राजेश ढल्ल, चंडीगढ़ : शहर में हरियाली बढ़ाने और पुराने लगे हुए पेड़ों को बचाने की अहम जिम्मेदारी नगर निगम के बागवानी विभाग की है। इसके साथ ही हर साल हरियाली बढ़ाने का भी नगर निगम दावा करता है। लेकिन ग्रीन सिटी का दर्जा प्राप्त चंडीगढ़ में साल 2019 में नगर निगम के बागवानी विभाग ने शहर में पांच हजार 50 पौधे ही लगाए हैं। जबकि 755 हरे भरे पेड़ों को मंजूरी लेकर काटा गया है। इनमे से कई पेड़ ऐसे थे जिनकी बलि शहर के प्रोजेक्ट्स के लिए दी गई। इसके अलावा कई पेड़ खतरनाक थे जिन्हें काटा गया है। जबकि इन्हें री प्लांट भी किया जा सकता था। इसका खुलासा दैनिक जागरण द्वारा सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में हुआ है। जबकि नगर निगम के बागवानी विभाग के पास कर्मचारियों की लंबी-चौड़ी फौज है। मालूम हो कि शहर में हरियाली बढ़ाने के लिए नगर निगम के अलावा प्रशासन और वन विभाग की जिम्मेदारी है। नगर निगम के बागवानी विभाग का शहर की हरियाली के लिए करोड़ों रुपये का बजट है। सिर्फ 91 पेड़ किए रीप्लांट

जानकारी में यह भी खुलासा हुआ है कि 2019 में बागवानी विभाग ने कुल 91 पेड़ रीप्लांट किए हैं। ये वे पेड़ थे जिन्हें किसी कारण से दूसरी जगह पर शिफ्ट किया गया था। पर्यावरण प्रेमी राहुल महाजन का कहना है कि कितनी हैरानी की बात है कि नगर निगम पेड़ रीप्लांट का कितना शोर डालता है। लेकिन अगर 755 पेड़ काटे गए हैं तो उन्हें भी रीप्लांट करके बचाया जा सकता है। यह जो पेड़ काटे गए हैं, वह 30 से 40 साल पुराने थे जबकि जो पांच हजार पौधों को लगाने का दावा किया जा रहा है, उनमें से भी कितने चलते हैं। लगाए गए पौधों की देखभाल नगर निगम नहीं कर पाता है, इसी कारण शहर की हरियाली कम हो रही है। बड़, पीपल और पिलखन के भी पौधे लगाने चाहिए जोकि नगर निगम ने नहीं लगाए हैं। एक निवासी पर एक पौधा

शहर में करीब 12 लाख पौधे हैं। जिनमें से वन विभाग के ही छह लाख पौधे हैं। ऐसे में शहर में औसत एक व्यक्ति के पीछे एक पौधा है। इन 12 लाख पौधों में वे पौधे भी शामिल हैं जोकि लोगों ने अपने घरों के अंदर लगाए हुए हैं। हाल ही में केंद्र सरकार की ओर से शहर की हरियाली पर एक रिपोर्ट आई है जिसके अनुसार 55 हेक्टेयर हरियाली का एरिया बढ़ा है। तीन साल पहले पहली बार शहर के पेड़ों की गणना की गई थी जिसमें यह बात सामने आई थी कि एक लाख 65 हजार पेड़ इस समय शहर में लगे हुए हैं। शहर में ऐसे दर्जनों पेड़ हैं जिनकी आयु 60 से 80 साल तक हो गई है। पेड़ों पर लगी है दीमक, लोगों को आना होगा आगे

शहर में लगे पेड़ों को भी संभालने की जरूरत है क्योंकि इस समय शहर में हजारों पेड़ हैं जोकि कमजोर पड़ रहे हैं। ये कमजोर पेड़ ही हर बार बारिश और तेज हवा में गिर जाते हैं। यह पेड़ सांस न मिलने, दीमक और बीमारी लगने के कारण ढीले पड़ रहे हैं। प्रशासन और नगर निगम का बागवानी विभाग भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। ऐसे में इनकी संभाल करना अब हम शहरवासियों की जिम्मेदारी बन गई है क्योंकि जिस चंडीगढ़ में हम रहते हैं, वहां की हरियाली के कारण ही हमें पूरे देश में ग्रीन सिटी का दर्जा प्राप्त है। दीमक लगे पेड़ों को मामूली दवा डालकर बचाया जा सकता है। ऐसे पेड़ भी हैं जो चंडीगढ़ के बनने से पहले के हैं। जोकि अब सिटी ब्यूटीफुल की शान बन गए हैं। नगर निगम हर साल 40 हजार पौधे रोपण करता है। जिनमें 35 हजार सरबस (फूलदार) होते हैं। एक पेड़ काटने पर उसकी जगह पर पांच नए पौधे लगाए जाते हैं। नगर निगम लोगों के साथ मिलकर हरियाली बढ़ाने का प्रयास कर रहा है।

-किशन पाल, सुपरिंटेंडेट इंजीनियर, बागवानी विभाग

Posted By: Jagran

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