कानून की नजर में जिंदगी अनमोल; सड़क हादसे में 100% दिव्यांग बच्ची को 3.61 करोड़ मुआवजा
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सड़क हादसे में 100% दिव्यांग हुई नौ वर्षीय बच्ची को ₹3.61 करोड़ का मुआवजा देने ...और पढ़ें

हाईकोर्ट ने कहा-मुआवजा किसी प्रकार की दया या अनुग्रह नहीं, बल्कि पीड़ित का वैधानिक अधिकार।
HighLights
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का अहम फैसला।
हादसे के बाद बच्ची हुई थी स्थायी रूप से अक्षम।
पहले 78 लाख रुपये तय हुआ था मुआवजा।
दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अत्यंत संवेदनशील मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल होने के बाद स्थायी रूप से अक्षम हुई बच्ची को 3.61 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मुआवजा किसी प्रकार की दया या अनुग्रह नहीं, बल्कि पीड़ित का वैधानिक अधिकार है, जिसे न्यायसंगत, उचित और मानवीय आधार पर तय किया जाना चाहिए।
जस्टिस अर्चना पुरी की एकल पीठ ने बीमा कंपनी की ओर से मुआवजा घटाने की अपील को खारिज करते पीड़िता अशकारा जैन की अपील स्वीकार कर ली। कोर्ट ने 19 जनवरी 2013 को मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण गुरुग्राम द्वारा दिए गए 78.10 लाख रुपये के मुआवजे को अपर्याप्त बताते हुए व्यापक पुनर्मूल्यांकन किया।
मामले के अनुसार पांच जून 2011 को हुए हादसे में नौ वर्षीय बच्ची को गंभीर मस्तिष्क चोटें आईं, जिसके चलते वह पर्सिस्टेंट वेजिटेटिव स्टेट में चली गई। वह न देख सकती है, न बोल सकती है और न ही कोई शारीरिक गतिविधि स्वयं कर सकती है। अदालत ने फैसले में कहा कि उसके बचपन के सपने चकनाचूर हो गए और जीवन की संभावनाएं पूरी तरह समाप्त हो गईं।
हाईकोर्ट ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम एक सामाजिक कल्याण कानून है और इसके तहत मुआवजा 'जस्ट कंपन्सेशन' होना चाहिए न तो अत्यधिक और न ही अत्यल्प। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते कहा कि मुआवजा तय करते समय पीड़ित की गरिमा, जीवन की गुणवत्ता और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखना अनिवार्य है।
कोर्ट ने पाया कि अधिकरण ने भविष्य के इलाज और पीड़ा के मुआवजे को केवल दो वर्षों तक सीमित कर गंभीर त्रुटि की। जबकि बच्ची को जीवनभर विशेष चिकित्सा, नर्सिंग और देखभाल की आवश्यकता है। इसी आधार पर अदालत ने भविष्य के इलाज और परिचारक खर्च के लिए 1.22-1.22 करोड़ रुपये निर्धारित किए।
इसके अलावा, अदालत ने 34 लाख रुपये पूर्व चिकित्सा खर्च, 17.38 लाख रुपये अतिरिक्त बिल, 15.22 लाख रुपये भविष्य की आय हानि, 30 लाख रुपये दर्द व पीड़ा, 10 लाख रुपये जीवन की सुविधाओं और वैवाहिक संभावनाओं के नुकसान तथा अन्य मदों में राशि जोड़ते हुए कुल मुआवजा 3.61 करोड़ रुपये तय किया।
मुआवजा कानून की खैरात नहीं : कोर्ट
कोर्ट ने निर्देश दिया कि बढ़ी हुई राशि पर छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज दिया जाए। साथ ही एक करोड़ रुपये तत्काल पिता को जारी करने और शेष राशि को फिक्स्ड डिपाजिट में सुरक्षित रखने का आदेश दिया, ताकि जरूरत पड़ने पर इलाज के लिए उपयोग किया जा सके।
अदालत ने फैसले में दो टूक कहा कि मुआवजा कानून की खैरात नहीं, बल्कि अधिकार है और न्यायालयों का दायित्व है कि वे पीड़ित की गरिमा को बनाए रखते हुए वास्तविक और समुचित राहत सुनिश्चित करें।
