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जेएनएन, चंडीगढ़: गुरदासपुर उपचुनाव में जीत के बाद पंजाब की कैप्‍टन अमरिंदर सिंह सरकार ने साेमवार को राज्‍य के इंडस्ट्री को दिवााली का तोहफा दिया। सरकार ने राज्‍य के उद्योगों को पांच रुपये प्रति यूनिट बिजली देने का फैसला किया है। पहले यह दर 7.41 रुपये थी। किसान कर्ज माफी में एक माह के अंदर फैसला किया जाएगा। ये फैसले यहां राज्‍य कैबिनेट की बैठक में किए गए।

मुख्‍यमंत्री कैप्‍टन अमरिंदर सिंह की अध्‍यक्षता में साेमवार को शाम मंत्रिमंडल की बैठक हुई। इस बैठक में कई महत्‍वपूर्ण निर्णय किए गए। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के वादे के मुताबिक कैबिनेट ने राज्‍य में उद्योगों काे पांच रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली देने का फैसला किया। इससे राज्‍य के उद्योगों को बड़ी राहत मिलेगी।

कैबिनेट की बैठक में कहा गया कि किसानों की कर्जमाफी पर एक माह में फैसला होगा। किसानों के कर्ज की माफी के लिए मंडीकरण बोर्ड, सेंट्रल डेवलपमेंट बोर्ड और ग्रामीण विकास बोर्ड कदम उठाएंगे। कैबिनेट की बैठक में इसके अलावा भी कई निर्णय किए गए।

मंत्रिमंडल की बैठक में नई औद्योगिक व व्यापारिक विकास नीति-2017 को भी मंजूरी दे दी गई। इसके अलावा पंजाब राज्य औद्योगिक विकास निगम के कर्ज के एकमुश्त निपटारे का रास्ता भी साफ हो गया है। इसमें मौजूदा व नए उद्योगों के लिए अगले पांच वर्षों के लिए बिजली दरें निर्धारित करने की व्यवस्था की गई है।

नई नीति में मौजूदा इकाइयों को नई इकाइयों के बराबर प्रसार, आधुनिकीकरण के लिए रियायतें देने के अलावा पंजाब राज्य औद्योगिक विकास निगम (पीएसआईडीसी), पंजाब वित्त निगम (पीएफसी) और पंजाब एग्रो औद्योगिक निगम लिमिटेड (पीएआइसी) से लिए गए औद्योगिक कर्ज का एकमुश्त निपटारे की भी व्यवस्था की गई है।

1800 करोड़ रुपये का बोझ
पंजाब की इंडस्ट्री में सालाना करीब 15000 मिलियन यूनिट बिजली की खपत होती है। इंडस्ट्री को 5 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली मुहैया करवाने पर राज्य सरकार पर सब्सिडी के रूप में करीब 1800 करोड़ रुपये सालाना बोझ पड़ेगा।

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बिजली मंत्री राणा नहीं हुए शामिल

कर्ज के एकमुश्त निपटारा संबंधी चर्चा में बिजली मंत्री राणा गुरजीत सिंह ने हिस्सा नहीं लिया। क्योंकि उनकी कंपनी को भी इसका लाभ मिल सकता है। नई नीति के तहत सीमावर्ती जिलोंं, सीमावर्ती जोन और तटीय क्षेत्रों के विकास पर भी जोर दिया गया है। इसके तहत सरहदी क्षेत्रों में मौजूदा उद्योग को रियायतों 125 फीसद से बढ़ा कर 140 फीसद करने का प्रस्ताव किया।

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आठ बिंदुओं पर फोकस 

व्यापार को आसान बनाने के उद्देश्य से नई औद्योगिक नीति में आठ राजनीतिक बिंदुओं पर फोक किया गया है। ये हैं-
-बुनियादी ढांचा
-बिजली
-एमएसएमई
-स्टार्ट अप और उद्यम
-हुनर विकास
-व्यापार को आसान बनाना
-वित्तीय और गैर-वित्तीय रियायतें
-सेक्टर आधारित रणनीति
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इंडस्ट्री रफ्तार पकड़ेगी

'' इंडस्ट्री को सरकार ने दिवाली का तोहफा दिया है। इससे इंडस्ट्री रफ्तार पकड़ेगी और पड़ोसी राज्यों से ज्यादा उत्पादन कर सकेगी। इंडस्ट्री के हित में सरकार का यह बेहतर कदम है।

                                         -उपकार सिंह आहूजा, प्रधान चैंबर ऑफ इंडस्ट्रियल एवं कमर्शियल अंडरटेकिंग।

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20 फीसद बढ़ेगा कारोबार

'' इस फैसले से प्रतिवर्ष 15 से 20 फीसद कारोबार बढ़ जाएगा। इंडस्ट्री को बूस्ट मिलेगा। पहले महंगी बिजली के कारण इंडस्ट्री दूसरे राज्य में पलायन कर रही थी। अब राज्य में कारोबार बढ़ेगा। नई इंडस्ट्री लगेगी। सरकार को अधिक रेवेन्यू अधिक मिलेगा। इस घोषणा से इंडस्ट्री सर्वाइव होगी।

                                                                               -बलराम कपूर, ऑटो पाट्र्स के क्लस्टर के चेयरमैन।
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14 नए औद्योगिक पार्क विकसित होंगे

नई नीति के तहत पीएसआइईसी का संवैधानिक अथॉरटी के तौर पर स्तर ऊंचा उठाया जाएगा और सभी औद्योगिक इकाइयों का संरक्षण किया जाएगा। 14 नए औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे। सभी इकाइयोंं की प्रशानिक नीतियों और काम करने के ढंग के मापदंड बनाए जाएंगे। मोहाली, लुधियाना, जालंधर और अमृतसर के लिए पहले चरण दौरान प्रदर्शनी और कन्वेंशन सेंटर स्थापित किये जाएंगे।

निवेश पर सब्सिडी

नई औद्योगिक नीति में विभिन्न रियायतें उपलब्ध करवाई गई हैं। इसमें निवेश सब्सिडी भी दी गई है, जो कि नेट एसजीएसटी, बिजली कर से छूट, जायदाद टैक्स और अन्य रियायतों से छूट के रूप में दोबारा भुगतान के माध्यम से उपलब्ध करवाई जाएगी। एमएसएमई इकाइयों को बड़े उद्योगों के मुकाबले ज्यादा रियायतें दी गई हैं, जिसमें वित्त, बुनियादी ढांचे, मार्केट व प्रौद्यौगिकी की सुविधाओं तक पहुंच शामिल है।
 

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Posted By: Sunil Kumar Jha

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