मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

जेएनएन, चंडीगढ़। भारतीय किसान यूनियन ने आरोप लगाया है कि चुनाव से पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सहकारी, व्यापारिक बैंकों और आढ़तियों व साहूकारों के कर्जों से किसानों को मुक्त करने का भरोसा दिया था, परन्तु अब सरकार भागने की तैयारी कर रही है। सरकार धारा 67ए खत्म करके कुर्की खत्म करने का ड्रामा कर रही है, जबकि कुर्की 67ए अधीन नहीं धारा 63बी और 63सी के अधीन की जाती है। इन धाराओं को नहीं बदला गया है।

भारतीय किसान यूनियन के प्रधान बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि पूरे देश के किसान कर्ज के जाल में फंसे हैं। जो सरकारों की किसान विरोधी नीतियों का निष्कर्ष है। किसान हर सूबे में आंदोलन कर रहे हैं। देश की बदकिस्मती है कि सरकार के पास मुट्ठी भर कॉर्पोरेट घरानों के लिए कर्ज माफ करने के लिए पैसों की कोई कमी नहीं, लेकिन गरीब किसानों और मजदूरों के लिए यह कदम देश के हित में न होना शर्मनाक है।

राजेवाल ने महाराष्ट्र में इस समय पर चल रहे आंदोलन की हिमायत करते कहा कि पंजाब के किसानों को भी महाराष्ट्र की तरह सभी शहरों को दूध और सब्जियां आदि की सप्लाई बंद करने के लिए आंदोलन की तैयारी कर लेनी चाहिए। उन्होंने कहा यूनियन पंजाब विधानसभा बजट सत्र तक किसान कर्ज माफी का इंतजार करेगी। यदि सरकार ने वादा न निभाया, तो पंजाब में जबरदस्त आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा।

मोदी सरकार का किसान विरोधी चेहरा उजागर

केंद्र सरकार की तरफ से पशुओं की खरीद-फरोख्त के संबंध में जारी की नोटिफिकेशन का विरोध करते हुए राजेवाल ने कहा कि ऐसी नोटिफिकेशन जारी करने के साथ मोदी सरकार ने अपना अंदरूनी किसान विरोधी चेहरा उजागर कर दिया है। भाजपा देश को सांप्रदायिक रास्ते पर बांटने के लिए ऐसे फैसले ले रही है। पशुधन की खरीद-फरोख्त पर शर्तें लगाना सीधा-सीधा किसानों की आर्थिक स्थिति को चोट पहुंचाने के बराबर है। उन्होंने कैप्टन से अपील की है कि वह भी केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और इस फैसले के विरोध में उतरी सरकारों के साथ आकर इस नोटिफिकेशन को पंजाब में लागू न करन का एलान करें।

सब्सिडी बंद करना चाहती है सरकार

राजेवाल ने मोदी सरकार की इस बातों भी सख्त निंदा की है कि वह किसानों को खाद की सब्सिडी सीधी अदा करने की आड़ में सब्सिडी बंद करना चाहती है। इस फैसले के साथ आगे से किसानों को 285 रुपये वाला यूरिया खाद का थैला 854 रुपये में और 1035 रुपये वाला डीएपी खाद का थैला 1750 रुपये में खरीदना पड़ेगा। खाद को जीएसटी के दायरे में लाने की चर्चा है। यदि खाद पर जीएसटी लग गया, तो यूरिया का बैग 100 रुपये और डीएपी खाद का बैग 210 रुपये महंगा हो जाएगी और आम किसान की पहुंच से बाहर हो जाएगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इंडस्ट्री को फायदा पहुंचाने के लिए किसान विरोधी कदम उठा रही है।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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