विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

LLB की छात्रा के लिए PU में होगी विशेष परीक्षा, हाईकोर्ट का आदेश, गलत प्रश्नपत्र थमा बाद में एब्सेंट दिखाया था

Published: Mon, 02 Feb 2026 05:06 PM (IST)

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब यूनिवर्सिटी को एक एलएलबी छात्रा के लिए ला ऑफ क्राइम्स-II की विशेष परीक्षा आयोजित ...और पढ़ें

हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि विशेष परीक्षा आयोजित की जाए ताकि छात्रा का एक वर्ष बर्बाद न हो और उसका करियर सुरक्षित रह सके।

हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि विशेष परीक्षा आयोजित की जाए ताकि छात्रा का एक वर्ष बर्बाद न हो और उसका करियर सुरक्षित रह सके। 

HighLights

  1. कोर्ट ने छात्र के भविष्य को प्राथमिकता दी।

  2. ला ऑफ क्राइम्स–II (ओल्ड) की विशेष परीक्षा होगी।

  3. कोर्ट ने कहा, अकादमिक भविष्य प्रशासनिक असुविधा से कहीं बड़ा।

दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) को एलएलबी की छात्रा के लिए ला ऑफ क्राइम्स–II (ओल्ड) की विशेष परीक्षा आयोजित करनी होगी। यह आदेश पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने दिया है।

शिक्षा व्यवस्था में हुई गंभीर लापरवाही पर सख़्त रुख अपनाते हुए कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि छात्र का अकादमिक भविष्य किसी भी प्रशासनिक असुविधा से कहीं बड़ा है और इसी सिद्धांत के आधार पर कोर्ट यूनिवर्सिटी को निर्देश दिया है कि एलएलबी की छात्रा के लिए ला ऑफ  क्राइम्स–II (ओल्ड) की विशेष परीक्षा आयोजित की जाए।

यह मामला उस छात्रा का है जिसने एलएलबी के सभी पेपर पास कर लिए थे और केवल एक पेपर में री-अटेम्प्ट दे रही थी। मई 2025 की परीक्षा में इनविजिलेटर ने दोनों कोर्सों के पेपर साथ रखे होने के बावजूद गलत प्रश्नपत्र थमा दिया, छात्रा ने मजबूरी में वही हल किया क्योंकि उसके पास कोई और विकल्प नहीं था।

बाद में अक्टूबर 2025 में परिणाम घोषित हुआ तो उसे “एब्सेंट” बता दिया गया, जबकि उसी केंद्र पर मौजूद अन्य दो छात्रों ने सही पेपर हल किया था। इस लापरवाही के बाद भी विश्वविद्यालय ने कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाया, छात्रा की ओर से दलील दी कि उसकी बिना किसी गलती के दंडित की जा रही है।

पीयू प्रशासन ने यह दिया तर्क

पीयू प्रशासन  की ओर से तर्क दिया कि विश्वविद्यालय अपने कैलेंडर और नियमों से बंधा है और विशेष परीक्षा संभव नहीं है, लेकिन   हाई कोर्ट  ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि नियमों का उद्देश्य न्याय में बाधा बनना नहीं बल्कि व्यवस्था को सुचारु बनाना है और जहां गलती स्वयं संस्था की हो वहां नियमों की आड़ नहीं ली जा सकती।

कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर विश्वविद्यालय ने पुराने और नए पाठ्यक्रम के छात्रों की संयुक्त परीक्षा कराई थी तो प्रश्नपत्र वितरण में विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए थी और त्रुटि सामने आते ही तुरंत सुधार किया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

परिणामस्वरूप एक होनहार छात्रा का भविष्य अधर में लटक गया, हाईकोर्ट ने अब स्पष्ट आदेश दिया है कि विशेष परीक्षा आयोजित की जाए ताकि छात्रा का एक वर्ष बर्बाद न हो और उसका करियर सुरक्षित रह सके।