कुराली, [चेतन भगत]। स्थानीय वार्ड नंबर-6 स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंग धाम उत्तर भारत का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां भगवान शिव के बारह स्वरूप के एक साथ दर्शन करने से देश के विभिन्न स्थलों पर स्थित भोलेनाथ के बारह ज्योतिर्लिंग धाम के दर्शन करने का पुण्य प्राप्त होता है। द्वादश ज्योतिर्लिंग धाम के पंडित विपिन चंद्र नैथानी, वीरेंद्र मिश्रा एवं वृंदावन बागवड़ी ने बताया कि शस्त्रों के अनुसार श्रावण मास भोलेनाथ का प्रिय माह है।

ऐसी मान्यता है कि सावन माह में हर सोमवार व्रत रखते हुए संपूर्ण माह पंचामृत से रुद्राभिषेक करने से शिव भगवान भक्तों की हर मनोकामना को बहुत जल्द पूर्ण करते है। ऐसे हुई द्वादश ज्योतिर्लिंगों की कुराली में स्थापना पंडित विपिन चंद्र नैथानी के अनुसार श्रावण मास के दौरान भोलेनाथ के अनन्य भक्तजन केदारनाथ धाम, अमरनाथ, महाकाल (उज्जैन), नीलकंठ महादेव, त्रियंबकेश्वर, सोमनाथ आदि के दर्शन करने के लिए ललायित तो होते हैं पर यह सभी धाम भारत के विभिन्न स्थानों पर होने की वजह से यहां पहुंचने के लिए अत्यधिक समय एवं धन दोनों की आवश्यकता पड़ती है जो हर वर्ग के लिए संभव नहीं है। इसी के मद्देनजर कुराली में कुछ साल पहले द्वादश ज्योतिर्लिंग की स्थापना की गई ताकि भोलेबाबा के भक्त यहां पहुंच एक ही स्थान पर बारह ज्योतिर्लिंग के दर्शन सुगमता से कर सकें।

ऐसे करे भोलेनाथ का पूजन
सावन महीने में भोलेनाथ की पूजन विधि के संबंध में पंडित विपिन चंद्र नैथानी (कथा वाचक) ने बताया कि पूरे श्रवण माह पूजन का शुभ मुहूर्त सुबह 9:10 से दोपहर दो बजे तक रहेगा। सावन के पूरे महीने विशेषकर सोमवार को पंचामृत, गंगाजल, दूध से शिव¨लग का जलाभिषेक कर शिवजी को वस्त्र, जनेऊ, बिल्व पत्र तथा धतूरा अर्पण करना चाहिए और ऐसा करने से भक्तजनों की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती है। श्रावण महीने में ओम नम: शिवाय (पंचाक्षर) मंत्र का सवा लाख जाप करना अति लाभप्रद सिद्ध होता है। इस मंत्र का जप करने से जहां शरीर की सभी व्याधियों एवं रोगों का नाश होता है वहीं भक्तों को सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

विभिन्न प्रदेशों से पहुंचते है भक्तजन
पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश एवं निकटवर्ती स्थानों से भक्तजन यहां भोले नाथ के दर्शनार्थ पधारते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति करते है। पंडित वीरेंद्र मिश्रा ने बताया कि श्रावण मास की शिवरात्रि को हरिद्वार से सवा ¨क्वटल गंगाजल लाकर ज्योतिर्लिंगों का जलाभिषेक किया जाता है। प्रतिवर्ष की भांति इस बार भी 11 अगस्त रविवार को द्वादश ज्योतिर्लिंग धाम में श्रावण मास के अवसर पर जहां विशेष अर्धवार्षिक भंडारे का आयोजन किया जाएगा वहीं सावन के प्रत्येक सोमवार को बड़ी संख्या में व्रत रखने वाले भक्तजन ज्योतिर्लिंग धाम में उद्यापन करने के लिए पहुंचते है।

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