चंडीगढ़ [डॉ. रविंद्र मलिक]। किसानों को जमीन की उपजाऊ क्षमता पता करने के लिए अब किसान सेवा केंद्र के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। वे घर बैठे खुद इसका टेस्ट कर सकेंगे। सेक्टर-39 स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी (इमटेक) के स्टूडेंट्स ने ऐसा सॉयल मैपिंग उपकरण बनाया है, जो तुरंत जमीन की उपजाऊ शक्ति बता देगा और उसी हिसाब से खाद का इस्तेमाल किया जा सकेगा।

दो साल की कड़ी मेहनत के बाद स्टूडेंट्स इसको बना पाए हैं। इससे पहले किसानों को जमीन की उपजाऊ व उर्वरा शक्ति मापने के बारे में जानने में करीब 15 से 20 दिन लग जाते थे, लेकिन अब यह केवल 5 मिनट में होगा। यह हर वर्ग के किसानों के लिए बेहतर उपकरण है, जो उनके खर्च को भी कम करेगा और साथ में पैदावार बढ़ाने में मदद करेगा। रिसर्च इमटेक की शिल्पा, अनुराग कश्यप, हेमंत और शशिधर ने की है। उन्होंने साइंटिस्ट डॉ. सीआर सूरी के सुपरविजन में यह कीर्तिमान बनाया है।

महज 50 रुपये में टेस्ट होगा

टेस्ट के लिए किसानों की जेब पर ज्यादा खर्च नहीं पड़ेगा। इसके लिए उनको महज 50 रुपये खर्च करने होंगे।12 लाख रुपये खर्च आया1उपकरण बनाने में करीब 2 साल लगे हैं। इसमें 1 साल तो केमिकल रिसर्च में लगा है और बाकी समय उपकरण को विकसित करने में लगा है। इसका प्रोटोटाइट तैयार हो चुका है। इसके सफल ट्रायल भी हो चुके हैं। इस पर करीब 12 लाख का खर्च आया है, जो स्टूडेंट्स को स्कॉलरशिप के तौर पर मिला है।

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खास बात : पैदावार बढ़ेगी और समय भी बचेगा

उपकरण के इस्तेमाल से किसानों का काफी समय बचेगा। उनको फसल बोने से काफी पहले जल्दी पता लग जाएगा कि कितनी मात्र में खाद चाहिए। उनको बिल्कुल सटीक मात्र का पता चलेगा कि जमीन की उपजाऊ व उर्वरा क्षमता कितना है। कमजोरी को दूर करने के लिए वो सही मात्र में खाद का उपयोग कर सकेंगे। इसके अलावा जरूरत नहीं होने और कम खाद के इस्तेमाल से पैसा भी बचेगा।

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ऐसे होगा टेस्ट

टेस्ट में उपकरण के माध्यम मिट्टी का सैंपल चेक करेंगे। इसको एक विशेष तरल पदार्थ के साथ उपकरण में डाला जाएगा। इसको हीट पर रखा जाएगा। इसके बाद सैंपल का कलर चेंज होगा या नहीं, यही देखना है। इसी आधार पर जमीन की क्षमता का पता चलेगा। इसमें अमोनिया, नाइट्रेट या दोनों अमोनिया नाइट्रेट की मात्र का पता चलेगा। मिट्टी को लिक्विड में मिलाने के बाद महज प्वाइंट 5 एमएल सैंपल से पता चल जाएगा।

ये हैं मुख्य प्वाइंट

  • महज 50 रुपये में होगा टेस्ट, 5 मिनट में आएगी सैंपल की जांच रिपोर्ट
  • पोर्टेबल है उपकरण, कहीं भी करें टेस्ट
  • छोटे किसान मिलकर कर सकते हैं इस्तेमाल
  • खर्च कम होगा और पैदावार बढ़ेगी
  • दो से ढाई हजार में उपलब्ध है उपकरण
  • उपकरण को बनाने में करीब 4 हजार का खर्च आ रहा है, लेकिन मार्केट में यह 2 हजार रुपये में उपलब्ध
  • यह पोर्टेबल उपकरण है, जिसका साइज छह बाई छह इंच है और ऊंचाई करीब 3 इंच

एमओयू भी साइन हो चुका है

उपकरण को लेकर एमओयू भी साइन हो चुका है। हैदराबाद की ईसीआइएल लैब के साथ एमओयू साइन हो चुका है। साथ में कई कंपनियां इसको खरीदने को लेकर संपर्क कर चुकी हैं। इसके अलावा 3-4 कंपनियों से बात चल रही है।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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