राजेश मलकानियां, पंचकूला

हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एचएसआरएलएम) के जिला कार्यक्रम प्रबंधक मनीष कुमार को वित्तीय अनियमितता के मामले में बर्खास्त कर दिया गया है। मिशन की मुख्य कार्यकारी अधिकारी डा. अमरेंद्र कौर ने 20 दिन की जांच के बाद यह कार्रवाई की है। जांच में मनीष को दोषी पाया गया। आरोप था कि मनीष कुमार ने बिना प्रशासनिक अप्रूवल के ही कई पेमेंट जारी कर दिए। जबकि उसके पास इसका वित्तीय अधिकार नहीं था। हालांकि मनीष कुमार ने अपनी बर्खास्तगी के खिलाफ अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) के समक्ष अपील की है, जोकि विचाराधीन है।

जांच रिपोर्ट में बताया गया कि एक प्राइवेट नंबर की बोलेरो कार मनीष कुमार ने अपने सरकारी कार्यालय में नियमों के बाहर जाकर लगाई। सरकारी दफ्तर में केवल कामर्शियल गाड़ी लगाई जा सकती है। इसके अलावा इस गाड़ी पर खर्च भी नियमों के खिलाफ किया गया। गाड़ी की पेमेंट करने के लिए तत्कालीन एडीसी मनिता मलिक के पास फाइल गई, तो उन्होंने आपत्ति लगाते हुए इस रिकॉर्ड तलब किया। मनीष कुमार ने एडीसी के निर्देश को दरकिनार कर अपने स्तर पर गाड़ी की मासिक पेमेंट जारी कर दी। यह गाड़ी पहले 25 हजार रुपये में 2400 किलोमीटर मासिक चलाने की अनुमति थी, लेकिन हेराफेरी कर गाड़ी को 56 हजार रुपये मासिक के तौर पर रख लिया गया। जबकि इसके एडीसी से अप्रूवल नहीं मिली। मामले में मनीष को पहले शोकॉज नोटिस जारी किया गया था। जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि बुलेरो का प्रयोग निजी हित के लिए किया गया। जोकि नियमों के खिलाफ है।

जिला मिशन निदेशक और एडीसी की अनुमति के बिना एक निजी बैंक में परियोजना के नाम पर नया खाता खोला गया। इसमें नाबार्ड की योजना के तहत पैसा ट्रांसफर होता था। इस पैसे का उपयोग स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के लिए किया जाना था। इस खाते के दो ब्लैंक चेक 13 मई 2020 को जारी कर दिए गए। जबकि उस दौरान मनीष कुमार पटना (बिहार )में अपने मूल निवास पर था। रिपोर्ट में इस बात पर हैरानी जाहिर की गई है कि जब कोई व्यक्ति कार्यालय में उपस्थित नहीं था, तो चेक कैसे जारी किया गया। डोंगल के नाम पर खुद को जारी की पेमेंट

जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि मनीष ने एक डोंगल अपने नाम पर खरीदा। इसकी पेमेंट सरकारी खाते से स्वयं को हस्तातरित की गई। डोंगल को मनीष ने इंटरनेट के प्रयोग के लिए खरीदा था। बिना प्रशासनिक अप्रूवल के जारी कर दिए कई पेमेंट

जिला मिशन कार्यालय के लिए लैपटॉप, कंप्यूटर और टेबल खरीदने के लिए पहले एक कमेटी बनाई गई थी, जिसको विश्वास लिए बिना ही सामान खरीद लिया गया। कमेटी की जांच रिपोर्ट के अनुसार सामान खरीद की पेमेंट 22 मई 2020 और 26 मई 2020 को बैंक से बेचने वालों के खाते में ट्रांसफर हो गई। जबकि प्रशासनिक अनुमति 4 जून 2020 को मिली है। मामले की जांच में तमाम अनियमितताएं सामने आई। मनीष कुमार को बर्खास्त करने के आदेश दिए गए हैं। अब जिला मिशन निदेशक को आगामी कार्रवाई के लिए कहा गया है।

-डा. अमरेंद्र कौर, सीईओ, हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन।

Edited By: Jagran