चंडीगढ़, जेएनएन। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर निवासी 17 वर्षीय साहिल दुनिया से जाते-जाते चार गंभीर मरीजों के साथ-साथ दो दृष्टिहीनों की जिंदगी में भी खुशियां बिखेर गए। साहिल के ऑर्गन डोनेशन की प्रक्रिया पीजीआइ में पूरी की गई। पीजीआइ में भर्ती दो मरीजों के अलावा दिल्ली और अहमदाबाद के एक-एक मरीजों को भी उनके ऑर्गन डोनेट किए गए।

एनसीसी कैडेट थे 17 वर्षीय साहिल

एनसीसी कैडेट और बेहद उत्साही रहे साहिल के परिजनों को अपने होनहार और प्यारे बेटे को खोने का गम तो है, लेकिन उन्हें इस बात का संतोष है कि उनका बेटा अपने जीवन को सार्थक सिद्ध कर गया।

बाइक चलाते वक्त आठ अक्टूबर को हुआ था सड़क हादसा

आठ अक्तूबर को बाइक चलाते वक्त साहिल उबड़-खाबड़ सड़क पर संतुलन खो बैठा। उस दौरान उसकी बाइक गिर गई और साहिल का सिर फुटपाथ से टकरा गया। इससे सिर में गंभीर चोटें आईं। परिजनों ने उसे टांडा मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया, जहां स्थिति गंभीर होने पर उसे 10 अक्तूबर को पीजीआइ रेफर किया गया। पीजीआइ में इलाज के दौरान 15 अक्तूबर की शाम साहिल को ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया।

ग्रीन कॉरिडोर की ली मदद, ट्रैफिक पुलिस ने दिया सहयोग

साहिल के पिता भीम सिंह और उसके परिजनों से ऑर्गन डोनेशन की अनुमति मिलने पर पीजीआइ में डोनेशन की प्रक्रिया पूरी की गई। साहिल का हार्ट, किडनी, लीवर और दोनों कार्निया सुरक्षित करने के बाद वेटिंग लिस्ट वाले मरीजों से क्रॉस मैचिंग कराया गया। पीजीआइ में हार्ट और लीवर के लिए मरीज न मिलने पर उसके लिए दूसरे शहरों के अस्पतालों में सर्च किया गया। दिल्ली के आरएन आर और अहमदाबाद के आइकेडीआरसी के एक-एक मरीजों से उसका क्रॉस मैचिंग हो गया। पीजीआइ प्रशासन ने ट्रैफिक पुलिस के सहयोग से ग्रीन कॉरिडोर के जरिये दोनों ऑर्गन को समय सीमा के अंदर बाहर भेजे जाने की व्यवस्था की।

परिजनों के साथ ही पीजीआइ प्रशासन को भी है गर्व

साहिल के पिता भीम सिंह का कहना है कि मुझे अपने बेटे पर गर्व है। उसने जीते जी भी दूसरों की मदद की और दुनिया से जाते हुए भी दूसरों को नया जीवन दे गया। वहीं पीजीआइ के एमएस डॉ. एके गुप्ता का कहना है कि साहिल के परिवारवालों की सोच और सही समय पर लिए गए निर्णय के कारण ही छह लोगों की जिंदगी में खुशियां लौट सकी हैं।

दु:ख की घड़ी के बावजूद दूसरों के लिए अहम निर्णय लेने वाले साहिल के परिवार की पीजीआइ सराहना करता है। ऐसे निर्णय के जरिये सैकड़ों लोगों की जिंदगी बचाई जा सकती है।

- डॉ. जगतराम, डायरेक्टर पीजीआइ।

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Posted By: Vikas Kumar

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