जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। शहर के स्कूलों में अब जंक फूड बंद होगा। पीजीआइ चंडीगढ़ स्टूडेंट्स को जंक फूड के प्रति जागरूक करेगा। पीजीआइ का कम्युनिटी मेडिसिन और पब्लिक हेल्थ चंडीगढ़ शिक्षा विभाग के साथ मिलकर जागरूक अभियान चलाएगा। स्टूडेंट्स को जंक फूड के बारे में और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले बुरे असर से अवगत कराया जाएगा। इसके लिए पीजीआइ चंडीगढ़ और चंडीगढ़ शिक्षा विभाग स्कूलाें को एक गाइडलाइन जारी करेगा। इस गाइडलाइन को लागू करने के लिए सभी स्कूलों को एक सर्कुलर भेजा जाएगा। सर्कुलर भेजने के बाद स्कूलों में चल रही कैंटीन में जंक फूड पर पाबंदी लगाई जाएगी। कैंटीन में अब बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जाएगा। जिसमें जूस, फ्रूट्स और अन्य पौष्टिक आहार शामिल होगा।

पीजीआइ के कम्युनिटी मेडिसिन और पब्लिक हेल्थ विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर सोनू गोयल ने बताया कि स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में जंक फूड बेचने वाले रेहड़ी-फड़ी को भी हटाया जाएगा। यह देखने में आया कि बच्चे स्कूल से छुट्टी होने के बाद बाहर खड़े जंक फूड बेच रहे रेहड़ी-फड़ी पर इनका सेवन करते हैं। जोकि बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है।

जंक फूड का सेवन करने से बच्चों में बढ़ रहा मोटापा और अन्य बीमारियां

विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पूनम खन्ना ने बताया कि जंक फूड का सेवन करने से बच्चों में माेटापा बढ़ता जा रहा है। मोटापा बढ़ने के कारण बच्चों में बीमारियां भी बढ़ती जा रही है। बच्चे मानसिक और शारीरिक रूप से फिट नहीं रहते। जिसका असर बच्चों की पढ़ाई-लिखाई पर भी पड़ता है। बच्चों को स्वस्थ और बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए यह बेहद जरूरी है कि जंक फूड को उनके जीवन से खतम करना होगा। ताकि बच्चे पौष्टिक आहार का सेवन करें और अपने मानसिक और शारीरिक क्षमता को बेहतर बना सकें।

शहर में शुरू होंगे ट्रांसफैट फ्री स्कूल

डॉ. सोनू गोयल और चंडीगढ़ शिक्षा विभाग की डायरेक्टर डॉ. पालिका अरोड़ा ने बताया कि इसके तहत पीजीआइ और शिक्षा विभाग मिलकर शहर में ट्रांसफैट फ्री स्कूल प्रोग्राम शुरू करने जा रहा है। ताकि बच्चों में बढ़ते मोटापे और उच्च कार्डियो मेटाबोलिक्स जोखिम को खतम किया जा सके। क्योंकि शुरुआत से ही अगर बच्चों में जंक या फास्ट फूड की गंदी आदतों पर रोक लगाई जाए , तो आगे चलकर उन्हें उच्च रक्तचाप और डायबिटीज जैसी खतरनाक बीमारियों से नहीं जूझना पड़ेगा।

Edited By: Ankesh Thakur