IDFC बैंक घोटाला; बैंकर रिभव से मुलाकात और सरकारी विभागों का पैसा गायब करने का आइडिया कैसे आया? वधवा ने उगला राज
चंडीगढ़ में आईडीएफसी बैंक घोटाले के मास्टरमाइंड विक्रम वधवा को गिरफ्तार किया गया है। उसने पूर्व बैंक मैनेजर रिभव ऋषि ...और पढ़ें

करोड़ों रुपये के घोटाले में गिरफ्तार रियल एस्टेट इन्वेस्टर चंडीगढ़ निवासी विक्रम वधवा।
HighLights
रिभव के पिता पीएबी के वरिष्ठ प्रबंधक रहे, उन्हीं के जरिये मुलाकात।
IDFC बैंक के पूर्व मैनेजर रिभव ऋषि के साथ मिलकर रची साजिश।
शेल कंपनियों के जरिए रियल एस्टेट में पैसा लगाया।
मनोज बिष्ट, चंडीगढ़। आईडीएफसी बैंक से जुड़े करोड़ों के घोटाले के मास्टरमाइंड 52 वर्षीय विक्रम वधवा ने गिरफ्तारी के बाद बड़ा खुलासा किया है। पुलिस पूछताछ में वधवा ने बताया कि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के पूर्व मैनेजर रिभव ऋषि के साथ मिलकर सरकारी विभागों के खातों में जमा करोड़ों रुपये को शेल कंपनियों के जरिए निकालकर रियल एस्टेट में लगाया गया।
नगर निगम चंडीगढ़, चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (सीएससीएल) और क्रेस्ट के खातों से करोड़ों रुपये का गबन के मामले में चंडीगढ़ क्राइम ब्रांच ने रियल एस्टेट इन्वेस्टर वधवा को शुक्रवार रात खरड़ से गिरफ्तार किया। बाद में उसे इओडब्लयू को सौंप दिया गया है।
पूछताछ के दौरान वधवा ने बताया कि उसकी मुलाकात कई साल पहले पंजाब नेशनल बैंक सेक्टर-17 के वरिष्ठ प्रबंधक रहे राकेश कुमार ऋषि के जरिए उनके बेटे रिभव ऋषि से हुई थी। रिभव उस समय आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में कार्यरत था।
वधवा ने बताया कि रिभव ऋषि ने उसे बताया था कि उसके पास चंडीगढ़ और हरियाणा के कई सरकारी विभागों के बैंक खातों की जिम्मेदारी है, जिनमें करोड़ों रुपये जमा हैं। उसने प्रस्ताव दिया कि इन पैसों को अस्थायी रूप से निवेश के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर बाद में खातों में वापस एंट्री कर दी जाएगी।
जांच में सामने आया कि सरकारी विभागों के खाते पहले आईडीएफसी फर्स्ट बैंक सेक्टर-32 में स्थानांतरित करवाए गए। इसके बाद इन खातों से रकम पहले कुछ निजी कंपनियों के खातों में भेजी गई और फिर वहां से वधवा के खातों में पहुंचाई गई।
शेल कंपनियों के जरिए किया गया लेनदेन
पुलिस के अनुसार इस नेटवर्क में कैपको फिनटेक सर्विसेज, आरएस ट्रेडर्स और स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स जैसी कंपनियों का इस्तेमाल किया गया। इन कंपनियों के खातों के जरिए सरकारी फंड को अलग-अलग जगह ट्रांसफर किया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि कुछ रकम बैंक अधिकारी रिभव ऋषि और उनकी पत्नी दिव्या अरोड़ा के खातों में भी गई। बाद में यह पैसा रियल एस्टेट परियोजनाओं में लगाया गया।
चंडीगढ़, मोहाली और खरड़ में लगाए गए प्रोजेक्ट
वधवा ने बयान में बताया कि पिछले तीन-चार वर्षों में उसने कई आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं में निवेश किया। उसके प्रोजेक्ट चंडीगढ़, मोहाली, खरड़ समेत कई स्थानों पर चल रहे हैं।
उसने यह भी बताया कि इन संपत्तियों के मूल दस्तावेज पंजाब और हरियाणा में अलग-अलग स्थानों पर रिश्तेदारों के पास रखे गए हैं। कुछ समय पहले उसके घर पर आयकर विभाग की भी छापेमारी हो चुकी है।
फर्जी एफडी और बैंक स्टेटमेंट का भी खुलासा
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड के रिकाॅर्ड में करीब 116.84 करोड़ रुपये के 11 एफडी दिखाए गए थे, लेकिन बैंक के सिस्टम में उनका कोई रिकार्ड नहीं मिला।
पुलिस के अनुसार यह एफडी मार्च-अप्रैल 2025 में कथित तौर पर आइडीएफसी फर्स्ट बैंक सेक्टर-32 शाखा के तत्कालीन मैनेजर रिभव ऋषि द्वारा जारी किए गए थे। इसके अलावा बैंक स्टेटमेंट की जांच में 8.22 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन भी सामने आए हैं, जिनकी पुष्टि नगर निगम के रिकाॅर्ड में नहीं मिल रही।
सात दिन के रिमांड की मांग, पांच दिन का मिला
चंडीगढ़ के सेक्टर-33 निवासी विक्रम को शनिवार को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे पांच दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। इओडब्ल्यू ने अदालत से आरोपित का सात दिन का पुलिस रिमांड मांगा था। अदालत में पेशी के दौरान आरोपित ने तीन अलग-अलग अर्जियां भी दाखिल कीं।
पहली अर्जी भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 183(1) व 183(5) के तहत दी गई, जिसमें आरोपित ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान उससे कई हस्तलिखित और टाइप किए गए कागजों तथा खाली कागजों पर जबरन हस्ताक्षर करवाए गए।
दूसरी अर्जी में आरोपित ने अपनी गिरफ्तारी से संबंधित दस्तावेजों की प्रतियां मांगीं, जिनमें गिरफ्तारी मेमो, एफआईआर की काॅपी और रिमांड आवेदन की कापी शामिल है। तीसरी अर्जी में आरोपित ने अपनी गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए इसे कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के खिलाफ बताया।
साथ ही इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 और 22 का उल्लंघन बताते हुए बीएनएस की धारा 36, 35, 47, 48 और 62 का हवाला दिया। फिलहाल इओडब्ल्यू की टीम आरोपित से पूछताछ कर घोटाले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका और पैसे के लेनदेन की जांच कर रही है।

