चंडीगढ़, जेएनएन। इंश्योर्ड टायर्स चोरी होने के बाद उनका क्लेम नहीं देना एक कंपनी को महंगा पड़ गया। कंज्यूमर फोरम ने एक शिकायतकर्ता की शिकायत पर नेशनल इंश्योरेंस कंपनी द्वारा शिकायतकर्ता को क्लेम के 35,292 रुपये देने का आदेश दिया है। साथ ही शिकायतकर्ता को इस दौरान हुई मानसिक परेशानी के लिए सात हजार रुपये मुआवजा राशि और दस हजार रुपये केस खर्च के रूप में देने के लिए भी कहा है। दरअसल कंपनी ने यह कहते हुए शिकायतकर्ता का क्लेम रिजेक्ट कर दिया था कि टायर्स चोरी होने की एफआइआर काफी समय बाद दर्ज हुई है।

सेक्टर-21 निवासी ने दी थी शिकायत

सेक्टर-21 निवासी नीतू ने कंज्यूमर फोरम को दी अपनी शिकायत में बताया कि उन्होंने अपनी स्कॉर्पियो गाड़ी की इंश्योरेंस वर्ष 2015 में नेशनल इंश्योरेंस कंपनी से करवाई थी। दिसंबर 2015 में उनकी गाड़ी के दो टायर चोरी हो गए। इसके लिए जब पुलिस को शिकायत दी तो सिर्फ डीडीआर ही दर्ज की गई। इसके बाद जब कंपनी को क्लेम के लिए कहा तो कंपनी ने एक कर्मचारी को निरीक्षण के लिए भेज दिया। कर्मचारी ने निरीक्षण करने के बाद 35292 रुपये का नुकसान कंपनी को बता दिया। लेकिन कंपनी ने क्लेम देने से इन्कार कर दिया। जिसके बाद नीतू ने परेशान होकर कंज्यूमर फोरम का दरवाजा खटखटाया।

कंपनी ने दी यह दलील

कंपनी ने अपने पक्ष में दलील देते हुए कहा कि शिकायतकर्ता की गाड़ी के टायर्स दो दिसंबर, 2015 को चोरी हुए थे लेकिन इस मामले में एफआइआर 29 दिसंबर, 2016 को करीब एक साल बाद दर्ज हुई। वहीं, नीतू ने कहा कि उन्होंने पुलिस को तुंरत इसकी सूचना दे दी थी और तब के केवल डीडीआर ही दर्ज हुई थी। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अब कंज्यूमर फोरम ने अपना यह फैसला सुनाया है।

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Posted By: Sat Paul

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