'छह साल की बच्ची मां के पास रहेगी...', हाईकोर्ट का आदेश; चंडीगढ़ में महिला के घर छोड़ते समय छीन ले गए थे ससुराल वाले
पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने छह साल की बच्ची की कस्टडी उसकी मां को सौंपने का आदेश दिया है। अदालत ने ...और पढ़ें

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का अहम फैसला। (सांकेतिक फोटो)
HighLights
हाईकोर्ट ने छह साल की बच्ची की कस्टडी मां को सौंपी।
बच्ची के कल्याण और मां की देखभाल को महत्व दिया।
मां ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर कस्टडी मांगी थी।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने छह साल की बच्ची की अभिरक्षा मां को सौंपने का आदेश दिया है। बच्ची अक्तूबर 2025 से पिता के परिवार के पास रह रही थी। मां ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर बेटी को पेश कराने और कस्टडी देने की मांग की थी।
सुनवाई में अदालत ने बच्ची की कम उम्र और कल्याण पर विचार करते हुए कहा कि उसके विकास में मां की देखभाल और स्नेह महत्वपूर्ण हैं। हाईकोर्ट ने इसी आधार पर बच्ची की कस्टडी मां को सौंपने का निर्देश दिया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि उसकी स्थायी अभिरक्षा के प्रश्न पर सक्षम अदालत तथ्यों और परिस्थितियों का विस्तृत आकलन कर निर्णय ले सकती है। चंडीगढ़ निवासी याचिकाकर्ता की शादी दिसंबर 2014 में हुई थी और मार्च 2020 में बेटी का जन्म हुआ।
महिला का पति रोजगार के सिलसिले में कुवैत चला गया था। महिला ने आरोप लगाया कि ससुराल में उसके साथ दुर्व्यवहार हुआ और शिकायत करने पर उसकी बात नहीं सुनी गई। इसके बाद वह चार अक्तूबर 2025 को बेटी के साथ ससुराल से निकल गई।
महिला के अनुसार, रास्ते में ससुराल पक्ष के लोगों ने उससे बच्ची को अलग कर दिया। उसने पुलिस से शिकायत की और परिवार स्तर पर भी बच्ची की वापसी का प्रयास किया, लेकिन बेटी की कस्टडी नहीं मिली। इसके बाद उसने हाई कोर्ट का रुख किया।
ससुराल पक्ष ने महिला के आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि बच्ची की उचित देखभाल की जा रही है। उनका पक्ष था कि महिला अपनी मर्जी से ससुराल छोड़कर गई थी।
