लगे। इसके चलते सिंडिकेट और सीनेट बैठक भी नहीं हो पाई। पीयू वीसी ने कार्यकाल होने से एक सप्ताह पहले 8 मार्च 2015 को सिंडिकेट बैठक के मिनट्स जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि जो मेरे उपर माफिया शब्द के इस्तेमाल का आरोप लगा रहे हैं वो तीन साल पहले इस शब्द का इस्तेमाल धड़ल्ले से करते रहे हैं। वीसी ने मामले को लेकर अशोक गोयल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने सीधे-सीधे कहा कि वो इस शब्द का इस्तेमाल सिंडिकेट बैठक में खुद करते रहे हैं जिसे लेकर अब मुझे बदनाम किया जा रहा है। मामले को लेकर सीनेटर अशोक गोयल से भी बात करने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने ना तो कॉल रिसीव की और ना ही मेसेज का जवाब दिया। हमें नैक के सामने माफिया कहा गया

सिंडिकेट बैठक की मिनट्स के पेज नंबर 17 पर सीनेटर अशोक गोयल कहते हैं कि नैक की टीम के सामने पीयू सिंडिकेट और सीनेट की बेहद खराब तस्वीर पेश की गई। नैक की टीम के सामने नकारात्मक छवि पेश की गई। उनको नहीं पता था कि 15 में से कौन 6 माफिया हैं। एक माफिया डॉन है और एक इस माफिया डॉन का भी डॉन है। यह छवि नैक की टीम के सामने पेश की गई। रौनकी राम बोले कौन माफिया है, सारी रिपोर्ट भेजी गई

इस पेज पर सीनेटर प्रो. रौनकी राम ने कहा कि एक्सेल सीट बनाकर नैक की टीम को दिखा दी गई है ताकि इसमें पता लग जाए कि कितने सिंडिकेट सदस्य हैं, कितने सीनेट सदस्य हैं और कितने माफिया डॉन हैं। यह लिस्ट 1992 के बाद के सदस्यों की है। प्रो. रौनकी राम ने कहा कि हां ऐसा हुआ था। माफिया शब्द को लेकर मीटिंग हो चुकी है कैंसिल

सीनेटर्स ने वीसी पर आरोप लगाए थे कि वो मीडिया और पब्लिक मंच पर उनको माफिया कहते हैं। इसलिए वो सिंडिकेट की मीटिंग में क्यों आए। 7 जुलाई को मीटिंग में सदस्य नहीं आए तो बैठक का कोरम नहीं पूरा हुआ और बैठक ही नहीं हो पाई। इसके बाद 8 जुलाई को सीनेट की बैठक भी मुश्किल से हो पाई क्योंकि जुलाई को भी 91 में से 16 सदस्य पहुंचे। इससे पहले भी वीसी पर सीनेटर्स को गिद्ध और माफिया कहने के आरोप लगे हैं। अशोक गोयल और वीसी में छत्तीस का आंकड़ा रहा है

वीसी और सीनेटर अशोक गोयल के बीच छत्तीस का आंकड़ा रहा है। हर मीटिंग में दोनों के बीच अक्सर बहस होना आम रहा है। वीसी का दूसरा कार्यकाल खत्म होने के नजदीक आते आते ये दूरियां और बढ़ गई। मेरे उपर माफिया शब्द का इस्तेमाल करने के आरोप लगे। 8 मार्च 2015 की मीटिंग के मिनट्स देखो कि वहां कौन माफिया शब्द का इस्तेमाल बार-बार कर रहा है। जो भी मीटिंग में कहा गया है वो बिल्कुल सही है और इस पर मेरे ही साइन हैं। अशोक गोयल ने बार-बार इस शब्द का इस्तेमाल किया है क्योंकि मैं इनकी बात नहीं मानता। वो जीके चतरथ के साथ भी बातचीत में माफिया डॉन कहते हैं।

प्रो. अशोक ग्रोवर, वीसी, पीयू।

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