जागरण संवाददाता, चंडीगढ़ : एडवाइजर धर्म पाल ने यूटी प्रशासन ज्वाइन करने के बाद सभी डिपार्टमेंट को ऐसे नियम और कानूनों की पहचान करने के आदेश दिए थे जो गैर जरूरी हैं। इनका वर्तमान में कोई महत्व नहीं है। इनकी वजह से किसी फाइल पर ज्यादा समय बर्बाद होता है। इंडस्ट्री डिपार्टमेंट ने ऐसे ही गैर जरूरी बोझ को खत्म करने के लिए सोमवार को रिव्यू मीटिग बुलाई। इंडस्ट्री के अलग-अलग डिपार्टमेंट से जुड़े ऐसे 1130 कंप्लाइंसेस की पहचान की थी। इनमें से 930 नियम और कानूनों को खत्म या मर्ज करने का काम पूरा कर लिया है। 122 अभी बचे हैं इनमें से अधिकतर 31 मई तक पूरे कर लिए जाएंगे। यह जानकारी रेगुलेटरी कंप्लाइंसेस के गैर जरूरी बोझ को खत्म करने के लिए बुलाई गई रिव्यू मीटिग में एडवाइजर धर्म पाल को अधिकारियों ने दी। उच्च स्तर की इस मीटिग में एडवाइजर ने अधिकारियों से विस्तार से जानकारी ली। एडवाइजर ने अधिकारियों को आदेश दिए कि ऐसा कोई नियम और कानून नहीं रहना चाहिए जिसे देखा न गया हो। इसके साथ ही पहला चरण पूरा कर लिया जाएगा। दूसरे चरण का काम भी इसके साथ ही शुरू किया जा चुका है। सेल्फ एसेसमेंट, रूल्स, रेग्युलेशन, ला, एक्ट, फार्म, इंफोर्मेशन, फीस चार्ज, जारी करने के समय को भी कम करने के लिए सरलीकरण का काम होगा। एडवाइजर ने कहा कि गैर जरूरी बोझ को कम करने के लिए उससे जुड़े हितधारकों से लगातार चर्चा होनी चाहिए। इस मीटिग में होम सेक्रेटरी नितिन कुमार यादव, फाइनेंस सेक्रेटरी विजय नामदेवराव जेदे सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

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