यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 09, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
पूर्व राजनयिक पार्थासारथी के विवादित बोल, नेहरू के बयान का नतीजा था भारत-चीन युद्ध
पूर्व राजनयिक जी. पार्थासारथी ने कहा है कि भारत और चीन युद्ध देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के बयान के कारण हुआ था।

चंडीगढ़, [बलवान करिवाल]। पूर्व राजनयिक जी. पार्थासारथी ने देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के बारे में विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत और चीन युद्ध पंडित जवाहरलाल नेहरू का बयान का नतीजा था। उन्हाेंने डिफेंस मिनिस्ट्री को रि-कंस्ट्रक्ट करने की जरूरत भी बताई है।
वह यहां चीन को लेकर रणनीतिक परिप्रेक्ष्य पर आयोजित सेशन में हिस्सा ले रहे थे। उन्होंने कहा कि एयरक्राफ्ट और टैंक खरीदने में वर्षों लग जाते हैं। प्रक्रिया इतनी ढीली है कि जब तक इनकी डिलीवरी होती है तब तक नई टेक्नोलॉजी आ चुकी होती है। इस तरह से चीन को कैसे टक्कर दी जा सकती है। इस लिए डिफेंस मिनिस्ट्री को रि-कंस्ट्रक्ट करने की जरूरत है।
'सबक सिखा देंगे' जैसे शब्द देश के लिए साबित हो सकते हैं घातक
पार्थासारथी ने कहा कि युद्ध के हालात न बनें इसके लिए बातचीत होती रहनी चाहिए। फिर चाहे वह चीन से हो, पाकिस्तान से या फिर किसी अन्य देश से। अक्सर राजनीति से जुड़े लोग भड़काऊ शब्दों का इस्तेमाल कर स्थिति को बिगाड़ देते हैं। ऐसी ही गलती पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भारत-चीन युद्ध से पहले की थी। चीन की सेना बॉर्डर पर थी।
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चीन से मुकाबले के लिए रक्षा मंत्रालय को करना होगा रि-कंस्ट्रक्ट
उस समय नेहरू ने कहा था कि मैंने अपनी सेना को कह दिया है कि चीन के सैनिकों को धक्के मार कर बाहर कर दो। नेहरू की यही स्टेटमेंट युद्ध का बड़ा कारण बनी। इस बार डोकलाम विवाद में गलती नहीं दोहराई। अच्छा नियंत्रण रहा।

मिलिट्री लिटरेचर फेस्टिवल में भाग लेते सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह अौर विशेषज्ञ।
देश में नई तकनीक इजाद करनी होगी
उन्होंने कहा कि आधुनिक हथियारों और एयरक्राफ्ट के लिए भारत अभी भी दूसरे देशों पर निर्भर है। देश में ही नई तकनीकों को इजाद करने की जरूरत है। साथ ही किसी देश की संप्रभुता में धर्म अहम रोल अदा करता है। चीन में बुद्ध का प्रभाव दूसरे सभी धर्मों से ज्यादा है और वहां धर्म के आधार पर लड़ाई नहीं होती। भारत तिब्बत के लाखों बोध अनुयायियों का डिप्लोमेसी में इस्तेमाल कर सकता है।
हिंद महासागर में वियतनाम भी जुड़े
पेट्रो-केमिकल्स का 80 प्रतिशत बिजनेस हिंद महासागर से ही है। इसका विस्तार करने की जरूरत है। इसमें वियतनाम, फ्रांस और जर्मनी को जोड़ा जाना चाहिए।
डोकलाम की रणनीति क्रिस्टल क्लीयर थी : ले. जनरल बख्शी
ले. जनरल प्रवीण बख्शी ने कहा कि डोकलाम पर चीन की दस्तक के साथ ही रणनीति तैयार कर ली गई थी। सेना को तैयार रहने के लिए कह दिया गया। पहली बार सभी तरह की डायरेक्शंस सिर्फ एक ही चैनल यानी रक्षा मंत्रालय से जारी हुई। किसी तरह की असमंजस की स्थिति से बचने के लिए ऐसा किया गया।
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उन्होंने कहा कि पहली बार भारत ने बातचीत करने की बजाए स्ट्रांग स्टैंड लिया। इसी बदौलत भारतीय सेना डोकलाम में 73 दिन तक चीन के सैनिकों के सामने डटी रही। वह एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सके। यह भारत की बड़ी जीत रही। जनरल बख्शी ने बताया कि पहले बॉर्डर के पास चीनी सैनिक मार्च कर चले जाते थे। डोकलाम के बाद अब वह बॉर्डर के पास ही जमने लगे हैं।
