चंडीगढ़, जेएनएन। पंजाब की कैप्‍टन अमरिंदर सिंह सरकार ने आमदनी बढ़ाने के लिए नया तरीका अपनाया है। राज्‍य सरकार शहरों में आउटडोर डिसप्‍ले विज्ञापनों से अपनी आय बढ़ाएगी। राज्‍य के स्‍थानीय निकाय मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने आज यहां विज्ञापन नीति जारी किया। उन्‍होंने कहा कि नई विज्ञापन नीति लागू करने से राज्‍य सरकार कोे 200 करोड़ रुपये से अधिक की आय होगी। पिछली बादल सरकार के समय विज्ञापन से होने वाली आय सरकारी खजाने में आने के बदले नेताओं की जेब में चली जाती थी।

सिद्धू ने यहां पत्रकारों से बातचीत में राज्‍य सरकार की  नई विज्ञापन नीति के बारे में जानकारी दी। सिद्धू ने लुधियाना में आउटडोर विज्ञापन में भारी वृद्धि का दावा किया। उन्‍होंने कहा कि पिछले 10 सालों में मात्र 31 करोड़ रुपये ही नगर निगम को आए थे। कांग्रेस सरकार की नई विज्ञापन नीति लागू किए जाने के बाद अकेले लुधियाना में ही एक साल में 23 करोड़ रुपये से ज्यादा की आय होगी।

उन्होंने बताया कि यह विज्ञापन नौ सालों के लिए दिए गए हैं और औसतन 32 करोड़ रुपये सलाना अकेले लुधियाना से ही मिलेंगे। नौ सालों में लुधियाना को 279 करोड़ रुपये का राजस्‍व मिलेगा। सिद्धू ने आरोप लगाया कि पूर्व अकाली भाजपा सरकार में पॉलिसी ही ऐसी बनाई गई थी कि ज्यादातर राशि सरकारी खजाने में आने की बजाए नेताओं की जेबों में जा रही थी।

उन्होंने कहा कि जब हरियाणा मात्र 82 शहरों से 200 करोड़ से ज्यादा विज्ञापनों से आमदनी लेता है तो पंजाब के 167 शहरों से मात्र 20 करोड़ की आमदनी क्यों हो रही थी। सिद्धू ने यह भी कहा कि पंजाब के 167 शहरों में यदि हमारी नई पॉलिसी के अनुसार विज्ञापन टेंडर अलॉट किए गए तो यह आमदनी 200 करोड़ से ज्यादा आ सकती है। उन्होंने इस बात पर एतराज भी जताया की क्योंकि यह पॉलिसी केवल नगर निगमों की सीमा के अंदर ही लागू होती है ऐसे में जितनी आमदनी सरकार को हो सकती है वह नहीं हो पाती है। ऐसा इसलिए कि नगर निगम के बाहररूरल डेवलपमेंट डिपार्टमेंट सीमा शुरू हो जाती है, जिनकी विज्ञापन की कोई पॉलिसी नहीं है।

उन्‍होंने कहा कि बहुत सी कंपनियां नगर निगम की सीमा के बाहर जाकर भी विज्ञापन के बोर्ड लगाती हैं जो सीधी सीधी चोरी है। वह मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से इस बारे में बात करेंगे और कहेंगे कि पॉलिसी पूरी स्टेट में लागू की जाए ताकि राज्य को 300 करोड़ की अतिरिक्त आमदनी हो सके।

 

Posted By: Sunil Kumar Jha

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