चंडीगढ़, इन्द्रप्रीत सिंह। श्री अकाल तख्त साहिब के संस्थापक छठे गुरु गुरु हरगोबिंद साहिब के गुरुता गद्दी दिवस पर तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने सिखों को आधुनिक हथियार रखने का आह्वान किया है, लेकिन कहा है कि वह इसके लिए लाइसेंस जरूर लें। जत्थेदार साहिब के इस बयान को सिख समुदाय ने ही काफी बुरा मना है और इसे युवाओं को उकसाने वाला बताया है। यहां तक कि तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार भाई रंजीत सिंह ने भी इस बयान को नकारा है। उन्होंने जिस तरह के शब्दों का इस्तेमाल किया है वह अपने आप में महत्वपूर्ण है। भाई रंजीत सिंह ने पूछा है कि क्या जत्थेदार साहिब के मन में किसी प्रकार की कोई रणनीति घूम रही है ।

अगर घूम रही है तो वह खुलकर सामने आएं और उसे समुदाय के सामने रखें। अगर ऐसा कुछ नहीं है तो वह युवाओं को गुमराह क्यों कर रहे हैं? पंजाब पहले ही 15 साल संताप भोग चुका है। कई घर तो ऐसे हैं जहां कोई चूल्हा जलाने वाला भी नहीं बचा है। यही नहीं, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह से अपील की है कि वह सिखों को लाइसेंसी आधुनिक हथियार रखने के लिए कहने के बजाय समाज में शांति, सद्भावना और भाईचारे का संदेश फैलाएं। हम एक सभ्य समाज में रह रहे हैं जहां देश का शासन कानून के राज से चलता है। इस प्रकार सहृदय और सद्भावना वाले समाज में हथियारों की कोई जगह नहीं होती।

सवाल यह है कि आखिर उन्हें इस तरह का बयान देने की जरूरत क्यों पड़ी है? क्या सिख पंथ को किसी प्रकार का कोई खतरा है? क्या पंजाब के युवा हथियारों की मांग कर रहे हैं? श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार के इस बयान के पीछे क्या कोई राजनीति है या फिर वह जिस संदर्भ में अपनी बात रखना चाहते थे उसमें सही तरीके से रख नहीं पाए?

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) के पूर्व सदस्य अमरिंदर सिंह इसके पीछे शिरोमणि अकाली दल की राजनीति को देख रहे हैं। उनका मानना है कि चूंकि शिरोमणि अकाली दल पिछले दो चुनावों में सत्ता में नहीं आ सका है। इस कारण उसका पंथक वोट बैंक तेजी से खत्म हो रहा है। इस पंथक पार्टी के लिए उसे अपने साथ बनाए रखना मुश्किल साबित हो रहा है। इसलिए वह जत्थेदार के माध्यम से अपनी राजनीति को चलाने की कोशिश कर रही है।

आतंकवाद के दोष में पकड़े गए युवा वर्षो से देश की विभिन्न जेलों में बंद हैं। उन्हें छुड़वाने के लिए शिरोमणि अकाली दल ने जिस प्रकार मुहिम छेड़ी हुई है उसके पीछे भी जत्थेदार श्री अकाल तख्त साहिब ज्ञानी हरप्रीत सिंह का ही हाथ है। उन्होंने ही सभी सिख संगठनों को इस मुद्दे पर एक राय बनाने और जेलों में बंद सिखों को छुड़वाने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाने को कहा। इसके लिए हुईं बैठकों में गर्म दलीयों को भी अपनी बात रखने का मौका मिल गया, जो शिरोमणि अकाली दल की नीति नहीं है। खासतौर पर शिरोमणि अकाली दल अमृतसर के प्रधान सिमरनजीत सिंह मान ने जिस तरह से खालिस्तान का मुद्दा उठाया, उसने सुखबीर बादल को भी परेशानी में डाल दिया।

श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार को यह नहीं भूलना चाहिए कि वह सिखों की शीर्ष संस्था के प्रमुख हैं। उनकी आवाज, उनके शब्दों का मोल है। पंथ उनके कहे अनुसार चलता है। वह उस धर्म की अगुवाई करते हैं, जो सरबत का भला चाहती है और दिन रात होने वाली अरदास में सरबत का भला मांगती है। अगर वे इस तरह की बयानबाजी करेंगे तो पंथ उन्हें सुनना बंद कर देगा। उन्हें समझना होगा कि उनका काम पंथ को सही नेतृत्व देना है। उन्हें इस बात की ओर भी ध्यान देना होगा कि पंजाब में डेरावाद तेजी से बढ़ रहा है। इसके चलते पंजाब आज देश का ऐसा राज्य बन गया है जहां सबसे ज्यादा डेरे हैं। अनुसूचित जाति के लोगों का इन डेरों में जाने का रुझान तेजी से बढ़ रहा है। जत्थेदार साहिब को सिख पंथ की दूसरी बड़ी चुनौती की ओर भी देखने की जरूरत है। पंजाब में अनुसूचित जाति के लोगों में धर्म परिवर्तन करके ईसाई धर्म अपनाने की होड़ लगी हुई है। यानी सिख धर्म को छोड़कर लोग ईसाई बनने को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं।

खासतौर से फतेहगढ़ साहिब, रोपड़, गुरदासपुर आदि जिलों में चर्च की संख्या लगातार बढ़ रही है। उनमें जिस प्रकार सिखों के जाने का रुझान बढ़ा है वह इसलिए भी चिंतनीय है कि फतेहगढ़ साहिब की धरती पर ही धर्म परिवर्तन करने के बजाय साहिबजादों ने खुद को दीवारों में जिंदा चुनवाना पसंद किया था। शायद इसकी वजह यह है कि जिन लोगों के कंधों पर सिख पंथ को नेतृत्व देने की जिम्मेदारी है वे अपनी राजनीति में उलङो हुए हैं। अच्छी बात यह है कि सिख समुदाय ने अपने ही जत्थेदार के बयान को ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया, बल्कि उनकी कड़ी आलोचना की है।

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह से यह अपील कर सही ही किया है कि वह सिखों को लाइसेंसी आधुनिक हथियार रखने के लिए कहने के बजाय समाज में शांति, सद्भावना और भाईचारे का संदेश फैलाएं। वैसे भी सहृदय समाज में हथियारों की कोई जगह नहीं होती

[राज्य ब्यूरो प्रमुख, पंजाब]

Edited By: Sanjay Pokhriyal