जागरण संवाददाता, चंडीगढ़ : नगर निगम की 26 नवंबर को सदन की बैठक होगी। बैठक में फिर से 24 घंटे पानी की सप्लाई शुरू करने के प्रोजेक्ट के लिए फ्रांस सरकार से लिए जाने वाले लोन की राशि वापस लौटाने के प्रस्ताव पर फैसला लिया जाएगा। मालूम हो कि यह और एसटीपी प्लांट अपग्रेड करने के बाद करोड़ों रुपये रखरखाव के लिए देने का प्रस्ताव पिछली दो सदन की बैठक में किसी न किसी कारण से टल रहा है। सदन तय करेगा कि 24 घंटे पानी की सप्लाई शुरू करने के लिए जो लोन राशि ली जाएगी, वह स्मार्ट सिटी लौटाएगी या नगर निगम। दोनों में से कोई भी फैसला हो लेकिन लोन लौटाने के लिए चंडीगढ़ में पानी के रेट बढ़ाने का फैसला लिया जाएगा क्योंकि इसके बिना लोन की राशि लौटाई नहीं जा सकती है। शहर में 24 घंटे पानी की सप्लाई शुरू करने के प्रोजेक्ट के लिए 440 करोड़ रुपये फ्रांस सरकार से लिए जा रहे हैं। स्मार्ट सिटी इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। इस समय पूरे शहर की पानी की सप्लाई नगर निगम के अंतर्गत है।अगले साल फरवरी माह में होने वाले रोज फेस्टिवल पर 86 लाख रुपये खर्च करने का प्रस्ताव भी पास होने के लिए इस सदन में आ रहा है। इसके साथ ही सदन में सेक्टर-23 के महावीर मुनि मंदिर को प्रॉपर्टी टैक्स से छूट देने का प्रस्ताव भी पास होने के लिए आ रहा है।

सदन में हंगामा होना तय

सदन की बैठक में यह भी प्रस्ताव आ रहा है कि अगर किसी ने अपनी इमारत की फायर एनओसी नहीं ली हुई तो आग लगने पर उससे शुल्क भी चार्ज किया जाए लेकिन इस प्रस्ताव पर चर्चा से पहले अभी से व्यापारियों ने विरोध करना शुरू कर दिया है। शहर के व्यापारी नेता व केंद्रीय गृहमंत्री सलाहकार समिति सदस्य कैलाश जैन ने नगर निगम द्वारा भवन मालिकों द्वारा फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट न लिए जाने की सूरत में भवन में लगने वाली आग को बुझाने के पैसे वसूल किए जाने की प्रपोजल पर एतराज जताया है और इसे गैरजरूरी बताते हुए सभी पार्षदों से आग्रह किया है कि वे ऐसी किसी भी प्रपोजल का साथ न दे। निगम की मंशा पर हैरानी क्यों न हो

कैलाश जैन ने कहा है कि बड़ी हैरानी की बात है कि नगर निगम अब आग बुझाने के भी पैसे वसूल करने की मंशा रखता है। प्रपोजल के अनुसार भगवान न करें, अगर किसी व्यापारी की दुकान में आग लग जाए और उसने फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट नहीं लिया है तो नगर निगम उससे आग बुझाने के पैसे वसूल करेगा जो सरासर गलत है। एक तरफ तो बेचारा आग लगने के नुकसान से परेशान दूसरी तरफ उसे आग बुझाने के पैसे भी देने होंगे। जो कहीं भी तर्कसंगत नहीं है। कैलाश जैन का यह भी कहना है कि अगर कोई भवन मालिक फायर सेफ्टी नियमों का पालन नहीं करता तो उसे ऐसा न करने के एवज में जुर्माना लगाया जा सकता है। लेकिन आग बुझाने के पैसे वसूल करना गलत है। वहीं, कांग्रेस पार्षद सतीश कैंथ का कहना है कि आग बुझाने का शुल्क चार्ज करने का प्रस्ताव ही नहीं बनना चाहिए। वे इस प्रस्ताव का विरोध करेंगे। 550 करोड़ का एसटीपी टेंडर का मामला भी गरमाएगा

बैठक में 550 करोड़ का एसटीपी का टेंडर निकलने का मामला भी गरमाएगा क्योंकि स्मार्ट सिटी ने टेंडर निकालने के बाद नगर निगम से इसकी मंजूरी मांगी है। यह मंजूरी सदन की बैठक में आ रही है। स्मार्ट सिटी के तहत बनाए जा रहे एसटीपी प्लांट्स की 15 साल तक मेंटेनेंस और ऑपरेशन की लागत एमसी पर 238 करोड़ रुपये पड़ रही है। इसके साथ ही 15 साल का बिजली का खर्चा भी 289 करोड़ रुपये अलग से पड़ रहा है। यह राशि नगर निगम को अदा करने के लिए कहा जा रहा है। पार्षदों का कहना है कि अगर यह राशि नगर निगम को देनी है तो पहले सदन में तय होता, उसके बाद टेंडर निकाला जाता। वहीं, सदन की बैठक से पहले 25 नवंबर को नगर निगम की वित्त एवं अनुबंध कमेटी की बैठक है।

Posted By: Jagran

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