चंडीगढ़ के नजदीक पंजाब का एक गांव ऐसा, जहां मकान की दूसरी मंजिल नहीं बनाते लोग; जानें क्या है वजह
मोहाली के जयंती माजरी गांव में लोग माता जयंती देवी के प्रति आस्था के चलते मकानों की दूसरी मंजिल नहीं ...और पढ़ें

शिवालिक पहाड़ियों के बीच बसे गांव में बना है माता जयंती देवी का मंदिर।
HighLights
मोहाली के गांव में नहीं बनते मकानों के दूसरे तल।
माता जयंती देवी के प्रति गहरी आस्था है वजह।
मंदिर से जुड़ी है राजकुमारी और डाकू की लोककथा।
अजय अग्निहोत्री, मोहाली। चंडीग्रढ़ के नजदीक पंजाब के मोहाली जिले में एक ऐसा गांव है, जहां पर लोग मकान की दूसरी मंजिल नहीं बनाते। इसके पीछे वजह इस गांव के लोगों की माता जयंती देवी के प्रति आस्था है।
माता जयंती देवी के नाम पर ही गांव का नाम पड़ा है और यहां ऊंची पहाड़ियों पर मां का वर्षों पुराना मंदिर है। इस मंदिर की मान्यताएं कांगड़ा में स्थित जयंती देवी मंदिर के साथ जुड़ी हैं और ये मंदिर 550 साल से ज्यादा पुराना है।
शिवालिक पहाड़ियों के बीच बसे जयंती माजरी गांव में बने मंदिर के पुजारी भानू शर्मा ने बताया कि कांगड़ा की जयंती देवी माता की परम भक्त, राजा कांगड़ा की बेटी राजकुमारी प्रतिदिन सुबह भोजन करने से पहले और रात को सोने से पहले माता के दर्शन करती थी।
उनका विवाह हथनौर राज्य (जहां अब गांव जयंती माजरी स्थित है) के राजा से तय हुआ तो उसे माता से दूर होने की चिंता सताने लगी। मान्यता है कि विवाह से एक रात पहले माता ने स्वप्न में दर्शन देकर राजकुमारी को आश्वासन दिया कि वह उसके साथ रहेंगी।
अगली सुबह राजकुमारी की डोली विदा होनी थी, लेकिन उसे उठाया नहीं जा सका। तब राजकुमारी ने अपने पिता को स्वप्न की बात बताई। इसके बाद माता का ध्यान किया गया और माता की पिंडी को डोली के साथ स्थापित करने पर डोली उठ गई। वो पिंडी ही आज मंदिर में स्थापित है।
डाकू गरीबदास राजा को हराकर बना था राजा
पंडित भानू शर्मा बताते हैं कि उनकी तेरहवीं पीढ़ी मंदिर की सेवा निभा रही है। वे बताते हैं कि राजकुमारी का पति उसे माता के दर्शन करने से रोकता था और श्रद्धालुओं का भी अपमान करता था। राजकुमारी का देहांत हो गया तो माता के मंदिर में पूजा-पाठ बंद हो गया।
माता के एक अन्य भक्त, मनीमाजरा के जंगलों में रहने वाले डाकू गरीबदास को स्वप्न में मार्गदर्शन मिला और उसने तत्कालीन राजा पर हमला बोल दिया। वो युद्ध में विजयी बनकर राजा बन गया। मान्यता है कि युद्ध में हुए विनाश का पश्चाताप करने के लिए माता ने उसे नया गांव बसाने की प्रेरणा दी थी और उसने गांव मुल्लापुर बसाया था।
माता का मंदिर पहले हथनौर राज्य में बहती नदी के किनारे था और गरीबदास ने ही माता की पिंडी को गांव में स्थित ऊंची पहाड़ी पर स्थापित करवाकर मंदिर बनवाकर स्थापित करवाया था। गांव में एक मंजिल के बाद दूसरी मंजिल न बनाने की वजह भी माता के प्रति स्थानीय लोगों की आस्था है।
