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हिमाचल के पुलिसकर्मी को मिला नया जीवन, 2 साल से था लीवर का इंतजार; चंडीगढ़ PGI में सफल अंग प्रत्यारोपण

Published: Tue, 06 Oct 2026 06:32 PM (IST)

हिमाचल पुलिस के राकेश को चंडीगढ़ पीजीआई में दो साल के इंतजार के बाद दाता सिंह का लीवर मिला, जिससे ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश पुलिस के जवान राकेश कुमार।

 हिमाचल प्रदेश पुलिस के जवान राकेश कुमार।

HighLights

  1. ड्यूटी के साथ बीमारी से जूझते हुए उम्मीद में कटे दिन।

  2. चंडीगढ़ पीजीआई में लीवर का सफल प्रत्यारोपण।

  3. स्वस्थ होकर पहुंचे घर, अंगदाता परिवार का आभार।

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। हिमाचल प्रदेश पुलिस फोर्स में सेवाएं देने वाले राकेश पिछले करीब दो साल से नए लीवर का इंतजार कर रहे थे। ड्यूटी के साथ बीमारी से जूझते हुए हर दिन उनके लिए उम्मीद और इंतजार में बीत रहा था। आखिरकार पीजीआई में दाता सिंह का लीवर मिलने के बाद उनका सफल प्रत्यारोपण हुआ।

प्रत्यारोपण के बाद स्वास्थ्य में संतोषजनक सुधार होने पर उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। राकेश के लिए यह सिर्फ एक सफल चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि जिंदगी को दोबारा शुरू करने का मौका है।

पीजीआई के जनरल सर्जरी और हेपेटोलाॅजी विभाग की संयुक्त टीम ने यह प्रत्यारोपण किया। प्रो. एल कामन, डाॅ. सुनील तनेजा और डाॅ. स्वप्नेश साहू की देखरेख में बहुविषयक प्रत्यारोपण टीम ने पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया।

करीब दो साल तक उपयुक्त अंग का इंतजार करने के बाद राकेश को मृतक दाता का लीवर उपलब्ध हुआ और दाते के लीवर का प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक किया गया।

राकेश ने अस्पताल से छुट्टी के समय कहा कि करीब दो साल इंतजार करने के बाद नए जीवन का अवसर मिलना उनके लिए ऐसी खुशी है, जिसे शब्दों में व्यक्त करना मुश्किल है।

कृतज्ञता को हमेशा अपने दिल में रखेंगे

उन्होंने अंगदाता परिवार के प्रति आभार जताते हुए कहा कि जिस समय परिवार खुद अपनों को खोने के गहरे दुख से गुजर रहा था, उस समय उन्होंने किसी दूसरे व्यक्ति को जीवन देने का फैसला किया। इस निर्णय ने उन्हें भविष्य दिया है और वह इस कृतज्ञता को हमेशा अपने दिल में रखेंगे।

लीवर प्रत्यारोपण के बाद राकेश का स्वस्थ

पीजीआई के जनरल सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रो. एल कामन ने कहा कि लीवर प्रत्यारोपण के बाद राकेश का स्वस्थ होकर अस्पताल से घर जाना पूरी टीम के लिए संतोष की बात है। हालांकि, हर मृतक-दाता प्रत्यारोपण के पीछे एक ऐसा परिवार होता है, जो अपने गहरे दुख के बीच दूसरों को जीवन देने जैसा असाधारण फैसला करता है।

दाता परिवार के साहस और उदारता के कारण ही राकेश के जीवन में यह नई शुरुआत संभव हो सकी है। जनरल सर्जरी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डाॅ. स्वप्नेश साहू ने कहा कि राकेश का लंबा इंतजार खत्म होने से लेकर सफल प्रत्यारोपण और अस्पताल से छुट्टी तक का सफर समय पर अंगदान और बेहतर समन्वित चिकित्सा व्यवस्था की अहमियत बताता है।

उन्होंने कहा कि राकेश के स्वस्थ होने की खुशी है, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में सबसे बड़ा सम्मान उस दाता परिवार को मिलना चाहिए, जिसने अपने दुख के बीच किसी दूसरे व्यक्ति को जीवन देने का फैसला किया।