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3 ओलंपिक का अनुभव राजनीति में कितना आएगा काम? परगट सिंह के सामने बिखरी कांग्रेस को एकजुट करने की चुनौती

Published: Sun, 04 Oct 2026 06:03 AM (IST)

कांग्रेस हाईकमान ने पूर्व ओलिंपियन परगट सिंह को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया है। उनके सामने पार्टी ...और पढ़ें

पंजाब कांग्रेस के नवनियुक्त अध्यक्ष परगट सिंह। फाइल फोटो

पंजाब कांग्रेस के नवनियुक्त अध्यक्ष परगट सिंह। फाइल फोटो

HighLights

  1. परगट सिंह को पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष की कमान सौंपी गई।

  2. पार्टी में गुटबाजी खत्म कर संगठन को एकजुट करना मुख्य चुनौती।

  3. 2027 चुनाव से पहले बूथ स्तर तक पार्टी को सक्रिय करना।

डॉ. सुमित सिंह श्योराण, चंडीगढ़। हॉकी के मैदान पर मुश्किल परिस्थितियों में टीम का मनोबल बढ़ाकर मुकाबले का रुख बदलने वाले पूर्व ओलिंपियन और भारतीय हॉकी टीम के कप्तान परगट सिंह को कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कमान सौंप दी है।

अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के इस्तीफे के बाद हुए इस नेतृत्व परिवर्तन को 2027 विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को नई दिशा देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि प्रदेश अध्यक्ष बदलने के साथ कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं। असली परीक्षा अब परगट सिंह की नेतृत्व क्षमता और संगठन को साथ लेकर चलने की होगी।

परगट सिंह के लिए सबसे पहली और बड़ी चुनौती कांग्रेस के भीतर लंबे समय से चली आ रही गुटबाजी को खत्म करना है। प्रदेश कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा और पूर्व प्रधान राजा वड़िंग समेत कई वरिष्ठ नेताओं के अपने-अपने राजनीतिक प्रभाव क्षेत्र हैं।

कई नेता मुख्यमंत्री पद की दावेदारी रखते हैं। ऐसे में परगट के सामने सभी नेताओं को एक मंच पर लाने के साथ-साथ उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के बीच संगठन को चुनावी मोर्चे पर एकजुट रखना चुनौती होगी। हाल के महीनों में हाईकमान के स्तर पर एकता की कोशिशों के बावजूद गुटीय मतभेद पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं।

अनुभव की परीक्षा कांग्रेस के चुनावी मैदान में होगी...

परगट सिंह की सबसे बड़ी राजनीतिक पूंजी उनकी नेतृत्व क्षमता और हाकी की पृष्ठभूमि है। उन्होंने 1988, 1992 और 1996 ओलिंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया तथा 1992 बार्सिलोना और 1996 अटलांटा ओलिंपिक में भारतीय टीम की कप्तानी की। अर्जुन पुरस्कार और पद्मश्री से सम्मानित परगट बाद भारतीय टीम के कोच भी रहे।

यानी जिस खिलाड़ी ने मैदान पर अलग-अलग खिलाड़ियों को एक रणनीति के तहत खेलने के लिए तैयार किया, अब उसी अनुभव की परीक्षा कांग्रेस में होगी। खुद परगट सिंह ने भी अध्यक्ष बनने के बाद कहा है कि भारतीय की टीम की दो बार कप्तानी करने का अनुभव उन्हें नेतृत्व में मदद करेगा।

चुनाव जीतने के लिए बदलनी होगी कार्यशैली

परगट के सामने दूसरी बड़ी चुनौती संगठन को कागजों से निकालकर बूथ स्तर तक सक्रिय करने की है। पंजाब में कांग्रेस के पास अनुभवी नेता और मजबूत स्थानीय चेहरे हैं, लेकिन इनकी ताकत को एक साझा चुनावी रणनीति में बदलना जरूरी होगा। उम्मीदवार चयन, टिकटों पर सहमति, युवा नेताओं को जगह, पुराने कार्यकर्ताओं की सक्रियता और तीनों क्षेत्रों—माझा, मालवा और दोआबा—में संगठन का संतुलन साधना भी उनके सामने होगा।

इसके साथ ही आम आदमी पार्टी की सरकार के खिलाफ कांग्रेस को केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित न रखकर रोजगार, नशा, किसानों, कानून-व्यवस्था और विकास जैसे मुद्दों पर स्पष्ट और लगातार अभियान चलाना होगा। भाजपा और अकाली दल के साथ मुकाबले के लिए भी पार्टी को अपना राजनीतिक संदेश स्पष्ट करना पड़ेगा।

इसलिए परगट सिंह के सामने चुनौती केवल नया प्रदेश अध्यक्ष बनने की नहीं, बल्कि ऐसी टीम तैयार करने की है जो चुनाव तक साथ रहे। हॉकी में कप्तान अकेला मैच नहीं जीतता, पूरी टीम को एक रणनीति पर खेलना पड़ता है। अब पंजाब कांग्रेस के नए कप्तान के सामने भी सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वह अलग-अलग खेमों के खिलाड़ियों को एक टीम बनाकर मैदान में उतार पाएंगे।